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मुलायम की सीट पर बाहुबली को टक्कर देने उतरेगा सपा का यह दिग्गज नेता, विरोधियों की बढ़ी बेचैनी

इससे पहले बाहुबली रमाकांत यादव का नाम चर्चा में था

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Akhilesh yadav and Pm Modi

अखिलेश यादव और पीएम मोदी

आजमगढ़. लोकसभा सीट पर दावेदारी को लेकर कई दिग्गज नेता सामने आ रहे है। मुलायम सिंह यादव की सीट पर महागठबंधन की तहत सपा का दावा मजबूत है। सपा से कई नेताओं ने इस सीट पर अपनी दावेदारी भी पेश की है। अभी जो नाम सामने आ रहे हैं उसमें सपा सरकार के मंत्री रहे बलराम यादवल का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। कहा यह जा रहा है कि बाहुबली रमाकांत को टक्कर देने के लिए सपा बलराम यादव को प्रत्याशी बना सकती है।


बतादें कि इस लोकसभा सीट पर सपा से रमाकांत यादव के चुनाव लड़ने की चर्चा थी। पीएम मोदी के आजमगढ़ में हुए कार्यक्रम में बाहुबली रमाकांत यादव की मौजूदगी के बाद यह तय हो गया है कि बीजेपी एक बार फिर बाहुबली रमाकांत यादव पर ही दांव आजमाने जा रही है। यह भी कहा जा रहा है कि बलराम यादव बाहुबली रमाकांत यादव की सपा में इंट्री के खिलाफ थे।

बता दें कि, आजमगढ़ मंडल में लोकसभा की पांच सीटें है। इनमें आजमगढ़ व बलिया की दो-दो व मऊ की एक सीट शामिल है। इनमें से चार सीट पर बीजेपी का कब्जा है केवल आजमगढ़ सीट सपा के पास है और यहां से दुर्गा प्रसाद का भी नाम सामने आ रहा है।

कौन है बलराम यादव
बलराम सिंह यादव न सिर्फ कद्दावर नेता हैं बल्कि मुलायम सिंह के खास भी हैं। आजमगढ़ के बलराम यादव समाजवादी पार्टी की स्थापना के समय से ही पार्टी से जुड़े हुए हैं। उन्होंने विधानसभा और विधान परिषद दोनों सदनों में अपनी मौजूदगी का एहसास विपक्षी दलों को बराबर कराया। साथ ही राज्य सरकार में महत्वपूर्ण विभागों में मंत्री पद पर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन भी बखूबी किया। हालांकि स्वास्थ्य मंत्री के कार्यकाल के दौरान उनके ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे। विधान सभा चुनाव से पहले अखिलेश यादव ने इन्हें बर्खास्त कर दिया था।

मुलायम के काफी करीबी माने जाते हैं
सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के काफी करीबी माने जाने वाले बलराम यादव ने नाम के अनुरूप समाजवादी पार्टी को हमेशा बल प्रदान करने की कोशिश की। मुख्तार अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल के सपा में विलय को लेकर पैरवी करने के कारण सपा के वरिष्ठ नेता बलराम यादव को कैबिनेट पद से हाथ धोना पड़ा था। जिसके बाद सपा सरकार के सांतवें मंत्रिमंडल विस्तार में दोबारा उन्हें कैबिनेट मंत्री पद की शपथ दिलाई गई थी। ऐसा सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के साथ उनके करीबी रिश्ते होने के चलते संभव हो पाया था।