
2014 में मुलायम सिंह के राजनैतिक सलाहकार रहे राम दर्शन यादव इस पार्टी से लड़ेंगे लोकसभा चुनाव!
आजमगढ़. बाबरी विध्वंस की बरसी पर भाजपा पर खुलकर हमला बोलने वाले राम दर्शन यादव एक बार फिर चर्चा में हैं। भाजपा और संघ के नेताओं को महात्मा गांधी का हत्यारा बताने वाले इस नेता ने बुधवार को आजमगढ़ जिले में अपनी ताकत दिखाई तो हर किसी को ये सोचने को मजबूर कर दिया कि आने वाले समय में यहां शिवपाल का खेमा मजबूती से चुनाव लड़ने जा रहा है। पार्टी सूत्रों की मानें तो राम दर्शन यादव का टिकट आजमगढ़ लोकसभा सीट से शिवपाल की पार्टी ने तय कर दिया है बस औपचारिक ऐलान की देरी है। लेकिन ये भी कहा जा रहा है कि गठबंधन हो या न हो इस सीट पर राम दर्शन चुनावी मुकाबले को दिलचस्प अभी से बनाते दिख रहे हैं। पिछली बार सपा के मुलायम सिंह यादव के राजनैतिक सलाहकार के तौर पर इन्होने जो रणनीति बनाई थी उसी की देने थी कि मोदी लहर में भी इस नेता ने सपा का परचम आजमगढ़ में लहरा दिया था।
कौन हैं राम दर्शन यादव
बता दें कि राम दर्शन यादव वर्ष 2012 में विधानसभा चुनाव में मुबारकपुर सीट से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़े थे लेकिन वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान वे दोबारा सपा में शामिल हो गये। इसके बाद वर्ष 2017 में रामदर्शन को मुलायम सिंह ने विवाद के दौरान मुबारकपुर से प्रत्याशी बनाया लेकिन अखिलेश यादव ने उनका टिकट काट अखिलेश यादव को प्रत्याशी बना दिया। पार्टी में हासिए पर जाने के बाद रामदर्शन के पास कोई विकल्प नहीं बचा था इसलिए वे शिवपाल के साथ चले गए। अब वे शिवपाल की पार्टी से आजमगढ़ सीट से लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं।
भाजपा से भी रहा नाता
बता दें कि राम दर्शन यादव कभी सपा के कद्दावर नेताओं में गिने जाते थे। वर्षो तक वे पार्टी के जिलाध्यक्ष रहे। एक बार मुबारकपुर से विधायक भी चुने गए। राम दर्शन मुलायम सिंह यादव के करीबी नेताओं में गिने जाते थे। जिले की राजनीति की बात करें तो वे रमाकांत यादव के गुट में हमेशा रहे। वर्ष 2008 में जब रमाकांत यादव भाजपा में शामिल हुए तो रमा दर्शन यादव खुद को बहुत दिन तक सपा में संभाल नहीं पाए। वर्ष 2011 में वे सपा का दामन छोड़ भाजपा में शामिल हो गए। 2012 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें मुबारकपुर से टिकट दे दिया। वे यह सीट जीत तो नहीं पाए लेकिन सपा की कारण का कारण बन गए। सपा ने जिले की दस में से नौ सीट पर जीत हासिल की लेकिन मुबारकपुर बसपा के खाते में चली गयी। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव जब मुलायम सिंह आजमगढ़ से लड़े तो यह चर्चा उठी कि रमाकांत यादव सपा में शामिल हो रहे है और आनन फानन में रातो रात रामदर्शन यादव लखनऊ जाकर सपा का दामन दोबारा थाम लिया ।
शिवपाल के सपा से अलग होकर नयी पार्टी बनाने के बाद इन्होने शिवपाल से अपना नाता जोड़ा और सपा के लिए परेशानी का सबब बनने लगे। अब कई साल के राजनीतिक अनुभव के साथ ही बूथ-बूथ पर बेहतरीन पकड़ रखने वाले राम दर्शन यादव इस बार लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी बन सकते हैं।
Published on:
06 Dec 2018 08:12 pm
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