
प्रतीकात्मक फोटो
वाराणसी की एक छात्रा ने एमबीबीएस में एडमिशन के लिए नीट का रिजल्ट ही बदल दिया। उसने हास्टल में दाखिला भी ले लिया। इस काम में उसकी मदद लखनऊ के एक साइबर कैफे संचालक ने किया। पुलिस मामले की जांच में जुटी है।
जौनपुर के राज्य चिकित्सा महाविद्यालय का है मामला
वाराणसी के जक्खिनी की रहने वाली एक छात्रा डॉक्टर बनना चाहती थी। वह उमानाथ सिंह स्वाशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय जौनुपर में फर्जी दस्तावेजों की मदद से महिला छात्रावास में रह रही थी। छात्रा की हरकतों से गर्ल हॉस्टल के प्रभारी डॉ शशि पांडेय को उसपर शक हो गया। उन्होंने इसकी शिकायत प्राचार्य से की।
प्राचार्य ने पुलिस से की शिकायत
हॉस्टल प्रभारी के संदेह को देखते हुए प्राचार्य ने पुलिस बुला ली। पुलिस ने जांच की तो पता चला कि छात्रा ने इस बार नीट की परीक्षा दी थी। उसकी काउंसिलिंग चल रही है। अंतिम राउंड की काउंसिलिंग 28 नवंबर को थी। छात्रा को नीट में केवल 64 नंबर मिले थे।
साई साइबर कैफे की मदद से किया फर्जीवाड़ा
पुलिस ने राज खुलने के बाद जब छात्रा से पूछताछ की तो सारा राज खुल गया। छात्रा ने बताया वह लखनऊ में रहकर नीट परीक्षा की तैयारी की थी। परिणाम आने के बाद वह लखनऊ के साई साइबर कैफे के संचालक आलोक भारद्वाज से मिली। कैफे संचालक ने उसका अंक 64 की जगह 464 कर दिया। उसने इसके बदले में 17 हजार रुपए लिए। कैफे संचालक ने कहा तुम्हारी फीस भी जमा हो गई है। अब तुम कालेज जा सकती हो।
फर्जी एनओसी से लिया दाखिला
कैफे संचालक के कहने पर छात्रा सीधे जौनपुर मेडिकल कालेज पहुंच गई। उसने फर्जी एनओसी और एलाटमेंट लेटर दिखाकर महिला छात्रावास में प्रवेश ले लिया। दो दिन बाद महिला छात्रावास प्रभारी डॉ. शशि पांडेय को छात्रा पर शक हो गया।
एसडीएम सदर ने दज किया बयान
फर्जीबाड़ा खुलने के बाद उपजिलाधिकारी सदर जौनपुर भी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने छात्रा का बयान दर्ज किया। छात्रा ने फ्राड के लिए साइबर कैफे संचालक को जिम्मेदार बताया। इसके बाद पुलिस ने छात्रा को उसके माता-पिता को सौंप दिया
लखनऊ में दर्ज होगा मुकदमा
चौकी प्रभारी संतोष कुमार यादव ने बताया कि छात्रा के अभिलेख फर्जी पाए गए हैं। फर्जीवाड़ा लखनऊ में किया गया है। इसलिए मुकदमा भी वहीं दर्ज होगा। पूछताछ के बाद छात्रा को उसके माता-पिता को सौंप दिया गया है।
Published on:
11 Dec 2022 03:08 pm
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