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आम की गुठली फेंकने की न करें गलती, जानिए एक किलो आम की गुठली में कितने लीटर बनेगा बायोडीजल

अब आम के गुठलियों की भी पूरी कीमत वसूल होगी। कारण कि गुठलियों से बायोडीजल और बायो कंपोस्ट खाद तैयार की जाएगी।

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आम की गुठलियों से बनता है डीजल

आम की गुठलियों से बनता है डीजल

आम को फलों का राजा कहते हैं। अब आम जहां आपके मुंह का स्वाद बढ़ाएगा, वहीं इसकी गुठलियां खेत की सेहत सुधारेंगी। यही नहीं इससे बायोडीजल भी बनाया जाएगा। इससे पेट्रोलियम समस्या का भी समाधान होगा। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय गोरखपुर के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. प्रशांत सैनी और उनके छात्र खुर्शीद अहमद ऐसा कर दिखाया है। इन्होंने आम की गुठलियों से बायोडीजल तैयार किया है। इससे निकलने वाले कचरे से बायो कंपोस्ट खाद भी बनाई है।

20% तक कम हो सकती है डीजल की कीमत
दावा है कि आम की गुठलियों से तैयार बायोडीजल पारंपरिक डीजल की कमी को पूरा करेगा। यही नहीं गुठलियों से तैयार बायो डीजल से पर्यावरण प्रदूषण भी कम होगा। इससे डीजल की कीमत भी करीब 20 % कम हो जाएगी।एक किलो आम की गुठली से 194 मिली लीटर बायोडीजल तैयार होगा। एक किलो पाउडर से बायोडीजल बनाने में करीब 800 ग्राम कचरा निकलेगा। इस कचरे को कंपोस्ट खाद के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

पहले तैयार होता है क्रूड मैंगो ऑयल
डॉ. प्रशांत के मुताबिक चार किलो गुठली को सुखाकर पीसने पर एक किलो पाउडर बनता है। इसे फिल्टर पेपर पर रखकर बीकर में रख देते हैं। उसके नीचे एक हीटर रहता है। उसमें 400 ग्राम एन हेड्रेन को रखकर 70 डिग्री पर गर्म करते हैं। गर्म होकर वह ऊपर कंडेसर के माध्यम से बूंद बूंद कर पाउडर में छनकर गिरता है। इसके बाद फिर से डिस्टिलाइजेशन सेटअप में 70 डिग्री पर गर्म करते हैं। इससे एन हेक्जेन अलग हो जाता है। जो तरल पदार्थ बचेगा वह क्रूड मैंगो ऑयल होता है।


इस तरह बनेगा बायोडीजल
चार किलो गुठली से .1 प्रतिशत एनएओएच या केओएच प्राप्त होता है। इसकी कुल मात्रा का पांच प्रतिशत मेथेनॉल मिलाकर ट्रांसइस्टिरीफिकेशन के माध्यम से रोट्रेट करते हैं। इस प्रक्रिया में करीब 200 एमएल बायोडीजल प्राप्त होता है।


10 नवंबर को प्रकाशित हो चुका है शोध
डॉ. प्रशांत का यह शोध यूनाइटेड किंगडम के एक प्रतिष्ठित एनर्जी सोर्सेज रिकवरी, यूटाइलेजशन एंड इन्वायरमेंटल इफेक्ट में 10 नवंबर 2022 को प्रकाशित किया गया है। शोध में डॉ. प्रशांत के साथ उनके शिष्य खुर्शीद अहमद की भूमिका काफी अहम है।

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एक साल के प्रयास के बाद मिली सफलता
डा. प्रशांत के मुताबिक एक वर्ष के प्रयास के बाद इन्हें अपने प्रयोग में सफलता मिली है। बायोडीजल को बनाने में उन्होंने थर्माेसिफोन इफेक्ट पर आधारित साक्जिलेट मशीन का इस्तेमाल किया है। यह मशीन बायोमास को बायोडीजल में बदलने के लिए इस्तेमाल की जाती है।