26 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

आजमगढ़ जेल में हमेंशा रहा है अपराधियों का साम्राज्य, यहां हो चुकी है जेलर की हत्या

आजमगढ़ जिला कारागार कहने के लिए प्रदेश के हाइटेक जेलों में से एक है लेकिन यहां हमेंशा से अपराधियों का राज रहा है। बड़े अपराधी जेल के अंदर से ही अपना साम्राज्य चला रहे हैं बल्कि यहां उनकी अलग सत्ता चलती है। हत्या की साजिश से लेकर फिरौती तक का खेल जेल के भीतर बैठे अपराधी मोबाइल से खेलते है। यहीं नहीं यहा जेलर की हत्या तो बंदी रक्षक पर जानलेवा हमला भी हो चुका है।

3 min read
Google source verification
प्रतीकात्मक फोटो

प्रतीकात्मक फोटो

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
आजमगढ़. कहने के लिए आजमगढ़ जिला कारागार यूपी के हाइटेक जेलों में से एक है। आजमगढ़ को संवेदनशील जिलों की श्रेणी में रखा गया है। जेल में अपराधियों की निगरानी के लिए हाई सिक्योरिटी सिस्टम लगाया गया है। दावा है कि जेल परिसर में जैमर के कारण मोबाइल काम नहीं करता लेकिन हकीकत यह है अपराधी इसी जेल से अपना साम्राज्य चलाते हैं। जेल के भीतर से ही अपराधी हत्या की साजिश रच घटना को अंजाम दिला देते हैं तो यहीं से फिरौती भी मांग लेते है। सरकार और प्रशासन का सारा सिस्टम फेल हो जाता है। यहीं नहीं यहां से अपराधी अगर भागने में सफल हुए हैं तो आवासीय परिसर में घुसकर बदमाशों ने बंदी रक्षक को गोली भी मारी है। यहीं नहीं जेल के भीतर बैठकर कुंटू सिंह गेट पर जेलर की हत्या भी करवा चुका है। इसके बाद भी अधिकारी गंभीर नहीं है। अब तो मोबाइल के साथ यहां गांजा और शराब भी बहुत आसानी से पहुंच रही है। मोबाइल और गांजा तो खुद जिले के आला अफसरों से यहां से बरामद किया गया है।

बता दें कि आजमगढ़ जिले में अंग्रेजों के जमाने की जेल कोतवाली के पास स्थित थी। वर्ष 2005 में जेल माफिया कुंटू सिंह बंद था। उस समय उसका जेलर दीप सागर से विवाद हुआ और उसने कोतवाली और जेल के मध्य स्थित जेलर के गेट पर ही उनकी हत्या करावा दी थी, वह भी दिनदहाड़े। बाद में शहर से दस किमी दूर सिधारी थाना क्षेत्र के इटौरा में जेल का निर्माण कराया गया। 41.246 एकड़ क्षेत्रफल में बने इस जेल के निर्माण में 115. 96 लाख रूयपे खर्च हुए है। यहां आठ बैरिग 120 बंदी क्षमता तथा 2 बैरिग 60 बंदी क्षमता के बनाये गये है। सभी हाई सिक्योरिटी बैरग है। इसके अलावा जेल की बाहरी दीवार 22 फुट ऊंची है। इस दीवार के बाद भी एक 18 फीट ऊंची दीवार है। इसके अलावा जेल में जैमर और हाई सिक्योरिटी सिस्टम लगाया गया है। इसके बाद यहां मोबाइल से लेकर नशीले पदार्थ तक आसानी से पहुंच रहे हैं।

वर्ष 2016 को तो हद ही हो गयी थी। इस जेल की दीवार फांदकर कारागार में बन्द गाजीपुर जनपद के शातिर अपराधी चन्द्रशेखर, प्रकाश और जितेन्द्र फरार हो गए थे। बंदी किसकी सहायता से फरार हुए इसका पता विभाग आज तक नहीं लगा पाया। इसके पूर्व यहां 2015 में अधिकारियों की छापेमारी में 58 मोबाइल बरामद हुए थे। 17 मार्च 2019 तत्कालीन डीएम शिवाकांत द्विवेदी और एसपी त्रिवेणी सिंह ने छापेमारी कर यहां से 37 मोबाइल फोन, चार्जर और बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक चीजें बरामद की थी। उस समय बंदियो ने छापेमारी का विरोध करते हुए प्रशासन की टीम पर भी पथराव किया था। हालांकि बाद में इस मामले में जेल अधीक्षक अनिल कुमार गौतम, जेलर हरीश कुमार, डिप्टी जेलर और बड़ी संख्या में बंदी रक्षकों को निलंबित किया गया था।

23 जनवरी 2019 को बदमाशों ने जेल पुलिस चौकी के सामने स्थित आवास में घुसकर बंदी रक्षक मान सिंह को गोली मार दिये थे। यहीं नहीं मंगलवार को जब जिलाधिकारी विशाल भारद्वाज और एसपी अनुराग आर्य ने छापेमारी की तो यहां 12 मोबाइल, 97 पुड़िया गांजा, चार्जर व अन्य आपत्तिजनक सामान बरामद हुआ। यह बरामदगी उस स्थिति में हुई है जबकि खुद पुलिस यह खुलासा कर चुकी है कि माफिया कुंटू सिंह ने आजमगढ़ जेल में बैठकर ही पूर्व ज्येष्ठ प्रमुख अजीत सिंह के हत्या की साजिश रची थी और घटना को लखनऊ में अंजाम दिया गया था। जेल में बंद अपराधियों के पास बिना विभाग की सहायता से मोबाइल से लेकर नशीला पदार्थ आखिर कैसे पहुंच रहा है। यही नहीं जेल में बंद पूर्व मंत्री अंगद यादव के पास ने वर्ष 2018 में पुलिस ने पांच मोबाइल फोन बरामद किया था। पूर्व मंत्री जेल में बैठकर फेसबुक चलाते हुए पकड़े गए थे।