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मंत्री जी आपको तो याद होगा अपना वादा 

ओहदा तो बढ़ा साथ ही बढ़ गयी मुसीबत, और सीएम ने बलराम यादव के पाले में डाल दी गेंद

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Ashish Kumar Shukla

Mar 18, 2016

balram yadav

balram yadav

आजमगढ़. जिले के कद्दावर नेता बलराम यादव के माध्यमिक शिक्षा मंत्री रहते हुए उन्हीं के विभाग के राज्य मंत्री ने विधानपरिषद में आजमगगढ़ में विश्वविद्यालय के औचित्य पर सवाल उठाया, उस समय बलराम यादव भले ही चुप्पी साध गये हो लेकिन अब उन्हें इसका जवाब देना होगा। कारण कि सीएम अखिलेश यादव ने उच्च शिक्षा मंत्रालय जो वर्षो अपने पास रखा था उसे बलराम यादव को सौंप दिया है। यह मंत्रालय मिलने से मंत्री से ओहदा तो बढ़ गया साथ ही उनकी मुसीबत में भी इजाफा हुआ है।

कारण कि बलराम यादव ही वो मंत्री है जिन्होंने सबसे पहले अपनी सभाओं में जिले में विश्वविद्यालय का वादा किये थे। यह अलग बात है कि जब विश्वविद्यालय की स्थापना की बात आयी तो वे भूमि का बहाना बनाकर इस मामले को टाल गये थे। आज जब विश्वविद्यालय के मुद्दे पर जब पूरा जिला एकजुट है ऐसे में मंत्री जवाब देना ही होगा। वैसे राजनीति के जानकार साफ कहते हैं कि सीएम ने बलराम को मंत्रालय सौंप गेद उनके पाले में डाल दी है।

बता दें कि वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव के बाद जब सपा पूर्ण बहुमत से यूपी के सत्ता में आयी तभी से जिले मंे विश्वविद्यालय के मुद्दे ने जोर पकड़। इसके पीछे वजह भी थी। जिले के लोगों ने इस पार्टी को नौ विधायक दिये थे। अखिलेश यादव सीएम बने तो बलराम यादव व दुर्गा प्रसाद यादव को अपने मंत्रीमंडल में बतौर कैबिनेट मंत्री शामिल किया जबकि वसीम अहमद राज्यमंत्री बनाये गये। इसके अलावा चार लोगों का राज्य मंत्री का दर्जा दिया गया।

बलराम यादव और दुर्गा यादव स्वयं अपनी सभाओं में धूमकर यह ढिंढोरा पीटते रहे कि जिले में विश्वविद्यालय जल्द बनेगा लेकिन इसके लिए कभी प्रयास नहीं किया। वर्ष 2014 में मुलायम सिंह यादव यहां से सांसद चुने गये तो विश्वविद्यालय की मांग ने और जोर पकड़ लिया। लोगों को उम्मीद थी कि अब हर हाल में विश्वविद्यालय मिल जायेगा। सूत्रों की माने तो सत्ता में आने के बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने स्वयं योजनाओं के संबंध में प्रस्ताव मांगा था। जिले से जो प्रस्ताव भेजा गया उसमें विश्वविद्यालय शामिल था। यहीं नहीं क्षेत्रीय शिक्षा अधिकारी ने भी लिखित दिया था कि जिले में विश्वविद्यालय बनाया जा सकता है। इस बात को मंडल स्तरीय एक अधिकारी ने भी स्वीकार किया है कारण कि जब यह प्रस्ताव बना था तब भी वे यहां महत्वपूर्ण पद पर थे।

इसके बाद छह फरवरी 2015 को मुलायम सिंह यादव को सठियावं में चीनी मिल का उद्घाटन करना था उसी दिन सूचना विभाग एंव जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी विज्ञापन में 35 परियोजनाओं मंे इसे 24वे नंबर पर शामिल किया गया था। उस दिन अगर मुलायम सिंह यादव यदि स्वयं घोषणा को पढ़ देते तो शायद आंदोलन की नौबत ही नहीं आती। लेकिन उन्होंने यह जिम्मेदारी जिले के मंत्रियों को सौंप दी और मंत्रियों ने घोषणा पत्र को पढ़ना जरूरी नहीं समझा। अब इसके पीछे उनकी नियत में खोट था या फिर कोई और वजह यह तो कह पाना संभव नहीं है लेकिन कुछ दिन बाद ही बलराम यादव द्वारा भूमि को मुद्दा बनाकर विश्वविद्यालय के मामले को टाल दिया गया था। जिससे लोगों का मानना है कि विश्वविद्यालय न बनने के पीछे कहीं न कहीं मंत्री ही है।

बहरहाल अब विश्वविद्यालय को लेकर पूरा जिला आंदोलित है। 22 को सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव मिल का उद्घाटन करने आ रहे है। मुख्यमंत्री ने बलराम यादव का ओहदा बढ़ाते हुए उच्चशिक्षा मंत्री बना दिया है। सभा के बाद विश्वविद्यालय का मुद्दा उठना तय है कारण कि अधिवक्ताआंे सहित कई संगठन सीएम को इस मुद्दे पर ज्ञापन सौंपने के लिए तैयार है। ऐसे में सबकी नजर बलराम यादव पर टिकी है। कारण कि अब उनके पास भूमि का बहाना भी नहीं होगा। आंदोलन कर रहे लोगों ने दस भूमि की सूची पहले ही प्रशासन को सौंप दी है। मुलयाम सिंह यादव और मुख्यमंत्री के लिए भी इस मांग को नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा। रहा सवाल बलराम यादव का तो उनकी हालत सांप और छछुन्दर वाली है।

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