
प्रतीकात्मक फोटो
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
आजमगढ़. खरीफ के फसल खासतौर पर धान में बेहतर उत्पादन के लिए खरपतवार नियत्रण जरूरी है। साथ ही फसल का कीट प्रंबधन भी जरूरी है। कुछ खास दवाओं को प्रयोग कर किसान न केवल खर पतवार से छुटाकारा पा सकते है बल्कि फसलों को कीट पतंगों से भी बचा सकते है।
कृषि विज्ञान केंद्र कोटवा के सस्य वैज्ञानिक डा. आरके सिंह व फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डा. आरपी सिंह का कहना है कि धान की रिपोई का कार्य समाप्त हो चुका है। अब उसको खर-पतवार व रोग/कीट से बचाने की जरूरत है। धान की फसल में यदि खर-पतवार उगे हैं तो रोपाई के 15-20 दिन के अन्दर चौड़ी पत्ती की घासों को नियन्त्रित करने के लिए 2.4 डी सोडियम साल्ट 80 प्रतिशत की 625 ग्राम मात्रा, अथवा सभी घासों को नियंत्रित करने हेतु विष पाइरीबैक सो. 10 प्रतिशत की 200 मिली की मात्रा 500 लीटर पानी में घोल कर प्लैट फेन नाजिल वाले स्प्रेयर से स्प्रे कर देना चाहिए।
धान की फसल पर इस समय जड़ की सूड़ी तना छेदक, पत्ती लपेटक कीटों की शिकायत हो सकती है। जड़ की सूड़ी के लिए क्लोरोपाइरीफास 20 ईसी की 2.5 लीटर मात्रा को हेक्टेयर की दर से सिंचाई के पानी के साथ खेत में फैला देना चाहिए, अथवा कारटाप हाइड्रोक्लोराइट 4 प्रतिशत ग्रेनूल्स की 20-25 किग्रा मात्रा को प्रति हेक्टेयर स्थिर पानी में बुरक कर नियन्त्रित किया जा सकता है। पत्ती लपेटक कीट जो धान की पत्ती को नाव नुमा बनकर अण्डे देती है। उसका कैटरपीलर पत्तियों के क्लोरोफिल को खुरच-खुरच कर खाता है। जिसमें फसल प्रभावित होती है।
इसके नियन्त्रण हेतु क्यूवनालफास 25 ईसी की 1.250 लीटर मात्रा 500-700 लीटर पानी में मिला कर स्प्रे करनें से इस कीट को नियन्त्रित किया जा सकता है। किन्हीं -किन्हीं क्षेत्रों में दीमक कीट की शिकायत होती है। इसके लिए खेत की तैयारी के समय ही ब्युबेरियाबैसियाना की 04.00 किग्राा मात्रा प्रति हेक्टयर के दर से प्रयोग कर लेना चाहिए। यदि धान की फसल में इसकी शिकायत है तो सिंचाई के पानी के साथ क्लोरोइरीफास 20 ईसी की 2.5 लीटर मात्रा प्रति हेक्टेयर खेत में फैला देना चाहिए।
Published on:
08 Aug 2021 09:31 am
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