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UP Assembly Election 2022: सगे बेटे को हराएगा यूपी का यह बाहुबली, बीजेपी एक भी सीट जीती तो छोड़ेगा राजनीति

UP Assembly Election 2022 : यूपी विधानसभा दिलचस्प होता दिख रहा है। आम तौर पर नेता और बाहुबली राजनीति में अपने परिवार की सशक्त भागीदारी सुनिश्चित करने की कोशिश करते है लेकिन पहली बार 2022 में कोई बाहुबली अपने सगे बेटे को हराने की कोशिश करता नजर आयेगा। ऐसा दावा स्वयं बाहुबली रमाकांत यादव ने किया है। साथ ही बीजेपी के चुनाव में एक भी सीट जीतने पर राजनीति से सन्यास की बात कही है।

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प्रतीकात्मक फोटो

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पत्रिका न्यूज नेटवर्क
आजमगढ़. UP Assembly Election 2022: इस बार यूपी विधानसभा चुनाव दिलचस्प होना तय है। कारण कि समाजवादी पार्टी के गढ़ कहे जाने वाले आजमगढ़ जिले में इस बार बाहुबली पिता और विधायक पुत्र के बीच वर्चश्व की सीधी जंग देखने का मिलेगी। आम तौर पर अब तक यही देखा गया है कि नेता और बाहुबली अपने परिवार की राजनीति में सशक्त भागीदारी सुनिश्चित करने की कोशिश करते हैं लेकिन पहली बार ऐसा होगा जब बाहुबली रमाकांत यादव अपने ही पुत्र को चुनाव हराने के लिए संघर्ष करते नजर आएंगे। रमाकात यादव ने तो यहां तक कह दिया है कि अगर बीजेपी जिले में एक भी सीट जीतती है तो वे राजनीति से सन्यास ले लेंगे।

बता दें कि पूर्वांचल में प्रयागराज के बाद सर्वाधिक 10 सीट आजमगढ़ जिले में है। आजमगढ़ जिला हमेशा से सपा-बसपा का गढ़ रहा है। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में सपा ने यहां दस में से नौ सीटें जीती थी। वर्ष 1996 के चुनाव में बीजेपी को यहां लालगंज सीट पर जीत मिली थी। इसके बाद उसे जीत के लिए 2017 तक इंतजार करना पड़ा। वर्ष 2017 के चुनाव में आजमगढ़ पांच सीट पर सपा और चार सीट पर बसपा तथा एक सीट पर बीजेपी ने जीत हासिल की। बीजेपी के टिकट पर बाहुबली पूर्व सांसद रमाकांत यादव के पुत्र अरुणकांत यादव फूलपुर पवई सीट से विधायक चुनेे गए।

वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने रमाकांत यादव को टिकट नहीं दिया तो वे कांग्रेस में शामिल होकर भदोही से चुनाव लड़े। जहां उनकी जमानत जब्त हो गयी। रमाकांत यादव को लोकसभा चुनाव में मात्र 26 हजार वोट मिले। पिछलेे दिनों रमाकांत यादव सपा में शामिल हो गए। इस बार फिर सपा जिले की कोशिश है िकवह 2012 के प्रदर्शन को दोहरा सके। वहीं दूसरी तरफ बीजेपी की नजर नजर उन पांच सीटों पर है जहां पिछले चुनाव में जीती थी अथवा दूसरे नंबर पर थी।

फूलपुर पवई सीट से एक बार फिर अरूणकांत यादव का लड़ना तय है। इसी सीट से रमाकांत यादव भी चुनाव लड़ना चाहते है। इसमें दो राय नहीं है कि पिता पुत्र के संबंध अच्छे नहीं है। खुद रमाकांत कह चुके हैं कि बीजेपी अगर आजमगढ़ में एक भी सीट जीतती है तो वे राजनीति से सन्यास ले लेंगे। जबकि उनका पुत्र फूलपुर पवई से बीजेपी का उम्मीदवार होगा। यहीं नहीं रमाकांत से जब बेटे के बारे में पूछा गया तो उन्होंने सिद्धांत और पिछड़ों के हितों का हवाला देते हुए साफ कर दिया कि उनके लिए प्रतिद्वंदी सिर्फ प्रतिद्वंदी है। ऐसे में चुनाव का दिलचस्प होना तय है। कारण कि चर्चा तो यहां तक है कि सपा रमाकांत को ही फूलपुर पवई से उम्मीदवार बना सकती है।