
रामकृष्ण यादव
आजमगढ़. पूर्व मुख्यमंत्री रामनरेश यादव के भाई और बसपा के पहले सांसद रामकृष्ण यादव अब हमारे बीच नहीं रहे। लखनऊ स्थित राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। उन्होंने अपनी राजनीति की शुरुआत कम्युनिस्ट पार्टी से की, लेकिन बाद में बहुजन समाज पार्टी का हिस्सा बन गए। 1989 में बसपा के टिकट पर आजमगढ़ से लोकसभा चुनाव जीते। इसके बाद पार्टी ने उन्हें दोबारा टिकट नहीं दिया। साल 2012 में विधानसभा चुनाव से पहले मुलायम सिंह यादव की नीतियों से प्रभावित होकर वो समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए।
यूपी में जब अखिलेश यादव के नेतृत्व में जब यूपी में पूर्ण बहुमत की सरकार बननी तो रामकृष्ण यादव को गन्ना शोध संस्थान का उपाध्यक्ष (राज्यमंत्री का दर्जा) बनाया गया। राजनीति में सक्रिय रहने के साथ ही वे दीवानी न्यायालय में प्रैक्टिस भी करते रहे। पिछले दिनों बीमार होने पर उन्हें लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान लखनऊ में भर्ती कराया गया। शनिवार को 83 साल की उम्र में उपचार के दौरान उनका निधन हो गया।
पूर्व सांसद के निधन से उनके समर्थकों व समाजवादी पार्टी में शोक व्याप्त है। समाजवादी पार्टी ने जिला कार्यालय में शोकसभा का आयोजन कर निधन पर दुख जताया और इसे देश की राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति करार दी। निवर्तमान जिलाध्यक्ष हवलदार यादव ने कहा कि स्व. सांसद कुशल नेता, विद्वान अधिवक्ता व बड़े समाजसेवी थे। वे हमेशा गरीबों, मजलूमों, पिछड़ों, दलितों व अल्पसंख्यकों की लड़ाई बराबर लड़ते रहे। उनके निधन से देश को अपूरणीय क्षति हुई है। अंत में कार्यकर्ताओं ने दो मिनट का मौन रखकर गतात्माकी शांति के लिए प्रर्थना की। इस मौके पर राजबहादुर यादव एडवोकेट, रामदरस यादव एडवोकेट, राजाराम सोनकर, संतोष सोनकर सभासद, रिंकू यादव, मेराज अहमद, अब्दुर्रहमान, ओंकार यादव, रामपलट यादव आदि मौजूद थे।
By Ran Vijay Singh
Published on:
26 Jan 2020 09:26 am
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