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पीएम मोदी की रैली के बाद सपा-बसपा की बढ़ी बेचैनी, असमंजस में फंसा यह बाहुबली

रैली की ऐतिहासिक सफलता के बाद तेज हुए सियासी हलचल

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पीएम मोदी की रैली के बाद सपा-बसपा की बढ़ी बेचैनी, असमंजस में फंसा यह बाहुबली

पीएम मोदी की रैली के बाद सपा-बसपा की बढ़ी बेचैनी, असमंजस में फंसा यह बाहुबली

आजमगढ़. पीएम मोदी की आजमगढ़ की रैली भले ही विवादों से घिरी रही हो लेकिन इसकी ऐतिहासिक सफलता से पूर्वांचल में सियासी हलचल तेज हो गयी है। रैली में अप्रत्याशित रूप से पहुंची भीड़ ने सपा और बसपा की बेचैनी को काफी बढ़ा दिया है। वहीं वर्ष 2014 की अपेक्षा वर्ष 2018 में मोदी मैजिक में हुए इजाफा को देख बाहुबली रमाकांत यादव भी असमंजस में फंस गए है।

गौरतलब कि बीते दिनों रमाकांत यादव के समाजवादी पार्टी में शामिल होने की अटकले लगाई जा ही थी। जानकारों की माने तो इसी संबंध में उन्होंने लखनऊ में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात भी की थी। मुलाकात के अगले ही दिन रमाकांत और अखिलेश यादव की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल भी हो गई। जिसके बाद रामाकांत यादव के सपा में जाने की अटकले और तेज हो गई थी। ध्यान देने वाली बात यह है कि 14 जुलाई को पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान भी मंच पर उन्हें जगह नहीं मिली। हालांकि यह तो अभी साफ नहीं हो पाया कि रामाकांत यादव आगामी लोक सभा चुनाव में किस पार्टी का दामन थामते है। लेकिन पीएम मोदी और उनकी पार्टी को रैली का जवाब देने के लिए अगले महीने अखिलेश यादव भी आजमगढ़ आ रहे हैं। इसके बाद सियासी घमासान और बढ़ने की उम्मीद है।

बता दें कि आने वाले दिनों में लोकसभा चुनाव है। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी मैजिक के चलते बीजेपी गठबंधन में यूपी में अस्सी सीटों में 73 जीतने में सफल हुई थी। पांच सीट सपा और दो सीट कांग्रेस के खाते में गयी थी। बसपा का यूपी में खाता भी नहीं खुला था। वर्ष 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में भी मोदी मैजिक जमकर चला। भाजपा गठबंधन ने 403 सीटों में 325 सीट पर जीत दर्ज की। यह प्रदेश में बीजेपी की अब तक की सबसे बड़ी और एतिहासिक जीत थी।

अब बीजेपी को 2019 के लोगसभा चुनाव में मात देने के लिए विपक्ष गठबंधन पर चर्चा कर रहा है। यूपी में कांग्रेस, सपा, बसपा, पीस पार्टी, निषाद पार्टी और रालोद के बीच गठबंधन की खिचड़ी पक रही है। हाल में यूपी में कैराना, फूलपुर और गोरखपुर में हुए लोकसभा उपचुनाव व एक विधानसभा सीट पर उप चुनाव में इन दलों ने मिलकर बीजेपी को मात दी। इसके बाद से गठबंधन की चर्चा और बढ़ गई है।

गठबंधन का तोड़ खोजने में जुटी बीजेपी को वर्ष 2019 में फिर मोदी मैजिक का भरोसा है। बीजेपी ने इस चुनाव में 54 प्रतिशत मत हासिल करने का लक्ष्य रखा है। इस समय पार्टी का पूरा फोकस पूर्वी यूपी खासतौर पर पूर्वांचल में जनाधार बढ़ाने पर है। जहां पिछले चुनाव में उसे 32 में 31 लोकसभा सीटें मिली थी। यही वजह है कि योजनाआें के शिलान्यास और लोकापर्ण के बहाने लगातार पीएम मोदी को यहां बुलाने का प्रयास हो रहा है।


14 जुलाई को पूर्वांचल एक्सप्रेस वे का शिलान्यास करने आजमगढ़ पहुंचे तो करीब छह जिलों के ढ़ाई लाख से अधिक लोग पीएम मोदी को सुनने के लिए रैली में पहुंचे। पीएम ने लोकसभा चुनाव को ध्यान पर रखकर विपक्ष पर खुलकर वार किया। इस दौरान उन्होंने तीन तलाक और हलाला का मुद्दा भी खुलकर उठाया। जो विपक्ष की कमजोर कड़ी है। विपक्ष मुस्लिम वोट के चक्कर में इस मुद्दे से लगातार दूरी बनाये हुए है लेकिन विपक्ष को इस बात का खतरा सता रहा है कि मुस्लिम महिलाएं इस मुद्दे पर बीजेपी के साथ खड़ी हो सकती है।

यही वजह है कि सपा और कांग्रेस पीएम की पत्नी के बहाने इस मुद्दे पर उन्हें घेरने का प्रयास कर रहा है। मोदी मैजिक का असर न हो इसके लिए सपा ने मोदी के मुकाबले अखिलेश यादव की सभा आजमगढ़ में कराने का फैसला कर लिया है। सूत्रों की मानें तो 22 या 24 अगस्त को अखिलेश यादव यहां रैली कर सकते हैं जिसमें वे पीएम द्वारा उठाये गए सवालों का जवाब देंगे।

By- रणविजय सिंह