
जहां-जहां पड़े श्रीराम के पग, वहां की मिट्टी से तैयार होगी भगवान राम की भव्य मूर्ति, रामलीला के दौरान होंगे दर्शन
लखनऊ. इस बार अयोध्या की राम लीला बेहद खास होने वाली है। क्योंकि भक्तों को रामलीला में मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम की जिस मूर्ति के दर्शन होंगे वह अपने आप में अनूठी होगी। भगवान श्री राम की यह मूर्ति उनकी चरण रज से तैयार की जा रही है। यानी दुनिया में जहां-जहां भगवान राम के चरण पड़े थे, वहां से रामलीला कमेटी ने मूर्ति के लिए मिट्टी इकट्ठा की और उसी मिट्टी से अब भगवान राम की बेहद खास मूर्ति तैयार हो रही है। दुनिया भर से इकट्ठा कर लाई गई भगवान राम की चरण रज से मूर्तिकार नरेश कुमावत ने भव्य मूर्ति को आकार दे दिया है। मूर्ति को रंगो से सजाया जा रहा है। रामलीला के दौरान इसे सुपूजित कर स्थापित किया जाएगा और पूरे आठ दिन भगवान की इस दिव्य मूर्ति के भक्त दर्शन कर सकेंगे। रामलीला के समापन्न के दिन मूर्ति को सरयू नदी में विसर्जित किया जाएगा।
राम लीला होगी अभूतपूर्व और ऐतिहासिक
रामलीला का मंचन लक्ष्मण किला (सरयू नदी तट) अयोध्या में होगा। रामलीला कमेटी के मुख्य संरक्षक सांसद प्रवेश साहिब सिंह वर्मा के मुताबिक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संरक्षण और यूपी सरकार के विशेष सहयोग से इस बार अयोध्या की राम लीला अभूतपूर्व और ऐतिहासिक होने जा रही है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण कराना सरकार की प्राथमिकता में है, उसी तरह इस बार की रामलीला भी अपने आप में अद्भुत होने वाली है। रामलीला में बीजेपी सांसद मनोज तिवारी अंगद और सांसद (गोरखपुर) और फिल्म स्टार रविकिशन भरत की भूमिका में नजर आएंगे। विन्दु दारा सिंह हनुमान, असरानी नारद, रज़ा मुराद अहिरावण, शाहबाज खान रावण के रूप में नजर आएंगे।
सेट लगाने के लिए अयोध्या पहुंचे कलाकार
वहीं रामलीला कमेटी के अध्यक्ष सुभाष मलिक ने बताया कि मुंबई से रामलीला का सेट लगाने के लिए हरी भाई की अगुआई में कलाकारों का दल अयोध्या पहुंच चुका है। कलाकार राम लीला के मंच को इस तरह का आकार दे रहे हैं कि अयोध्या के राजमहल से लेकर सरयू, चित्रकूट और श्रृगवेरपुर धाम समेत राम कथा से जुड़े तमाम पवित्र स्थलों के दर्शन यहां रामलीला के दौरा हो सकें। रामलीला के दौरान देश और दुनिया भर में अयोध्या के सांस्कृतिक गौरव की झलक पेश की जाएगी।
बना चुके कई विशाल प्रतिमाएं
भगवान श्रीराम की मूर्ति बनाने वाले खानदानी मूर्तिकार नरेश कुमावत के पिता मातुराम कुमावत ने भी कई विशाल प्रतिमाएं बनाईं हैं। साथ ही नरेश कुमावत भी दुनिया के करीब 60 देशों में देवी-देवताओं और राजनेताओं की विशाल प्रतिमाओं को आकार दे चुके हैं। नरेश कुमावत ही अयोध्या में सरयू तट पर भगवान राम की 250 मीटर ऊंची और हनुमंत लाल की करीब 125 फुट ऊंची प्रतिमा गढ़ रहे हैं।
14 भाषाओं में मंचन
शारदीय नवरात्रि के साथ ही 17 अक्टूबर यानी शनिवार से अयोध्या में रामलीला का मंचन शुरू हो जाएगा। अयोध्या की रामलीला के मंचन में दर्शकों को आने की स्वीकृति बिल्कुल नहीं होगी। रामलीला को सिर्फ सैटलाइट चैनल्स, यूट्यूब चैनल और अन्य सोशल मीडिया चैनल्स पर ही 17 से 25 अक्टूबर तक शाम 7 बजे से 10 बजे तक दिखाया जाएगा। जानकारी के मुताबिक सरकार का साफ निर्देश है कि अयोध्या की रामलीला को 14 भाषाओं में प्रस्तुत किया जाए। जिससे इंटरनेट, यू ट्यूब , सोशल मीडिया के माध्यम से प्रसारित की जाने वाली राम लीला को हर भाषा, धर्म, देश और समाज के लोग देख और समझ सकेंगे।
Published on:
15 Oct 2020 02:42 pm
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