
प्रतीकात्मक फोटो
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
आजमगढ़. UP Assembly Election 2022 जिले की फूलपुर विधानसभा सीट हमेंशा से चर्चा में रही है। यह पूर्व मुख्यमंत्री राम नरेश यादव का गृहक्षेत्र है तो यहां हमेंशा से सपा के बाहुबली पूर्व सांसद रमाकांत यादव का वर्चश्व रहा है। वर्ष 2017 में पहली बार यहां बीजेपी को जीत मिली है। बाहुबली रमाकांत के पुत्र अरूणकांत बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीते थे। अब बीजेपी अपनी इस सीट को बचाने की जद्दोजहर कर रही है तो दूसरी तरफ सपा ने बाहुबली रमाकांत यादव को मैदान में उतार दिया है। ऐसे में यहां लड़ाई दिलचस्प होती दिख रही है। कारण कि यहां सेे बसपा मुस्लिम नेता शकील अहमद पर दाव लगाने की तैयारी में है।
फूलपुर पवई विधानसभा क्षेत्र की सीमा अंबेडकरनगर के बार्डर तक है। इस क्षेत्र ने राजनीति में कई बड़े चेहरे दिये है। पूर्व मुख्यमंत्री राम नरेश यादव इसी विधानसभा क्षेत्र के आंधीपुर गांव के रहने वाले थे। बाद में उन्हें मध्यप्रदेश का राज्यपाल बनाया गया था। अगर यहां हुए 17 विधानसभा चुनावों पर नजर डालें तो यहां के लोगों ने सभी दलों को प्रतिनीधित्व का मौका दिया लेकिन वर्ष 1985 में राजनीति में उतरने के बाद बाहुबली रमाकांत यादव का वर्चश्व दिखा है।
वर्ष 1985 का चुनाव रमाकांत यादव कांग्रेस जे के टिकट पर लड़े और विधायक चुने गए। उसके बाद पीछे मुड़ कर नहीं देखा। हालांकि उन्होंने जीत की राह तय करने के लिए पार्टी बदलने में भी कोई हिचकिचाहट नहीं दिखाई और अतीत की पार्टियों को विस्मृत कर नित नई पार्टियों को गले लगाते गए। रमाकांत यादव ने 1989 में बसपा, 1991 में सजपा के टिकट पर और 1993 में सपा के टिकट पर यहां से जीत हासिल की। उन्होंने फूलपुर की राजनीतिक विरासत अपनी पत्नी रंजना यादव को सौंप दी और खुद सदर सीट पर संसदीय राजनीति शुरू की और यहां भी सफल रहे। लेकिन फूलपुर मेें उनका यह प्रयोग विफल साबित हुआ। रंजना चुनाव हार गयी। इसके बाद वर्ष 2007 में अपने पुत्र अरूणकांत यादव को सपा के टिकट पर मैदान में उतारा और जीतने में सफल रहे। वर्ष 2017 में अब उनके पुत्र अरूणकांत यहां बीजेपी के टिकट पर विधायक चुने गए।
रमाकांत के प्रभाव का असर इतना था कि कभी पूर्व मुख्यमंत्री राम नरेश यादव को यहां हार का सामना करना पड़ा था। वैसे रामनरेश यहां 1996 और 2002 में यहां से कांग्रेस के विधायक चुने गए थेे लेकिन उस समय रमाकांत मैदान में नहीं थे। रामनरेश ने रमाकांत की दूसरी पत्नी रंजना यादव को जरूर हराया था। 2007 में उन्हें रमाकांत के पुत्र अरुण यादव के हाथों हार क सामना करना पड़ा था। अब 2022 के चुनाव की तैयारी चल रही है। यहां चुनाव काफी दिलचस्प दिख रहा है। सपा ने रमाकांत को यहां से मैदान में उतार दिया है। उनके पुत्र अरूणकांत बीजेपी से टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। वहीं रमाकांत का क्षेत्र में विरोध भी हो रहा है। बसपा ने यहां मुस्लिम प्रत्याशी उतारने का मन बनाया है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि बाजी किसके हाथ लगती है।
कब कौन बना विधायक
1977 पदमाकर जेएनपी
1980 अब्दुल कलाम कांग्रेस
1985 रमाकांत कांग्रेस जे
1989 रमाकांत बसपा
1991 रमाकांत सजपा
1993 रमाकांत सपा
1996 रामनरेश कांग्रेस
2002 रामनरेश कांग्रेस
2007 अरुण कांत सपा
2012 श्याम बहादुर सपा
2017 अरुण कांत भाजपा
Published on:
31 Jan 2022 01:35 pm
बड़ी खबरें
View Allआजमगढ़
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
