
Ravishankar
अयोध्या. देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट में चल रहे राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद का हल कोर्ट के फैसले के आने से पहले आपसी समझौते के आधार पर किए जाने की मुहिम को लेकर आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर धार्मिक नगरी अयोध्या पहुंचे। यहां उन्होंने निर्मोही अखाड़ा में राम जन्मभूमि मामले के पक्षकार निर्मोही अखाड़ा के अयोध्या शाखा के महंत दिनेन्द्र दास से मुलाकात की और मामले में आपसी बातचीत के जरिए विवाद को हल करने के लिए सहयोग मांगा।
करीब 15 मिनट तक बंद कमरे में मुलाकात के बाद निर्मोही अखाड़ा में पत्रकारों से बातचीत करते हुए श्री श्री रविशंकर ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला इस मामले को लेकर आएगा उसे तो हर किसी को मानना है, लेकिन अच्छा मौका है जब कोर्ट के निर्णय से पहले आपसी बातचीत और सुलह समझौते के आधार पर विवाद का हल निकल जाए।
श्री श्री रविशंकर ने कहा कुछ लोगों को लगता है कि विवाद का हल समझौते से नहीं निकल सकता है, लेकिन ऐसा सब नहीं सोचते। उनक इस प्रयास का कुछ लोग समर्थन व कुछ विरोध कर रहे हैं। इस पर श्री श्री रविशंकर ने कहा कि बहुत से लोगों को यह आशा नहीं है कि इस विवाद का हल बातचीत के जरिए भी हो सकता है, लेकिन ऐसे लोगों की भी अच्छी संख्या है जो यह मानते हैं कि बातचीत के जरिए इस विवाद का हल निकाला जा सकता है। अगर ऐसा संभव हुआ तो आज से सौ साल बाद भी हमारी आने वाली पीढ़ी इस बात को याद रखेगी कि इतने बड़े विवाद का हल दोनों पक्षों ने मिलकर आपसी सूझ बूझ से कर लिया और यह इतिहास में दर्ज हो जाने वाली बात होगी।
"25 सालों में बदल चुका है बहुत कुछ आज की युवा पीढ़ी चाहती है विवाद का हल"
पत्रकारों के एक सवाल के जवाब में आध्यात्मिक गुरु ने कहा कि बीते 25 सालों से यह विवाद चल रहा है और 25 सालों में बहुत कुछ बदल चुका है। युवा पीढ़ी अब इस विवाद का हल चाहती है। कुछ लोग अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण से असहमत हो सकते हैं, लेकिन ऐसा सब नहीं सोचते। हम अयोध्या में समाधान की आशा लेकर के आए हैं। समाधान के लिए कोई फार्मूला नहीं हो सकता। इसके लिए जरूरी है दोनों समुदाय के लोग एक साथ बैठे और इस मामले को सुलझाएं।
Published on:
16 Nov 2017 05:27 pm
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