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493 साल बाद रामलला को मिली चांदी की पालकी, कान्हा विराजते हैं सोने के हिंडोले में

सावन के महीने में मंदिरों में भगवान झूला झूलते हैं

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493 साल बाद रामलला को मिली चांदी की पालकी, कान्हा विराजते हैं सोने के हिंडोले में

अयोध्या. 493 वर्ष बाद नागपंचमी पर पहली बार रामलला चांदी की पालकी में झूला झुलेंगे। 13 अगस्त से वह झूले में विराजेंगे। इस दौरान उन्हें कजरी गीत भी सुनाए जाएंगे। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने 21 किलो चांदी से रामलला का झूला बनवाया है। 11 अगस्त से अयोध्या में झूलनोत्सव शुरू हो गया है। रक्षाबंधन तक मंदिरों में भगवान को झूला झुलाया जाएगा। उधर, वृंदावन में कान्हा सोने के हिंडोले में विराजमान हैं। स्वर्ण-रजत जड़ित इस हिंडोले की कीमत 6.16 करोड़ रुपए है।

सावन के महीने में तृतीया तिथि पर हरियाली तीज के दिन मणि पर्वत पर भगवान श्रीराम माता सीता के साथ झूला झूलते हैं। इसी के साथ अयोध्या के सभी मंदिरों में झूलनोत्सव की शुरुआत हो जाती है और मंदिर में रखें चल विग्रह झूले पर विराजमान हो जाते हैं। मान्यता है कि इस दौरान भगवान को झूला झुलाने से जीवन-मरण के झूले से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
रामलला को अभी तक लकड़ी के झूले में झुलाया जाता रहा है। करीब तीन दशक से वह टेंट में विराजमान थे। हाल ही में उन्हें अस्थाई मंदिर में स्थापित किया गया है। भव्य राम मंदिर निर्माण होने तक रामलला यहीं रहेंगे। यहां उनके लिए चांदी का झूला बनवाया गया है। रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने बताया कि झूला मंदिर में पहुंच चुका है। नाग पंचमी के दिन रामलला इस पर विराजेंगे।

अयोध्या में इस बार कड़ी पाबंदियां
अयोध्या में झूला महोत्सव प्रतिवर्ष धूमधाम से मनाया जाता है, लेकिन पिछले वर्ष की तरह इस बार भी कोरोना महामारी के चलते पाबंदियां कड़ी कर दी गई हैं। अयोध्‍या में आने वाले श्रद्धालुओं को आरअी-पीसीआर की निगेटिव रिपोर्ट लानी अनिवार्य होगी।

6.16 करोड़ के हिंडोले में बांके बिहारी
वृंदावन में भगवान कृष्ण स्वर्ण-रजत हिंडोले में विराजमान हैं। 74 साल पूर्व ठाकुर जी पहली बार इसी हिंडोले पर विराजमान हुए थे। तब से यही परम्परा चली आ रही है। 1000 तोला सोने से बने इस हिंडोले में 2000 तोला चांदी और कई रत्न भी जड़े हैं। सावनभर भगवान कृष्ण मथुरा के विभिन्न मंदिरों में हिंडोले पर सवार होकर ही भक्तों को दर्शन देंगे। ठाकुर बांके बिहारी मंदिर के अलावा मथुरा, गोकुल, बरसाना और ब्रज के कई अन्य मंदिरों में भी भगवान हिंडोले विराजते हैं। द्वारकाधीश मंदिर में दो हिंडोले चांदी के हैं। श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर भी सोने के हिंडोले पर बाल रूप में कन्हैया विराजमान हैं। वृंदावन में राधारमण,राधावल्लभ और गोकुल में नंद भवन में भी सोने-चांदी के हिंडोले पर कृष्ण कन्हैया झूला झूल रहे हैं।

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