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शिव के पुत्र हैं नागदेवता भिलट देव, मंदिर से छू सकते हैं बादल 

सतपुड़़ा की हरी भरी वादियों में बड़वानी के नागलवाड़ी गांव में भीलट देव का है शिखरधाम। सावन में यहां बादल इतने नीचे होते हैं कि आप हाथ ऊंचा कर दें तो उस तक पहुंच जाएं। महिमा ऐसी की नागपंचमी के मेले में करते हैं पांच लाख से ज्यादा लोग दर्शन 

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Rajiv Jain

Jul 26, 2017

bhilat dev Temple at satpura Hills

bhilat dev Temple at satpura Hills

बड़वानी. सतपुड़़ा की हरी भरी वादियों में बड़वानी जिले की राजपुर तहसील के नागलवाड़ी गांव में भीलट देव शिखरधाम है। ये सैकड़ों वर्षों से शिखरधाम के नाम से प्रसिद्ध हैं। सावन में शिखरधाम तक कावडि़ए भी जाते हैं प्रतिवर्ष नागपंचमी पर लाखों लोग दर्शन आरती दर्शन करते हैं। यहां आवागमन के साधन उपलब्ध हैं। नागलवाड़ी मंदिर संस्थान ने बताया कि सावन की नागपंचमी पर श्री भीलट देव संस्थान की ओर से गांव और जिला प्रशासन के सहयोग से श्री भीलट देव का 5 दिवसीय मेला लगता र्है। ये मेला 28 जुलाई 2017 नागपंचमी से शुरू होगा, जो एक अगस्त को समाप्त होगा। यहां प्रतिदिन कई धार्मिक अनुष्ठान किए जाएंगे। नागपंचमी पर्व की पूर्व संध्या के तहत रात्रि 10 बजे से दुग्धाभिषेक शुरू होगा। रात्रि 1 बजे गर्भगृह शृंगार व सुबह 4 बजे महाआरती की जाएगी। वहीं बाबा को 108 व्यंजनों का भोग भी लगाया जाएगा।
bhilat dev
हरदा के रोलगांव पाटन में हुए थे पैदा
मान्यताओं के आधार पर भीलट देव का जन्म करीब 853 वर्ष पूर्व मध्यप्रदेश के हरदा जिले के नदी किनारे स्थित ग्राम रोलगांव पाटन में हुआ। माता का नाम मेदाबाई व पिता का नामदेव रेलन राणा था। गवली परिवार के होकर रेलन शिव के परम भक्त थे। दोनों परम भक्त होने के बाद भी इनके घर कोई संतान नहीं थी। भोलेनाथ की कठोर तपस्या के बाद शिवजी पार्वती ने उन्हें सुंदर बालक के रूप में भीलट देव को जन्म देकर शिव पार्वती ने वचन लिया कि मैं तुम्हें घर पर भी दूध दही प्रतिदिन मांगने आऊंगा। यदि आपने हमें नहीं पहचाना तो इस बालक को उठा ले जाएंगे। लालन-पालन में एक दिन दोनों ही शिव-पार्वती को दिया वचन भूल गए। तभी शिव जी ने बालक को उठाया व पालने में अपने गले का नाग रख बालक को लेकर चौरागढ़ (वर्तमान के पंचमढ़ी) चले गए। इधर, पालने में नाग देवता को देखकर माता मेदा व रेलनजी बेसुध हुए और फिर वापस शिवजी पार्वती की तपस्या की शिव पार्वती ने कहा कि हमारे वचन अनुसार आपने हमें पहचाना नहीं हम बालक को शिक्षा दीक्षा करेंगे। पालने में हमने जो नाग छोड़ा है, उसकी पूजा दोनों रूप में होगी भीलट व नाग रूप में।

