
वह अब दूर हो जाएगा। अगले हफ्ते अयोध्या विकास प्राधिकरण बोर्ड की बैठक होगी। जिसमें मस्जिद के लिए दी गई भूमि का लैंड यूज चेंज करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेज दिया जाएगा।
इंडो इस्लामिक कल्चरल ट्रस्ट के सदस्य अरशद अफजाल ने बताया, "सभी पेपर जमा हो गए हैं। उम्मीद है कि दिसंबर 2022 तक मस्जिद की डिजाइन को अनुमति मिल जाएगी। इसके बाद जनवरी 2023 से मस्जिद का निर्माण शुरू हो जाएगा।"
अयोध्या विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष विशाल सिंह ने बताया, "सभी कानूनी औपचारिकताएं जल्द ही पूरी कर ली जाएंगी। मस्जिद के मानचित्र को अनुमति दी दी जाएगी। इसके लिए बोर्ड की बैठक बुलाई जाएगी।
एनओसी की वजह से मानचित्र को नहीं मिली थी अनुमति
शासन ने मस्जिद के लिए 5 एकड़ भूमि अयोध्या के धन्नीपुर गांव में दी थी। इसके बाद मई 2021 में इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन ने मस्जिद के मानचित्र की अनुमति के लिए अप्लाई कर दिया था। एनओसी नहीं मिलने की वजह से अब तक इसको मंजूरी नहीं मिली। जुलाई 2022 में फाउंडेशन के चेयरमैन जफर फारुकी, सचिव अतहर हुसैन, स्थानीय ट्रस्टी अरशद अफजाल ने अयोध्या विकास प्राधिकरण के साथ बैठक की। इसके बाद विचार-विमर्श हुआ। इसके बाद अयोध्या विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष विशाल सिंह ने भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण, अग्निशमन, सिंचाई विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जिला प्रशासन और नगर निगम को एनओसी दिए जाने को लेकर पत्र भी भेजा था।
मानचित्र पास नहीं होने के दो बड़े कारण थे
मानचित्र पास नहीं होने दो प्रमुख कारण थे। पहला लो सबसे बड़ा कारण था वह जमीन का लैंड यूज न बदलना। क्योंकि जो जमीन मस्जिद के लिए दी गई थी वह खेती करने योग्य थी। इसलिए मस्जिद निर्माण के पहले उसका लैंड यूज चेंज होना जरूरी है।
दूसरा कारण फायर ब्रिगेड विभाग की आपत्ति थी। फायर ब्रिगेड ने आपत्ति जताई कि मस्जिद के लिए जो रास्ता है वह 6 मीटर चौड़ा है। बाद में फायर ब्रिगेड विभाग ने इस शर्त पर एनओसी दे दी की भविष्य में सड़क को 12 मीटर चौड़ा कर दिया जाएगा। अन्य विभाग से भी एनओसी मिल चुकी है। सबसे बड़ा रोड़ा लैंड यूज चेंज करने को लेकर था। वह भी दिसंबर तक दूर हो जाएगी।
मस्जिद के लिए हिंदू भी कर रहा सहयोग
मस्जिद के लिए हिंदू भी सहयोग कर रहा है। इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन के सदस्य अरशद अफजाल ने बताया, "लखनऊ के साथ-साथ अयोध्या सहित कई जगहों से मस्जिद निर्माण के लिए सहयोग मिला है। जिसमें कई हिंदुओं ने भी अपना योगदान दिया है। इनमें कई प्रोफेसर और बुद्धिजीवी वर्ग के लोग शामिल हैं।
अस्पताल, सामुदायिक भोजनालय और रिसर्च सेंटर भी बनेगा
इस भूमि पर 2,000 नमाजियों के लिए सभागार, 300 बेड का चैरिटेबल हॉस्पिटल, 1000 की क्षमता वाला शाकाहारी सामुदायिक भोजनालय और मौलवी अहमद उल्ला शाह के नाम से एक रिसर्च सेंटर का निर्माण होना है। इसके चारों तरफ छायादार वृक्ष लगाए जाएंगे।
Updated on:
12 Nov 2022 06:30 pm
Published on:
12 Nov 2022 10:18 am
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