
पानी के आभाव में सूखती फसल
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
आजमगढ़. पूर्वांचल में बरसात न होने के कारण सूखे के हालात उत्पन्न हो गए हैं। खासतौर पर आजमगढ़ मंडल औसत से करीब 45 प्रतिशत कम बरसात होने से खरीफ की फसल पर ग्रहण लग गया है। धान ही नहीं बल्कि गन्ना सहित अन्य फसलें भी पानी के आभाव में बर्बाद हो रही है। जो हालात हैं अगर यही बरकरार रहा तो खाद्यान्न का संकट खड़ा होना तय है। कारण कि पानी के अभाव में जहां 20 प्रतिशत क्षेत्रफल पर धान की रोपाई ही नहीं हुई वहीं अब कृषि वैज्ञानिक बरसात न होने पर 40 प्रतिशत तक उत्पादन घटने की संभावना जता रहे हैं। अगर ऐसा होता है तो किसानों के सामने रोटी का संकट उत्पन्न हो जाएगा।
बता दें कि आजमगढ़, मऊ, बलिया जैसे जिलों में धान खरीफ की मुख्य फसल है। तीनों जिलो में छह लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल पर खरीफ की खेती होती है। इसमें आजमगढ़ में सर्वाधिक 2 लाख 30 हजार 709 हेक्टेयर भूमि पर खरीफ की खेती की जाएगी। इसमें दो लाख 14 हजार 397 हेक्टेयर क्षेत्रफल पर धान की खेती की जाती है। बाकि क्षेत्रफल पर मूंग, अरहर, गन्ना आदि की खेती की जाती है। जिले में धान उत्पादन का 5 लाख 30 हजार 932 एमटी का लक्ष्य रखा गया है लेकिन बरसात न होने के कारण जिले में 20 प्रतिशत क्षेत्रफल पर धान की रोपाई ही नहीं हो पाई है। बड़ी संख्या में किसानों ने अपना खेत परती छोड़ दिया गया है। इससे उत्पादन प्रभावित होना तय है।
धान की कम रोपाई के पीछे प्रमुख कारण कम बरसात मानी जा रही है। मंडल के तीनों ही जिलों में औसत से करीब 45 प्रतिशत कम बरासत अब तक हुई है। सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो आजमगढ़ में अब तक औसतन 532.5 मिमी बरसात होनी चाहिए थी जबकि जिले में अब तक मात्र 287.6 प्रतिशत बरसात कम हुई है। यानि की जिले में करीब 46 प्रतिशत कम बरसात हुई है। इसी तरह मऊ में औसत बरसात 511.7 मिमी के सापेक्ष मात्र 174.5 मिमी वर्षा हुई है, जो औसत बरसात से 66 प्रतिशत कम है। इसी तरह बलिया में अब तक औसतन 466.1 मिमी बरसात होनी चाहिए थी लेकिन जिले में मात्र 173.3 मिमी बरसात हुई है जो औसत से 63 प्रतिशत कम है।
मौसम की स्थित देखने के बाद आगे भी अच्छी बरसात की उम्मीद नहीं है। ऐसे में मंडल को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग भी उठने लगी है। बरसात न होने से किसान परेशान है। कारण कि धान की फसल के साथ ही गन्ना आदि की फसल भी सूख रही है। नहरों का पानी टेल तक नहीं पहुंच रहा है। इससे दिक्कत और बढ़ गई है। किसान नायब यादव, सर्वेश जायसवाल, परास नाथ यादव, अशोक राम आदि कहना है कि वर्ष 2009 के बाद अब इस तरह की स्थिति उत्पन्न हुई है। सरकार को सूखा घोषित करना चाहिए। वहीं कृषि वैज्ञानिक डा. एलसी वर्मा का कहना है कि जो परिस्थिति है उसमें धान का उत्पादन प्रभावित होना तय है। यही हाल रहा तो 30 से 40 प्रतिशत तक उत्पादन घटने की संभावना रहेगी।
Published on:
19 Aug 2022 04:07 pm
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