
मुलायम सिंह यादव निरहुआ
आजमगढ़. यूपी में पार्टी की सरकार थी और 2014 में सांसद बनने के बाद जब मुलायम सिंह यादव ने 80 प्रतिशत यादव आबादी वाले गांव तमौली को गोद लिया तो लोगों में आस जगी कि अब तो गांव का कायाकल्प हो जाएगा लेकिन मुलामय सिंह यादव गांव वालों की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए। ग्रामीणों को मलाल है कि इतना बड़ा नेता गांव को गोद तो ले लिया लेकिन न तो कभी उनका हालचाल पूछने आया और ना ही विकास को पर लगा सका। अब केंद्र और प्रदेश में बीजेपी की सरकार है। ऐसे में गांव के लोग अब निरहुआ से आस लगाए है। लोगों ने निरहुआ को ज्ञापन सौंप समुचित विकास की मांग की है।
बता दें कि वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में पूर्वांचल में विपक्ष का सूपड़ा साफ हो गया था। उस समय आजमगढ़ के लोगों ने मुलामय सिंह यादव की प्रतिष्ठा बचा ली थी। मुलायम सिंह भले ही 63 हजार मतों से ही चुनाव जीते हो लेकिन पूर्वांचल में सपा का खाता खुल गया था। उस समय यूपी में सपा की सरकार थी और मुलायम सिंह यादव के पुत्र अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे। सांसद बनने के बाद मुलायम सिंह यादव ने शहर से सटे तमौली गांव को गोद लिया था। इस गांव में 80 प्रतिशत आबादी यादवों की है। गांव में 20 प्रतिशत अन्य जाति के लोग है।
मुलायम सिंह ने गांव को गोद लिया था तो लोगों को उम्मीद थी कि समुचित विकास होगा लेकिन पांच साल में मुलायम सिंह एक अदद स्टेडियम का काम तक शुरू नहीं करा पाए। यहीं नहीं गांव में यादव बस्ती को छोड़ दे तो अन्य क्षेत्रों में सड़क बदतर है। यहां बनी मिनी डेयरी बंद पड़ी है। एक सड़क के निर्माण का बोर्ड लग गया लेकिन काम आज तक नहीं हुआ। स्वास्थ्य केंद्र तक यहां नहीं है। प्राथमिक व जूनियर स्कूल तो है लेकिन आगे की शिक्षा के लिए यहां के लोगों को भटकना पड़ता है। मुलायम सिंह कभी अपने गोद लिए गांव में नहीं गए। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में भी यहां के लोगों ने अखिलेश यादव का खुलकर समर्थन किया लेकिन चुनाव जीतने के बाद उन्होंने भी अपने पिता के गोद लिए गांव की सुधि नहीं लिए। अब गांव के लोग निराश है कि उनके गांव का विकास कैसे होगा।
यही वजह है कि उनका दर्द अब सामने आने लगा है। लोकसभा चुनाव हाने के बाद भी जब बीजेपी नेता व फिल्म स्टार दिनेश लाल यादव निरहुआ तमौली गांव में पहुंचे तो लोगों में एक आस जगी। गांव के लोगों ने ग्राम प्रधान ऊषा यादव के नेतृत्व में अपने इस नए नेता का जोरदार स्वागत किया तो गांव का दर्द भी बयां किया। ग्रामीणों ने ज्ञापन में कहा कि आदर्श ग्राम होने के बाद भी इस गांव का समुचित विकास नहीं हुआ है। अधिकारी, भू-माफिया और नेताओं के गलत रवैये का खामियाजा यहां के लोग भुगत रहे हैं। इसलिए गांव की चकबंदी तत्काल करायी जाय। दुग्ध डेयरी को चालू कराया जाय।
मुख्य सड़क का चौड़ीकरण और गड्ढ़ामुक्त किया जाय। पेयजल की समस्या के समाधान के लिए गांव में कम से कम दस हैंडपंप लगवाये जाय। गांव में कम से कम 50 शौर्य ऊर्जा लाइट लगवाई जाय। पात्रों को आवास, विधवा, विकलांग पेंशन दी जाय। किसानों को खाद, बीज पानी बिजली की सही व्यवस्था करने के साथ ही सभी को किसान सम्मान निधि योजना का लाभ दिया जाय।
By Ran Vijay Singh
Published on:
29 Jun 2019 04:00 pm
बड़ी खबरें
View Allआजमगढ़
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
