
शिव के क्रोध से जालंधर का जन्म हुआ था जन्म, रोने की आवाज सुनकर बहरा हो गया था संसार : अजय भारद्वाज
आजमगढ़. श्री गौरी शंकर मंदिर सिधारी के प्रांगण में चल रहे श्री शिव महापुराण कथा के 17वें दिन कथा वाचक अजय भारद्वाज ने भगवान शिव के क्रोधाग्गिनी से जालंधर राक्षस के जन्म और वृंदा देवी से जांलधर के विवाह का वर्णन किया।
अजय भारद्वाज ने कहा कि देवगुरू बृहस्पति और इन्द्र शिवशंकर के दर्शन के लिए कैलाश पर्वत पर गये। भगवान शंकर इनकी परीक्षा लेने के लिए रास्ते में जोगी का रूप धारण कर धुन रमाने लगे। इन्द्र ने भगवान शंकर से पूछा की तुम कौन हो? भगवान शिव के चुप रहने पर इन्द्र को क्रोध आ गया। उन्होनें क्रोध में ही भगवान शिव को मारने के लिए वज्र का प्रयोग किया। इन्द्र का यह क्रोध देख भगवान शिव भी क्रोधित हो गये। तो देव गुरू बृहस्पति ने क्षमा याचना की और अभय वरदान दिलाया।
भगवान शिव ने तीसरे नेत्र की क्रोधागिनी को गंगा सागर क्षार समुन्द्र में डाला। वहां उस क्रोधागिनी ने बालक का रूप धारण किया और वह बालक जोर जोर से रोने लगा। उसके रोने से पूरा संसार बहरा हो गया। सभी देवता परेशान होकर ब्रह्मा जी के पास गये। रोती आवाज के सहारे ब्रह्मा जी आर्य समुद्र में गये। जहां वह बालक समुद्र में ब्रह्मा जी को शीश नवाया। ब्रह्मा जी ने बालक को गोद में ले लिया।
इसी दौरान बालक ने ब्रह्मा जी का गला पकड़ा। जहां ब्रह्मा जी के आंशू निकले। ब्रह्मा जी ने उस बालक का नाम जालंधर रखा। शुक्राचार्य को बुलाकर इस बालक का राज्याभिषेक किया और समुद्र ने इस बालक पालन पोषण किया। कालनेमि नामक असुर की पुत्री वृंदा से जालंधर का विवाह हुआ। शुक्राचार्य ने जालंधर को समुद्र मंथन की कथा सुनाया। अंत में भगवान शिव शंकर के द्वारा जालंधर राक्षस का उद्धार हुआ। वृंदादेवी ने नरायण को श्राप दिया और अपने आप योगग्नि में भष्म हो गये।
By- रणविजय सिंह
Published on:
13 Aug 2018 07:43 pm
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