
प्रतीकात्मक फोटो
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
आजमगढ़. बिलारियागंज को नगर पालिका बनाने की कैबिनेट की घोषणा के साथ ही समूचे क्षेत्र में शनिवार को खुशी की लहर दौड गई। अब बिलरियागंज के तीन किलोमीटर परिधि के 34 ग्राम पंचायत के कुल 66 राजस्व गांवों की सूरत बदल जाएगी। ग्रामीण इसे सरकार का बड़ा फैसला मान रहे हैं वहीं कहीं न कहीं प्रधानों में इसे लेकर नाराजगी भी है।
बता दें कि नगर पंचायत बिलरियागंज का गठन वर्ष 1978 में हुआ है। हालाकि 1989 में पहली बार इसके लिए चुनाव हुए। चुनाव के बाद इस नगरपंचायत के पहले चेयरमैन इलियास आजमी बने। वहीं दूसरी बार चेयरमैन के पद को डा अबू शहमा ने सुशोभित किया। तीसरे चेयरमैन शमीम अहमद, चौथे मंजू विश्वकर्मा, पांचवे मोहम्मद आरिफ खान हुए। छठें और वर्तमान व अंतिम चेयरमैन वीरेंद्र विश्वकर्मा होंगे।
बिलरियागंज को नगपालिका बनाने की मांग लंबे समय से चल रही थी। 2020 में भाजपा नेता सहाजानंद राय व माला द्विवेदी ने शासन को पत्र लिखकर बिलरियागंज को नगरपालिका बनाने के लिए पहली बार मांग की थी। इसके बाद से लगातार योगी सरकार से इस मांग को पूरी करने की गुहार क्षेत्र की जनता लगा रही थी। हालाकि संबंधित कुछ गांव के प्रधान इसका विरोध कर रहे थे। लेकिन क्षेत्र के विकास को ध्यान में रखते हुए शासन ने नगरपालिका बनाने के फैसले को मंजूरी दी। कस्बा से लगभग तीन किलोमीटर की परिधि के गांवों का चयन किया गया है।
नगर पंचायत बिलारियागंज के अध्यक्ष वीरेंद्र विश्वकर्मा ने बताया की नगर पालिका बनने के बाद क्षेत्र का चौतरफा विकास संभव हो पाएगा। 66 राजस्व गांव की सूरत बदल जाएगी। इन गांवों में नगरीय सुविधाएं मिलने लगेंगी। क्षेत्र में बेहतर साफ सफाई, आवास, प्रकाश के लिए लाइट, कूड़ा कचड़ा के लिए डंपिंग ग्राउंड, नाली खड़ंजा, आरसीसी रोड, शुद्ध पेयजल आदि का लाभ मिलेगा।
Published on:
18 Sept 2022 07:30 pm
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