मान्यताओं के आधार पर भीलट देव का जन्म करीब 853 वर्ष पूर्व मध्यप्रदेश के हरदा जिले के नदी किनारे स्थित ग्राम रोलगांव पाटन में हुआ। माता का नाम मेदाबाई व पिता का नामदेव रेलन राणा था। गवली परिवार के होकर रेलन शिव के परम भक्त थे। दोनों परम भक्त होने के बाद भी इनके घर कोई संतान नहीं थी। भोलेनाथ की कठोर तपस्या के बाद शिवजी पार्वती ने उन्हें सुंदर बालक के रूप में भीलट देव को जन्म देकर शिव पार्वती ने वचन लिया कि मैं तुम्हें घर पर भी दूध दही प्रतिदिन मांगने आऊंगा। यदि आपने हमें नहीं पहचाना तो इस बालक को उठा ले जाएंगे। लालन-पालन में एक दिन दोनों ही शिव-पार्वती को दिया वचन भूल गए। तभी शिव जी ने बालक को उठाया व पालने में अपने गले का नाग रख बालक को लेकर चौरागढ़ (वर्तमान के पंचमढ़ी) चले गए। इधर, पालने में नाग देवता को देखकर माता मेदा व रेलनजी बेसुध हुए और फिर वापस शिवजी पार्वती की तपस्या की शिव पार्वती ने कहा कि हमारे वचन अनुसार आपने हमें पहचाना नहीं हम बालक को शिक्षा दीक्षा करेंगे। पालने में हमने जो नाग छोड़ा है, उसकी पूजा दोनों रूप में होगी भीलट व नाग रूप में।