
अखिलेश यादव और मुलायम सिंह यादव
आजमगढ़. समाजवादी पार्टी के मुखिया पूर्व सीएम अखिलेश यादव निकाय चुनाव सिंबल पर लड़ने की तैयारी कर रहे है लेकिन सपा में मची घमासान अखिलेश यादव की राह में सबसे बड़ा रोड़ा दिख रही है। हर गुट का अपना दावेदार है और टिकट न मिलने पर वह बगावत कर सकता है। वहीं एक बार पहले भी सपा सिंबल पर चुनाव लड़ चुकी है लेकिन उसका अनुभव ठीक नहीं रहा है।
बता दें कि समाजवादी पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते हुए वर्ष 2005 में हुए नगरपालिका चुनाव में नगरपालिका चुनाव पार्टी सिंबल पर लड़ा था और आजमगढ़ नगर पालिका सीट से वसिउद्दीन को चुनाव लड़ाया था लेकिन पार्टी प्रत्याशी को बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा था। अब एक बार फिर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव सिंबल पर चुनाव लड़ने की बात कर रहे हैं।
आजमगढ़ मुलायम सिंह यादव का संसदीय क्षेत्र है। यहां नगरपालिका की दो और नगरपंचायत की 11 सीटें हैं। इसमें से आधे दर्जन सीटों पर सपा का कब्जा है लेकिन विधानसभा चुनाव के पूर्व सपा के विवाद के बाद पार्टी आजमगढ़ में कमजोर हो गयी है। बहुमत होने के बाद भी पिछले तीन महीनें में सपा को क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष की तीन सीटों से हाथ धोना पड़ा है। जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट भी जाते जाते बची। अगर भाजपा के पूर्व सांसद रमाकांत यादव सपा का साथ न देते तो आज इस सीट पर बसपा का कब्जा होता।
अब नगर निकाय में भी सपा की हातल बहुत अच्छी नहीं कही जा सकती है। कारण कि मुलायम सिंह के प्रतिनिधि पूर्व विधायक रामदर्शन यादव का अपना अलग गुट है। वहीं जिलाध्यक्ष और बलराम यादव गुट के बीच की जंग किसी से छिपी नहीं है। पूर्व मंत्री दुर्गा प्रसाद यादव की अपनी महत्वाकांक्षा है। उनकी प्राथमिका हमेशा से मुस्लिम प्रत्याशी रही है।
सभी गुट के प्रत्याशी मैदान में ताल ठोक रहे हैं। सभी अपने प्रत्याशी को टिकट दिलाने के लिए बेचैन है। अब जिस गुट को टिकट नहीं मिलता है उसके लोग पार्टी से विद्रोह कर सकता है। कई दावेदार तो अभी से मुकर दिख रहे हैं। कारण कि इनका मानना है कि पहले की तरह सपा फिर किसी अल्पसंख्यक को मैदान में उतार सकती है।
by RAN VIJAY SINGH
Published on:
30 Sept 2017 09:39 pm
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