
प्रतीकात्मक फोटो
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
आजमगढ़. यूपी विधानसभा चुनाव में अभी समय है लेकिन चुनावी सरगर्मी पूरे चरम पर दिख रही है। खासतौर पर पूर्वांचल में। इस समय राजनीति का केंद्र बना है आजमगढ़। पूर्वांचल के राजभर मतों को लेकर की जा रही घेरेबंदी के बीच गृहमंत्री अमित शाह ने आजमगढ़ में विश्वविद्यालय का नाम महाराजा सुहेलदेव के नाप पर रखकर बड़ा दाव चल दिया है। इससे साथ सियासी घमासान तेज हो गयी है। शिवपाल यादव इसे चुनावी स्टंट बताकर जा चुके हैं और अब 16 को अखिलेश यादव पहुंच रहे हैं जो आजमग़ के सांसद भी है। माना जा रहा है बीजेपी के इस दाव के काट में वे कुछ नया दाव जरूर चलेंगे।
बता दें कि पिछले चुनाव में राजभर मतदाता पूरी ताकत से बीजेपी के साथ खड़े हुए थे जिसका भारी नुकसान सपा और बसपा को उठाना पड़ा था। चुनाव मे सुभासपा का बीजेपी से गठबंधन था। सुभासपा भी पहली बार चार सीटों पर जीत हासिल करने में सफल हुई थी लेकिन सुभासपा व बीजेपी का गठबध्ंान लंबा नहीं चला। अब आगामी विधानसभा चुनाव 2022 में सुभासपा सपा के साथ गठबंधन कर मैदान में उतर रही है। सुभासपा का राजभर मतों पर काफी प्रभाव है। सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर की गिनती बड़े राजभर नेताओं में होती है।
सपा-सुभासपा गठबंधन से पूर्वांचल में बीजेपी की गणित खराब होती दिख रही थी। इसी बीच 13 नवंबर 2021 को आजमगढ़ में विश्वविद्यालय शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान गृहमंत्री ने विश्वविद्यालय का नाम सुहेलदेव के नाम पर रखने की घोषणा कर बड़ा दाव चल दिया। कारण कि राजभर समाज के लिए महाराजा सुहेलदेव पूज्य हैं और इस समाज के लोग लंबे से समय से उनकी प्रतिमा के स्थापना की मांग कर रहे थे। बीजेपी का यह दाव कितना सफल होगा यह तो समय बतायेगा लेकिन इससे पूर्वांचल की सियासत में भूचाल सा दिख रहा है।
सभी राजनीतिक दल बीजेपी सरकार के इस फैसले पर सवाल उठा रहे हैं या फिर इसे राजनीतिक स्टंट करार दे रहे हैं। चाहे शिवपाल यादव हो अथवा सपा नेता लगातार सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता आशुतोष द्विवेदी और उलेमा कौंसिल के राष्ट्रीय प्रवक्ता तलहा आमिर ने विश्वविद्यालय का नाम अल्लामा शिब्ली के नाम पर रखने की मांग तक कर दी है। इसी सियासी गर्मी के बीच 16 नवंबर को अखिलेश यादव विजय रथ लेकर आजमगढ़ पहुंच रहे हैं। सपाई कार्यक्रम को सफल बनाने की तैयारी में जुटे हुए हैं।
भाजपा के इस फैसले से सपा को झटका लगा है। कारण कि राजभर मतों को अपने पाले में करने की सपा की उम्मीद पर यह किसी झटके से कम नहीं है। ऐसे में माना जा रहा है कि अखिलेश यादव 16 नवंबर को कोई बड़ा दाव चलेंगे। कहा तो यहां तक जा रहा है कि अखिलेश के साथ ओमप्रकाश राजभर भी नजर आ सकते है। अब देखना दिलचस्प होगा कि अखिलेश यादव करते क्या है। वैसे सभी की नजर उन्हीं के दौरे पर टिकी हुई है।
Published on:
14 Nov 2021 02:47 pm
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