
प्रतीकात्मक फोटो
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
आजमगढ़. एमएलसी चुनाव में पार्टी से बगावत कर अपने बेटे को निर्दल मैदान में उतारना एमएलसी यशवंत सिंह पर भारी पड़ गया। आजमगढ़-मऊ स्थानीय निकाय प्राधिकारी क्षेत्र से भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी अरुण कुमार यादव के विरोध और अपने पुत्र विक्रांत सिंह रिशू को चुनाव लड़ाने को पार्टी विरोधी गतिविधि मानते हुए बीजेपी ने यशवंत सिंह को छह साल के लिए निष्कासित कर दिया है। यशवंत सिंह के खिलाफ कार्रवाई से हड़कंप मचा है। कारण कि यशवंत सीएम सीएम योगी के बेहद करीबी माने जाते हैं। उन्होंने वर्ष 2017 के चुनाव के बाद सीएम योगी को विधान परिषद भेजने के लिए अपने पद से त्यागपत्र दिया था।
बता दें कि बसपा से राजनीतिक कैरियर की शुरूआत करने वाले यशवंत सिंह ने कई मौकों पर बीजेपी की मदद की थी। वर्ष 1997 में बसपा को तोड़कर उन्होंने बीजेपी की सरकार बनवाई थी। उस समय उन्हें आबकारी मंत्री बनाया गया था। जन तांत्रिक बसपा के बैनर तले बीजेपी के समर्थन से वे लोकसभा का चुनाव भी लड़े थे लेकिन कामियाबी नहीं मिली। बाद में यशवंत सिंह सपा में शामिल हो गए थे। समाजवादी पार्टी ने उन्हें विधान परिषद भेजा था।
वर्ष 2017 में वे बीजेपी में शामिल हुए और उस समय मुख्यमंत्री योगी को विधान परिषद भेजने के लिए एमएलसी पद से इस्तीफा दे दिया था। बाद में बीजेपी ने उन्हें एमएलसी बनाया था। यशवंत को सीएम योगी का बेहद खास माना जाता है। वे एमएलसी चुनाव में अपने पुत्र विक्रांत के लिए टिकट की दावेदारी कर रहे थे लेकिन पार्टी द्वारा पूर्व विधायक अरूणकांत यादव को टिकट दिया गया है। इसके बाद यशवंत सिंह ने अपने पुत्र विक्रांत को निर्दल मैदान में उतार दिया। शुरुआत में लगा कि विक्रांत पर्चा वापस लेंगे, लेकिन ऐसा हो नहीं हुआ। अलबत्ता चुनाव में ताकत झोंकी जाने लगी, जिसके बाद भाजपा संगठन की ओर से एमएलसी यशवंत सिंह के खिलाफ कार्रवाई की आशंका जताई जाने लगी थी।
भाजपा ने अरुण को चुनाव जिताने के लिए पूरी ताकत लगाते हुए किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष कामेश्वर सिंह, गोरखपुर प्रांत के क्षेत्रीय महामंत्री सहजानंद राय को चुनाव प्रभारी बनाया है। एक दिन पूर्व ऊर्जा एवं नगर विकास मंत्री एके शर्मा कार्यकर्ताओं से रूबरू होेने पहुंचे थे। उन्होंने कार्यकर्ताओं में यह कहते हुए जोश भरा कि यही अवसर जब हम एमएलसी चुनाव जीतकर सपा से बदला ले पाएंगे। यहां से आप सभी एक प्रतिनिधि भेजें, तो जनपद का विकास मिल-जुलकर वृहद तरीके से किया जाएगा। मंत्री दयाशंकर सिंह ने भी कार्यकर्ताओं से अरुण को जिताने की अपील की थी।
वही दूसरी तरफ यशवंत के चलते पार्टी को हो रहे नुकसान के बारे में संगठन द्वारा रिपोर्ट भेजी गयी थी। यशवंत की बगावत को देखते हुए पार्टी ने विधान परिषद सदस्य यशवंत सिंह को पार्टी से छह वर्ष के लिए निष्कासित कर दिया है। प्रदेश महामंत्री गोविंद नारायण शुक्ल ने इस आशय का पत्र भाजपा प्रदेश अध्यक्ष, प्रदेश महामंत्री संगठन, क्षेत्रीय अध्यक्ष भाजपा गोरखपुर क्षेत्र तथा जिलाध्यक्ष भाजपा आजमगढ़ को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दिया है। भाजपा के लालगंज जिलाध्यक्ष ऋषिकांत राय ने इसकी पुष्टि की है। यशवंत के निष्कासन से पार्टी में भीतरघात करने वालों में हड़कंप मचा है।
Published on:
04 Apr 2022 07:12 pm
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