
रमाकांत यादव
आजमगढ़. योगी सरकार बनने के बाद लगातार सवर्णों को निशाने पर रखने को लेकर भारतीय जनता पार्टी में अलग-थलग पड़ चुके पूर्व सांसद बाहुबली रमाकांत यादव क्या बीजेपी को बड़ा झटका देंगे ? यह सवाल पिछले कुछ महीनों से सियासी गलियारों में चर्चा का विषय है। रमाकांत यादव गाहे ब गाहे कुछ न कुछ ऐसा बोल ही देते हैं जो सियासी गलियारों में अंदाजा लगाने की वजह बन जाती है। जनवरी महीने में तो बाकायदा उनके सपा में जाने की खबरें भी मीडिया में आयी थीं। हालांकि बाद में उन्होंने सामने आकर इसे गलत बताया। इस बार तो उन्होंने कभी अपने करीबी रहे वर्तमान सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार और उनके काम करने के तरीके पर ही सवाल उठा दिये हैं। मीडिया के सामने आकर उन्होंने कहा है कि उनके लिये दल नहीं बल्कि पिछडों और दलितों का सम्मान महत्वपूर्ण है। उनके इस तरह के बयान के बाद एक बार फिर दल-बदल की कयासआराइयों का दौर शुरू हो गया है।
जैसे ही यह खबर आयी कि बीजेपी अपने सबसे मजबूत गढ़ गोरखपुर और इलाहाबाद की फूलपुर संसदीय सीट पर उपचुनाव हार गयी, रमाकांत सरकार पर टूट पड़े। मानो वह पहले से ही ऐसे किसी मौके के इंतजार में बैठे थे। जब बीजेपी के नेता हार के बाद मायूस बैठे थे और फोन तक नहीं उठा रहे थे उस समय रमाकांत ने मीडिया के सामने आए और खुलकर अपनी भड़ास निकाली। हार को CM योगी आदित्यनाथ की सरकार के पिछड़ा विरोधी कार्यों का परिणाम बता डाला। यहां तक कहा कि जिन पिछड़ों और दलितों के दम पर भाजपा ने कुर्सी पायी है, सरकार बनने के बाद उनको उपेक्षित किया जा रहा है।
सीएम योगी का नाम लिये बगैर कहा कि पूजा पाठ करने वाले कितना सरकार चला पाएंगे। मीडिया से बात करते हुए रमाकांत लगातार कोस तो बीजेपी को रहे थे, पर बार-बार पिछड़ों और दलितों की बात वो किसी समाजवादी नेता की तरह कर रहे थे। हालांकि उनसे जब पूछा गया कि क्या आप पार्टी छोड़ेंगे तो वह इसे टाल गए और कहा कि अभी कोई परिवर्तन के मूड में मैं नहीं। बोले कि मुझे लोकसभा-विधानसभा पहुंचने का शौक नहीं। मुझे केवल फिक्र इस बात कि है कि किस तरह पिछड़ों और दलितों को उनका अधिकार दिला दें, इनकी भागीदारी हर जगह हो जाए, उन्हें सम्मान मिले, यही मेरी इच्छा है।
रमाकांत यादव ने अचानक जिस तरह से भाजपा में रहकर सवर्ण नेताओं को टारगेट कर रहे हैं, इससे यह बात तो साफ है कि उन्हें 2019 में आजमगढ़ से अपने टिकट को लेकर डर है। बीजेपी में साइड लाइन होने के बाद उनका यह डर और बढ़ता जा रहा है। शायद यही वजह है कि वह अब भाजपा की हिंदुत्ववादी लाइन से इतर पिछड़ों और दलितों की बात करने लगे हैं। हो सकता है कि उन्हें सपा-बसपा के गठबंधन की जीत ने कुछ उम्मीद भी जगायी हो। हमेशा बीजेपी को कोसने वाले और राम का नाम लेकर आपत्तिजनक लाइनें कहने वाले नरेश अग्रवाल जब फायदा देख दल बदल सकते हैं तो अगर अचानक ही रमाकांत यादव कोई कोई बड़ा धमाका कर दें इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता।
सपा ज्वाइन करने की उड़ी थी अफवाह
बता दें कि जनवरी के महीने में उस समय रमाकांत यादव के सपा में जाने की अफवाह उड़ी थी जब यादव बिरादरी से जुड़े कुछ लोगों ने रमाकांत और दुर्गा यादव की माला पहने एक साथ फोटो फेसबुक पर पोस्ट कर उनके सपा ज्वाइन करने की हवा उड़ायी। हालांकि तब उन्होंने सामने आकर इसे पूरी तरह से अफवाह बताया था।
Updated on:
15 Mar 2018 10:49 pm
Published on:
15 Mar 2018 10:45 pm
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