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बारिश के बाद शुरू होगा युद्ध स्तर पर काम, रामायणकालीन नजर आएगा राम मंदिर परिसर, बनेंगे चार गोपुरम

- सीता रसोई का जर्जर भवन गिराया जाएगा, राम जन्म भूमि परिसर का होगा विस्तार - इकबाल अंसारी ने कहा- अयोध्या में मस्जिद निर्माण के लिए मिली भूमि पर बाबर के नाम से कुछ न बने

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बारिश के बाद शुरू होगा युद्ध स्तर पर काम, रामायणकालीन नजर आएगा राम मंदिर परिसर, बनेंगे चार गोपुरम

बारिश के बाद शुरू होगा युद्ध स्तर पर काम, रामायणकालीन नजर आएगा राम मंदिर परिसर, बनेंगे चार गोपुरम

अयोध्या. अयोध्या में पांच अगस्त को भूमिपूजन के बाद रामनगरी में मंदिर (Ram Mandir) के निर्माण की तैयारियां शुरू किए जाने का इंतजार है। ट्रस्ट के पदाधिकारी बारिश खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं क्योंकि मंदिर की जो बुनियाद है वो 200 फीट गहरी खोदी जानी है। ऐसे में बुनियाद में पानी न भर जाए, समस्या न हो इसको लेकर ट्रस्ट के सदस्य के साथ-साथ कार्यदाई संस्था एलएनटी बारिश खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं। बारिश के खत्म होते ही नींव की खुदाई का काम शुरू कर दिया जाएगा। वहीं, जबतक मंदिर का निर्माण शुरू नहीं हो जाता तब तक मंदिर के अंदर परिसर में छोटे-छोटे कार्य किए जा रहे हैं। इसके साथ ही मंदिर परिसर में कई बदलाव किए जाएंगे। मंदिर के परिसर को इस तरह बनाया जाएगा कि प्रवेश करते ही भक्तों को रामायणकाल का एहसास हो।

राम मंदिर का निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर दिल्ली में आयोजित निर्माण समिति की बैठक के बाद शुरू कर दिया जाएगा। रामलला के गर्भगृह की जमीन का समतलीकरण हो चुका है और उसका मानचित्र भी लगभग बनकर तैयार है। 20 अगस्त को दिल्ली में निर्माण समिति की बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक के बाद मंदिर निर्माण की के कार्य में तेजी आ जाएगी।

मंदिर में बनेंगे चार प्रवेश द्वार

ट्रस्ट की मंशा है कि राममंदिर परिसर रामायण कालीन दिखना चाहिए। इसके लिए मंदिर में कुछ ऐसी योजनाएं बनाए जाने का विचार है जिनसे मंदिर परिसर पहुंचते ही रामभक्तों के जेहन में त्रेतायुग जीवंत होता प्रतीत होगा। राममंदिर को विश्व का सबसे बड़ा तीर्थस्थल बनाने की योजना है। रामजन्मभूमि परिसर को कुछ इस तरह विकसित किया जाएगा कि प्रवेश करते ही श्रद्धालु व भक्तों को रामायणकालीन समय का अहसास होने लगे। श्रीराम मंदिर में चार प्रवेश द्वार बनाए जाएंगे जिन्हें गोपुराम के नाम से जाना जाएगा। इसके अलावा दो मुख्य द्वार और दो आपात द्वार होंगे। परिसर के मंदिर से अलग झांकी के माध्यम से राममंदिर के लिए 500 वर्षों तक हुए संघर्ष का इतिहास भी म्यूजियम में प्रदर्शित किया जाएगा, ताकि युवा पीढ़ी को राममंदिर आंदोलन की पूरी जानकारी हो सके। इसके साथ ही गुरुकुल और शोध संस्थान की भी स्थापना होगी जिसमें श्रीराम से जुड़े तथ्यों पर शोध किया जाएगा।

सीता रसोई का जर्जर भवन गिराया जाएगा

परिसर में स्थित जर्जर मंदिरों की रुपरेखा ने सिरे से तैयार की जाएगी। इस कड़ी में एलएण्डटी ने अपनी सहयोगी टीम को परिसर में स्थित जर्जर मंदिरों के ध्वस्तीकरण की जिम्मेदारी सौंप दी है। राम मंदिर के लिए अधिग्रहण की गई भूमि में लगभग एक दर्जन मंदिर व भवन शामिल हैं। राम जन्म स्थान सीता रसोई भी इनमें शामिल है। सबसे पहले परिसर में सीता रसोई के जर्जर हो चुके भवन को ध्वस्त किया जाएगा। राम जन्मभूमि परिसर में मेकशिफ्ट स्ट्रक्चर के चारों ओर 2.77 एकड़ जमीन के समतलीकरण के दौरान रामलला के गर्भगृह के ठीक सामने एडवर्ड तीर्थ में विवेचनी सभा की ओर से लगाए गए शिलालेख को नहीं उखाड़ा गया है।

मस्जिद के लिए मिली जमीन पर बाबर के नाम से कुछ न बने

बाबरी मस्जिद के पक्षकार रहे इकबाल अंसारी (Iqbal Ansari) ने अयोध्या के पांच एकड़ में बनने वाली मस्जिद को लेकर बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि मस्जिद के लिए मिली जमीन पर बाबर के नाम कुछ न बने क्योंकि हमारा बाबर से कुछ लेना देना नहीं है। इकबाल अंसारी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट से सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को मिली धन्नीपुर की पांच एकड़ भूमि में बनने वाली मस्जिद, स्कूल, अस्पताल या किसी भी संस्था के नाम में बाबर को न जोड़कर भारतीय मुस्लिम महापुरुषों के नाम से इनका नामकरण होना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि ये संस्थाएं उनके नाम से जानी जाएं, जिन्होंने देश के लिए कुर्बानी दी। संस्थाओं का नाम एपीजे अब्दुलकलाम, अब्दुल कलाम आजाद, अशफाक उल्ला खां, वीर अब्दुल हमीद के नाम से हों क्योंकि ये हिंदुस्तान का गौरव हैं।

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