
Weather Alert: पूर्वांचल समेत पूरे उत्तर प्रदेश में ठंड का कहर लगातार जारी है और आने वाले दिनों में भी राहत के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं। हिमालयी क्षेत्रों और उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में हो रही भारी बर्फबारी का सीधा असर मैदानी राज्यों, खासकर उत्तर प्रदेश के मौसम पर पड़ रहा है। पहाड़ों से चलने वाली सर्द पछुआ हवाओं ने प्रदेश में गलन और ठिठुरन को और बढ़ा दिया है, जिससे तापमान तेजी से गिरा है। मऊ समेत पूरे पूर्वांचल क्षेत्र में रात का तापमान 7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है, जो सामान्य से काफी कम माना जा रहा है।
घने कोहरे और बर्फीली हवाओं के चलते ठंड का प्रभाव दिन में भी महसूस किया जा रहा है, जिससे लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। कड़ाके की ठंड और गलन की वजह से लोग घरों में दुबकने को मजबूर हैं। सुबह और रात के समय कोहरे की चादर इतनी घनी हो जाती है कि दृश्यता बेहद कम हो जा रही है, जिससे सड़क और रेल यातायात भी प्रभावित हो रहा है। हाईवे पर वाहन रेंगते नजर आ रहे हैं और कई ट्रेनें घंटों देरी से चल रही हैं। ठंड के कारण बाजारों में भी सन्नाटा पसरा हुआ है और जरूरी काम होने पर ही लोग घरों से बाहर निकल रहे हैं।
इस भीषण ठंड का सबसे अधिक असर बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ रहा है। कम तापमान और ठंडे वातावरण की वजह से बच्चे कोल्ड डायरिया की चपेट में तेजी से आ रहे हैं। मऊ और आसपास के जिलों के अस्पतालों में इस बीमारी से ग्रसित बच्चों की संख्या बढ़ती जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि ठंड में शरीर का तापमान कम होने से पाचन तंत्र प्रभावित होता है, जिससे दस्त, उल्टी और पेट दर्द जैसी समस्याएं सामने आती हैं। चिकित्सक अभिभावकों को सलाह दे रहे हैं कि बच्चों को गर्म कपड़ों में रखें, ठंडे पेय पदार्थ और खुले में खेलने से बचाएं तथा हल्का और गर्म भोजन ही दें।
वरिष्ठ मौसम विज्ञानी डॉ. अतुल कुमार सिंह के अनुसार, सोमवार को कानपुर और इटावा में आंशिक शीतलहर जैसे हालात बनने की संभावना है। पहाड़ों से आ रही पछुआ हवाओं के प्रभाव से प्रदेश के कई जिलों में रात के तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस की और गिरावट के संकेत हैं। मौसम विभाग ने अलर्ट जारी करते हुए बताया है कि मऊ, आजमगढ़, बलिया, गाजीपुर समेत कई जिलों में आज शीत दिवस की स्थिति रहेगी, यानी दिन में धूप कम निकलेगी और ठंड का प्रभाव पूरे दिन बना रहेगा।
प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन द्वारा भी लोगों को ठंड से बचाव के लिए दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं। सार्वजनिक स्थानों पर अलाव की व्यवस्था, रैन बसेरों का संचालन और जरूरतमंदों में कंबल वितरण जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। बावजूद इसके, ठंड की मार से बचने के लिए लोगों को स्वयं भी सावधानी बरतने की आवश्यकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक पहाड़ों में बर्फबारी जारी रहेगी और पछुआ हवाएं चलती रहेंगी, तब तक उत्तर प्रदेश में ठंड का प्रभाव इसी तरह बना रहेगा। ऐसे में सतर्कता और बचाव ही इस ठंड से सुरक्षा का सबसे बड़ा उपाय है।
Published on:
05 Jan 2026 10:30 am
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