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जानिए कैसा रहेगा अगले पांच दिन मौसम, कहां बरसात की संभावना

किसानों के लिए राहत भरी खबर है। अगले पांच दिन जिले में बादल छाए रहेंगे। इस दौरान मध्यम बरसात की संभावना है। बादल छाये रहने से लोगों को उमस से राहत मिलेगी। इस समय किसानों को फसलों को लेकर विशेष एहतियात बरतने की जरूरत है।

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प्रतीकात्मक फोटो

प्रतीकात्मक फोटो

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
आजमगढ़. अगले पांच दिन किसानों को राहत मिलेगी। कारण कि आसमान में घने काले बादल छाए रहेंगे। इस दौरान मध्यम बरसात की संभावना है। बादल के कारण लोगों को उमस व गर्मी से राहत मिलेगी। वैज्ञानिकों की सलाह है कि इस समय किसान फसल सुरक्षा पर विशेष ध्यान दें। कारण कि धान की फसल में तना भेदक कीट के प्रकोप का खतरा बना रहता है।

आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अधीन संचालित कृषि विज्ञान केंद्र कोटवा के मौसम वैज्ञानिक डा. तेज प्रताप सिंह ने बताया कि ग्रामीण कृषि मौसम सेवा योजना के अंतर्गत प्राप्त आंकड़ों के अनुसार अगले 5 दिनों में हल्के से मध्यम बादल छाए रहने तथा हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है ।

अधिकतम तापमान 33-34℃ व न्यूनतम तापमान 23-24℃ तथा आर्द्रता 92-48 फीसद के मध्य रहेगी । हवा सामान्य गति के साथ अगले तीन दिन पूर्व से पश्चिम दिशा की ओर तथा बाकी दो दिन दक्षिण पश्चिमी दिशा की ओर से चलने की संभावना है।

किसानों को सलाह-

धान- इस समय धान के खेत में तना छेदक कीट का प्रकोप अधिक हो रहा है। अतः किसान इससे बचाव के लिए प्रति एकड़ 8 से 9 किग्रा कारटाप हाइड्रोक्लोराइड दवा का बुरकाव करें।

सब्जियाँ- सब्जियों की रोपाई के 30 दिन बाद बैंगन में 108 किग्रा मिर्च में 76 से 87 किग्रा तथा फूलगोभी में 87 किग्रा यूरिया का प्रति हेक्टेयर की दर से बुरकाव करें।

फल- नींबू वर्गीय फलों में रस चूसने वाले कीड़े लगने पर मेलाथियान की दो ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।

सामान्य- खेत के बीच में व मेड़ों पर घास-फूस बिल्कुल भी ना उगने दें, जिससे बीमारियों से संरक्षण मिलता है। खेत से बीमार पौधों को उखाड़कर बाहर कही दूर फेंक दें ताकि बीमारियों को फैलने से रोका जा सके।

गन्ना- इस माह में गन्ने को बांधने का कार्य अवश्य पूरा करें। बांधने का कार्य गन्ने के तने तक करें व उपरी पत्तियों को खुला रहने दे ताकि बढ़वार में बाधा ना उत्पन्न हो।

पशुपालन- बरसात के मौसम में दुधारू पशुओं में अंतः परजीवी का प्रकोप होने की पूरी संभावना होती है जिससे पशुओं का स्वास्थ्य गिर जाता है। खाने में अरुचि, गोबर का सामान्य ना होना आदि सामान्य लक्षण है। इनसे बचाव के लिए प्रत्येक दुधारू पशु (गाय और भैंस) उनकी बछिया, पड़िया आदि जानवरों में कृमि नाशक दवाओं का प्रयोग अवश्य करें। पशुपालक प्रयास करें कि इस दवा का प्रयोग हर 3 माह में अवश्य करें ।