
यूपी में 15 से 49 साल तक की 21.3% महिलाएं मोटापा की शिकार हैं। पांच साल पहले इसी आयु वर्ग की 20% महिलाएं मोटापे का शिकार थीं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण में बढ़ते मोटापे पर चिंता जताई गई है। वैसे राहत वाली बात यह है कि बच्चों में मोटापा के मामले कम हो रहे हैं। इसके पीछे प्रमुख कारण फास्ट फूट का उपयोग कम बताया जा रहा है।
मोटापा बढ़ने का क्या है कारण
सीनियर डॉक्टर विनय कुमार सिंह यादव ने बताया, "शहरीकरण और अनियमित जीवनशैली मोटापे का बड़ा कारण है। कहीं भी कुछ खा लेना, व्यायाम नहीं करना और तनाव में रहना युवाओं में मोटापा बढ़ा रहा है। जब तक उनका ध्यान मोटापे की तरफ जाता है। लोग बचाव के बारे में सोचते हैं, तब तक ज्यादातर लोग शुगर, ब्लड प्रेशर सहित तमाम बीमारियों की चपेट में आ चुके होते हैं।
क्या कहता है राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण की पांच साल पहले यानी 2017 में जारी रिपोर्ट में 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की करीब 20 प्रतिशत महिलाएं मोटापे की शिकार थीं। इस साल जारी रिपोर्ट में यह संख्या बढ़कर 21.3 प्रतिशत हो गई है।
मोटापे की वजह से 64 प्रतिशत गर्भवती अत्यधिक जोखिम में हैं। मोटापे के कारण महिलाओं और पुरुषों में शुगर, ब्लड प्रेशर के मामले बढ़े हैं। दूसरे रोग भी उन्हें जकड़ रहे हैं। राहत की बात यह है कि पांच साल पहले पांच साल से कम उम्र के बच्चों में मोटापा 1.6% था। अब यह 1.3% हो गया है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
डॉ. विनय कुमार सिंह यादव के मुताबिक, "मोटापा बढ़ने से दिल की धड़कन अनियंत्रित हो जाती है। साथ ही सीने में दर्द, हार्ट अटैक, कार्डियक अरेस्ट की आशंका बढ़ जाती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि आंतों की चर्बी दिल के आसपास जमा होने लगती है।
पथरी का भी बढ़ता है खतरा
मोटे लोगों में पित्त की पथरी का खतरा सबसे ज्यादा होता है। इसके अलावा हड्डियों में दर्द, खर्राटे लेना, चलने-फिरने में दिक्कत, थोड़ा सा चलने में सांस फूलने की समस्या सामने आती है। मोटे व्यक्ति में संतान पैदा करने की क्षमता भी प्रभावित होती है।
महिला रोग विशेषज्ञ ने मोटापे को बताया बड़ी समस्य
जिला महिला अस्पताल में तैनात स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. रश्मि सिन्हा के मुताबिक महिलाओं में बढ़ता मोटापा चिंता का विषय है। शादी के बाद महिलाएं अपने स्वास्थ्य को लेकर इतना बेफिक्र हो जाती हैं कि मोटापे की चपेट में आने लगती है। इससे मां बनने में तो दिक्कत होती ही है साथ ही शुगर, हृदय, हड्डियों से जुड़े रोग भी होने लगते हैं। ध्यान न देने पर रजोनिवृत्ति के बाद समस्या और बढ़ जाती है।
नियमित दिनचर्या और व्यायाम जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि मोटापे को रोकने के लिए नियमित दिनचर्या तथा व्यायाम जरूरी है। बच्चों में मोटापा इसलिए कम हुआ है कि माता-पिता उन्हें लेकर सजग हुए हैं। उनके खानपान पर ध्यान दिया जा रहा है। फास्ट फूड के उपयोग में कमी आई है। यह सारी चीजें महिलाओं को खुद पर भी लागू करनी होगी। उन्हें भी नियमित व्यायाम करने की जरूरत है।
Published on:
29 Nov 2022 07:22 am
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