उन्होंने कहा कि हर क्रांतिकारी का सपना देश की आजादी थी। जब देश आजाद हुआ तो हम फूले नहीं समा रहे थे। हमें लगा कि अब भारत बदल जायेगा लेकिन अफसोस आज भी वह सपना साकार नहीं हुआ। देश में राजनीति के अपराधीकरण ने तस्वीर बिगाड़ कर रख दी। इसके बाद कट्टरपंथ, अलगाववाद, उग्रवाद ने इस देश को और पीछे ढकेल दिया। सही मायने में कहें तो गांधी, बोस आजाद ने आजादी को लेकर जो सपना देखा था वह आज तक पूरा नहीं हुआ। आज एक और आजादी की लड़ाई की जरूरत महसूस होती है। यह लड़ाई होनी चाहिए भ्रष्टाचार, अलगाववाद, उग्रवाद, और आतंकवाद के खिलाफ। जब तक यह बुराईयां समाप्त नहीं होती है तब तक देश सही मायनों में आजाद नहीं कहा जाएगा और ना ही शहीदों के सपने साकार होंगे।