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मौर्य दंपती हत्याकांडः पुलिस के खिलाफ सड़क पर उतरे सैकड़ों लोग, कहा हत्यारों को बचा रही है पुलिस

अहरौला थाना क्षेत्र के पारा गांव में जून माह में हुई मौर्य दंपत्ति की हत्या के मामले में नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी न होने का मामला तूल पकड़ चुका है। एक तरफ मृतक का पूरा परिवार पिछले 22 दिनों से कलेक्ट्रेट पर धरने पर बैठा है तो दूसरी तरफ सोमवार को सामाजिक संगठन और राजनीतिक दलों के लोग सड़क पर उतर गए। पुलिस पर हत्यारों का बचाने का आरोप लगाते हुए लोगों ने लोग विरोध प्रदर्शन कर डीएम और एसपी को ज्ञापन सौंपा।

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प्रदर्शन करते लोग

प्रदर्शन करते लोग

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
आजमगढ़. अहरौला थाना क्षेत्र में जून माह में हुई मौर्य दंपती की हत्या के मामले में नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी का मामला अब तूल पकड़ लिया है। मृतक का पूरा परिवार पिछले 22 दिनों से कलेक्ट्रेट पर धरना दे रहा है लेकिन किसी अधिकारी ने उनकी सुधि नहीं ली। अब परिवार के समर्थन में कई सामाजिक संगठन और राजनीतिक दल खड़े हो गए हैं। सैकड़ों की संख्या में लोगों ने सोमवार को कलेक्ट्रेट क्षेत्र में जुलूस निकालकर विरोध प्रदर्शन किया और पुलिस पर आरोपियों को बचाने का आरोप लगाते हुए नारेबाजी की। इस दौरान लोगों ने एसपी और डीएम को ज्ञापन सौंपा। अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण राहुल रूसिया द्वारा सात दिन में कार्रवाई का आश्वासन देने पर लोग शांत हुए। वहीं मृतक के बच्चे अब भी धरने पर बैठे हैं। इसका दावा है कि जब तक गिरफ्तारी नहीं होती वे धरना बंद नहीं करेंगे।

बता दें कि अहरौला थाना क्षेत्र के पारा गांव निवासी निवासी इंद्रपाल मौर्य पुत्र स्व. रामलगन जनरल स्टोर की दुकान कर परिवार का भरण पोषण करता था। 14 जून 2022 को वह अपनी पत्नी शकुंतला के साथ बाइक से जौनपुर जिले के शाहगंज दवा लेने गया था। इंद्रपाल के साथ उसके साढ़ू विकास मौर्य निवासी भरचकिया थाना पवई भी अपनी पत्नी के साथ चिकित्सक के पास गए थे। दवा लेने के बाद दोनों रिश्तेदार अपने परिवार के साथ अपने घर के लिए रवाना हुए लेकिन इंद्रपाल व उनकी पत्नी शकुंतला दोनों घर नहीं पहुंचे। 16 जून को लापता इंद्रपाल मौर्य व उनकी पत्नी शकुंतला का शव फूलपुर कोतवाली क्षेत्र के अंबारी बाजार के समीप सड़क किनारे स्थित झाड़ी से बरामद हुआ था। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। लेकिन परिवार को आरोप है जो वास्तविक हत्यारें हैं जिन्हें उन्होंने नामजद किया है पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने के बजाय बचा रही है।

वहीं दूसरी तरफ घटना के कुछ दिन बाद ही डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य मृतक के घर पहुंचे थे। डिप्टी सीएम के सामने ही एसडीएम ने कहा था कि परिवार को 25 लाख रुपये आर्थिक सहायता दी गई है। डिप्टी सीएम ने परिवार को हर संभव मदद का आश्वासन दिया था। इसके बाद भी परिवार को किसी तरह की आर्थिक सहायता नहीं मिली। आर्थिक सहायता के लिए मृतक का पुत्र लखनऊ तक गया लेकिन किसी ने उसके दर्द को नहीं समझा। इसके बाद मृतक के पूरे परिवार ने 19 सितंबर को जिला मुख्यालय पर धरना प्रदर्शन किया। उस समय उन्हें सात दिन में कार्रवाई का आश्वासन देकर हटा दिया गया लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।

इससे नाराज होकर मृतक का पुत्र शिवांश मौर्य 17 अक्टूबर से अपने पूरे परिवार के साथ कलेक्ट्रेट पर अनिश्चित कालीन धरना दे रहा है लेकिन किसी ने उसकी सुधि नहीं ली। अब परिवार के समर्थन में भीम आर्मी, जनअधिकार पार्टी, सामाजिक संगठन प्रयास, बहुजन मुक्ति मोर्चा आदि खड़े हो गए है। संगठन के लोगों ने सोमवार को जिला मुख्यालय पर जुलूस निकालकर प्रदर्शन किया। पुलिस पर आरोपियों का बचाने का आरोप लगाते हुए डीएम और एसपी को ज्ञापन सौंपा। मौके पर पहुंचे अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण ने सात दिन में कार्रवाई का आश्वासन देकर लोगों को शांत कराया।

मृतक दंपति के पुत्र शिवांश मौर्य ने कहा कि पुलिस हत्यारों को बचाने के हर हथकंडे अपना रही है। मीडिया में खबर तक छपवा दी गई कि हमें मुआवजा मिल गया लेकिन हम आज भी दो वक्त की रोटी के मोहताज है। परिवार से झूठ पर झूठ बोला जा रहा है। हमारा धरना तब तक जारी रहेगा जब तक गिरफ्तारी नहीं होती। इस मामले में अपर जिलाधिकारी प्रशासन अनिल कुमार मिश्र का कहना है कि आरोप गलत है। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर दो आरोपियों को जेल भेजा गया है। वे एफआईआर में भी नहीं थे। बाकि जिनपर आरोप लगाया गया है उसकी जांच चल रही है।