Bhilat dev Nagalwadi
पचमढ़ी के चौरागढ़ में हुई थी शिक्षा
पंचमढ़ी चौरागढ़ में बाबा भोलेनाथ के मार्गदर्शन में शिक्षा दीक्षा अर्जित कर तंत्र-मंत्र जादूगर युद्ध की समस्त कला में दक्ष होकर भीलट देव भेरनाथ के साथ मिलकर भोलेनाथ के आदत के अनुसार काथुर बंगाल (वर्तमान में कामख्या देवी मंदिर के आसपास का घना जंगल) का रुख किया। वहां ख्यात जादूगरों का हूर बंगाल के जंगलों में सामना कर उन परिस्थितियों का अंत किया। गंगू तेलन जादूगर का अंत किया। बंगाल के राजा गंधी की पुत्री से विवाह कर भोलेनाथ पार्वती के समक्ष उपस्थित हुए। भोलेनाथ पार्वती ने कहा कि अपने माता-पिता के पास जाओ वहां से नागलवाड़ी के पास सतपुड़ा शिखर चोटी पर विराज व लोगों का कल्याण करना। तुम सदैव भीलट पर नाग देवता के रूप में पूजे जाओगे। तब से भीलट बाबा नागलवाड़ी से 4 किमी की दूरी पर सतपुड़ा के पर्वत तल पर शिखर धाम पर मौजूद हैं। बाबा भीलट देव ने लाखों भक्तों की मनोकामना पूर्ण की है।
Bhilat dev Nagalwadi mandir Devotee

किन्नर को दिया था बच्चे का वरदान
अपने पिता के वचन अनुसार बाबा भिलट देव ने नागलवाड़ी के लोगो की सेवा की। धीरे-धीरे बाबा भिलट देव की महिमा आस-पास के इलाकों में बढऩे लगी। एक दिन बाबा के दरबार में एक किन्नर आई और उसने कहा बाबा मुझे एक संतान चाहिए तब बाबा ने कहा आप किन्नर हो आपको गर्भ कैसे हो सकता है तब किन्नर जिद करने लगा तभी बाबा के उसे तथास्तु कह दिया और उस किन्नर को नौ घड़ी में नौ माह का गर्भ हो गया। कोई कुदरती मार्ग नहीं होने के कारण
प्रसव के समय उसकी मौत हो गई। इस किन्नर की समाधी आज भी नागलवाड़ी में है। तभी बाबा भिलट देव ने श्राप दिया कि तुम्हारी जाती का कोई भी किन्नर नागलवाड़ी में रात्रि विश्राम के लिए नहीं रुकता है।

2004 में बना भव्य मंदिर
करीब 700 वर्ष पुराने इस मंदिर से लाखों लोगों की आस्था जुड़ी है। शिखर धाम पर भीलट देव का भव्य मंदिर गुलाबी पत्थरों से वर्ष 2004 में बनाया गया। प्रतिवर्ष नागपंचमी पर लाखों लोग दर्शन आरती दर्शन करते हैं। यहां 12 माह आवागमन के साधन उपलब्ध हैं।

कैसे पहुंचे नांगलवाड़ी
महाराष्ट्र के धुलिया इंदौर खंडवा खरगोन से आसानी से नागलवाड़ी शिखर धाम आया जा सकता है। गूगल मैप के जरिए भी भिलट देव की लोकेशन देखकर नागलवाड़ी शिखरधाम जाया जा सकता है। बड़वानी व खरगोन जिले की सीमा पर स्थित ग्राम नागलवाडी खरगोन से 50 किलोमीटर और बड़वानी जिला मुख्यालय से 74 किलोमीटर है, यहां आगरा-मुंबई यानी एबीरोड पर भी सेंधवा से पहले ही नांगलवाड़ी तक जाया जा सकता है।
-खरगोन से 50 किमी
-सेगांव से 18 किमी
-बड़वानी से 74 किमी
-आगरा गुवाहाटी मार्ग से 18 किमी
-सेंधवा से 27 किमी
(नागलवाड़ी से पत्रिका डॉट कॉम के लिए इनपुट मुकेश गहलोत)