
अयोध्या में देवशिला का हुआ भव्य स्वागत
इन दिनों पूरे अयोध्या में बस एक ही धुन चल रहा है "सजा दो घर को गुलशन सा मेरे सरकार आए हैं। अयोध्या के संत समाज हो या फिर राम भक्त देवशिला को देखकर अभिभूत नजर आये।
अयोध्या में देवशिला का हुआ भव्य स्वागत
नेपाल से सड़क मार्ग के रास्ते 8 दिनों की यात्रा कर देर रात शालिग्राम की देवशिला रामसेवक पुरम में पहुंच गया है। जहां राम मंदिर ट्रस्ट और अयोध्यावाशियों के द्वारा भव्य स्वागत किया गया। .
नेपाल के पूर्व उप प्रधानमंत्री लेकर पहुंचे शिला
गंडकी नदी के देवशिला पर रामलला के सुंदर स्वरूप को दिए जाने के लिए नेपाल सरकार की ओर से पूर्व उप प्रधानमंत्री विमलेंद्र निधि और जनकपुर मंदिर के महंत तपेश्वर दास ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को समर्पित किया।
51 ब्राह्मणों ने किया शिला पूजन
इसके पहले रामसेवकपुरम में रखी गई शिला का 51 वैदिक विद्वानों के द्वारा शिला पूजन हुआ। आज सुबह से देवशिला का दर्शन करने के लिए भक्तों का तहत लगा रहा। हर कोई इस शिला में रामलला देख रहे हैं।
जनकपुर मंदिर के तरफ समर्पित हुई शिला
रामसेवकपुरम में शिला पूजन कार्यक्रम के दौरान राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चम्पतराय ने कहा कि 15 दिन पहले इस पत्थर को निकालकर अयोध्या तक लाने के लिए नेपाल सरकार और जनकपुर मंदिर के महंत तपेश्वर दास का बड़ा सहयोग रहा है।
न्यायालय ने माना था यहीं है राम जन्म स्थान
नेपाल के पूर्व उप प्रधानमंत्री विमलेंद्र निधि ने जानकारी देते हुए बताया कि इस शिला को सकारात्मक रूप में यहां लाने में आगे बढ़ा जब भारत में सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा फैसला दिया कि राम जन्मभूमि ही रामलला का जन्म स्थान है और वहां पर मंदिर बनाने के लिए जायज है।
भगवान विष्णु के अवतार माने जाते हैं शालिग्राम पत्थर
राम जन्मभूमि ट्रस्ट ने इच्छा जाहिर की थी। नेपाल के काली गंडकी जो भगवान विष्णु का प्रतीक माना जाता है। और भगवान राम भी विष्णु के ही अवतार माने जाते हैं। इसलिए वहां की शिला प्राप्त हो और उस शिला के ही रामलला की मूर्ति बने।
विशेषज्ञों के परीक्षण के बाद हुआ शिला का चयन
नेपाल सरकार ने ट्रस्ट की इच्छा को स्वीकार किया। नेपाल के पत्थरों के विशेषज्ञों के साथ कई पत्थरों की तलाश शुरू की जिसमे 40 शिलाओं का पहचान किया गया। जिसके वैज्ञानिक परीक्षण किया गया।
25 जनवरी को नेपाल से निकली थी देवशिला
गंडकी प्रदेश के मुख्यमंत्री के सहयोग से जिस प्रकार के पत्थर की आवश्यकता थी। उसके मानक को पूरा करते हुए। दो शिला को लेकर 25 जनवरी को लेकर जनकपुर के लिए निकले और फिर यह शिला आज अयोध्या लेकर पहुचे है।
Published on:
03 Feb 2023 10:14 am
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