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जिसने रखी थी आजादी की नींव उन्हीं महापुरुषों को भूल गए अधिकारी और मंत्री, शहीद स्तभ पर नहीं हुआ ध्वजारोहण

पूरा देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। सरकार की सख्त हिदायत थी कि समारोह में शहीदों को याद किया जाय तथा सभी ऐतिहासिक स्थलों पर ध्वज फहराया जाय लेकिन जिले के अधिकारी और सरकार के मंत्री उस महापुरुष को ही भूल गए जिसने आजादी की नींव रखी थी और 3 जून 1857 को आजमगढ़ को आजाद करा दिया था। अधिकारी शहीद स्तंभ की साफ सफाई तो दूर एक राष्ट्रीय ध्वज तक फहराना भूल गए। जब मंत्री से इस बारे में पूछा गया तो गुस्से से लाल हो गए और उठकर चल दिए।

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स्वतंत्रता दिवस पर भी उपेक्षा का शिकार रहा कुंवर सिंह उद्यान

स्वतंत्रता दिवस पर भी उपेक्षा का शिकार रहा कुंवर सिंह उद्यान

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
आजमगढ़. स्वतंत्रता दिवस पर पूरा जिला आजादी के जश्न में डूबा दिखा। हर तरफ बस तिरंगा और भारत माता के जयकारे की गूंज रही। वहीं दूसरी तरफ प्रशासन और सरकार के मंत्री सिर्फ औपचारिकता पूरी करते दिखे। सभी ने अपने कार्यालय पर ध्वजारोहण किया लेकिन जिस स्थान पर आजादी की नींव रखी गई थी उस स्थान पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। किसी अधिकारी और मंत्री द्वारा कुंवर सिंह उद्यान के गेट पर न तो ध्वजारोहण किया गया और न ही शहीद स्तभ की सफाई की गई। जबकि यह वहीं स्थान है जहां 3 जून 1857 को विद्रोह की आग भड़की थी और क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों का खजाना लूटने के साथ ही लेफ्टीनेंट हचकिंसन व कर्नल डेविस की हत्या कर जिले को आजाद करा दिया था। 3 सितंबर 1857 तक जिला आजाद रहा लेकिन आजादी के अमृत महोत्सव में अधिकारियों ने इन्हीं महापुरुषों के भुला दिया।

आज जहां कुंवर सिंह उद्यान है वहां पहले कम्पनी बाग हुआ करती थी जिसमें अंग्रेजों का खजाना और गोला बारूद रखा जाता था। इसकी सुरक्षा के लिए देशी-विदेशी फौजों की अलग-अलग टुकड़ी तैनात की जाती थी। 1857 में जब पूरे देश में क्रान्ति की ज्वाला भड़क रही थी तो आजमगढ़ भी इससे अछूता नहीं रहा। यहां के लोग भी अंग्रेजी सत्ता को मटियामेट करने और स्वयं स्वतंत्र होने के लिए आतुर थे। 3 जून 1857 को कम्पनी बाग के खजाने से 7 लाख रुपया वाराणसी जाना था। उसी रात में देशी सैनिकों ने विद्रोह कर दिया। सैनिक और क्रांतिकारियों ने न केवल सात लाख रुपये लूटा बल्कि जेल और सरकारी दफ्तरों पर कब्जा कर लिया था। जेल में बंद कैदियों को आजाद कर विप्लवी सेना में भर्ती कर लिया गया था। आजादी की इस जंग में लेफ्टीनेंट हचकिन्सन और कर्नल डेविस मारे गये। सर्जेंट पैलिसर ने वाराणसी भागकर जान बचायी। 3 सितम्बर 1857 तक आजमगढ़ आजाद रहा।

देश आजाद होने के बाद क्रांतिकारी वीर कुंवर सिंह के नाम पर इसे कुंवर उद्यान का नाम दिया गया। हर साल स्वतंत्रता दिवस पर यहां सजावट की जाती थी। शहीद स्तंभ पर लोग पुष्प अर्पित करते थे। इस बार आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है लेकिन अधिकारियों ने इस तरफ झांककर देखा तक नहीं जबकि उद्यान डीएम, सीडीओ और एसपी आफिस के मध्य स्थित है। ध्वजारोहरण तो दूर यहां शहीद स्तभ की सफाई तक नहीं कराई गई। जबकि स्वतंत्रता दिवस पर योगी सरकार के मंत्री एके शर्मा, सांसद दिनेश लाल यादव निरहुआ भी यहां मौजूद थे। मंत्री से जब इस बारे में पूछा गया तो वे कुछ बोलने के बजाय मीडिया से बातचीत बीच में छोड़कर चले गए। शहीदों की यह अनदेखी चर्चा का विषय बनी हुई है।