
Biometric Attendance System
बड़वानी। हर तरह की व्यवस्थाओं में सुधार में आधुनिक तकनीकें अपना कमाल दिखा रही है। ऐसा ही मामला शहर के अग्रणी शहीद भीमानायक स्नातकोत्तर महाविद्यालय में देखने को मिल रहा हैं। जहां कभी विद्यार्थियों की उपस्थिति काफी कम रहती थी, लेकिन अब आधुनिक सख्ती से इसमें तेजी से सुधार आने लगा है। हम बात कर रहे हैं बायोमेट्रिक हाजिरी सिस्टम की।
इस व्यवस्था से कॉलेज की व्यवस्थाओं में बड़ा बदलाव लाया है। अधिकांश छात्र-छात्राएं एडमिशन लेने के बाद कॉलेज नहीं आते थे। ये कॉलेज की तरफ रुख तभी करते थे, जब परीक्षा से संबंधित कोई जरूरी काम होता था। ऐसे बच्चों की भी कमी नहीं थी जो महीने में मुश्किल से एकाध बार ही कॉलेज में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते थे, लेकिन इस मनमानी पर बीते माहों से रोक लग गई है। कॉलेज प्रबंधन ने उच्च शिक्षा विभाग के आदेश के तहत कॉलेज में विषयवार बायोमेट्रिक मशीन लगवा दी हैं। जिनके माध्यम से वर्तमान में हजारों विद्यार्थी प्रतिदिन हाजिरी लगा रहे हैं। कॉलेज में कुल एडमिशन लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या 10 हजार के करीब है। वहीं जो बच्चे अभी भी बायोमेट्रिक हाजिरी नहीं लगा रहे है, उन्हें अंतिम चेतावनी दे दी गई है। इसके बाद भी यदि वह नहीं सुधरे तो उनका नाम कॉलेज से काट दिया जाएगा।
व्यवस्था में एक बड़ी खामी
जिले के सबसे बड़े पीजी कॉलेज में बीते माहों से बायोमेट्रिक मशीन से हाजिरी अमल में आ चुकी है। एक मशीन पर सैकड़ों विद्यार्थियों को हाजिरी देनी है। इस नई व्यवस्था के अमल में आने के बाद उपस्थिति 60 से 80 प्रतिशत तक पहुंचने लगी है। हालांकि प्रारंभिक तौर पर इस व्यवस्था में एक बड़ी खामी भी सामने आ गई है, वह है कि स्टूडेंट और स्टाफ को अभी सिर्फ आते समय ही अंगूठा लगाना होता है। जाते समय अंगूठा लगाने की अनिवार्यता अभी लागू नहीं की गई है। इस छूट का फायदा लेते हुए ज्यादातर बच्चे सिर्फ बायोमेट्रिक मशीन में हाजिरी दर्ज कर कॉलेज से चले जाते हैं।
व्यवस्था अच्छी, लेकिन सख्ती से हो लागू
शिक्षा से जुड़े जानकारों का कहना है कि बायोमेट्रिक सिस्टम से विद्यार्थियों की अटेंडेंस की व्यवस्था काफी अच्छी है। बशर्ते प्रभावी क्रियान्वयन हो। इस नियम से विद्यार्थी रेगुलर कॉलेज आएंगे और लेक्चर भी अटेंड करेंगे। परिणामस्वरूप इससे रिजल्ट भी अच्छा होगा। बच्चों एवं प्राध्यापकों की जवाबदेही भी तय होगीए क्योंकि इलेक्ट्रानिक डाटा में कोई झूठ नहीं बोल सकता। इससे पहले कॉलेज में प्राध्यापक का अधिकतर समय अटेंडेंस लेने में चला जाता था। इसकी झंझट अब खत्म हो हो गई है। प्राध्यापक और स्टूडेंट को पढऩे के लिए अब ज्यादा समय मिलेगा।
परीक्षा में बैठने 75 प्रतिशत हाजिरी जरूरी
जानकारी के अनुसार शासन के निर्देश हैं कि विद्यार्थी को परीक्षा में बैठने के लिए 75 प्रतिशत हाजिरी होना जरूरी है। साथ ही आवास, छात्रवृत्ति आदि के लिए उपस्थिति बेहतर होना है। कॉलेज में बायोमेट्रिक अटेंडेंस शुरू होने से विद्यार्थियों की हाजिरी का प्रतिशत तो बढ़ गया है, इसलिए अधिकांश बच्चों को इस बार यह परेशानी नहीं आएगी।
अगले सत्र से दोनों टाइम होगी बायोमेट्रिक
वहीं कॉलेज में बायोमेट्रिक अटेंडेंस शुरू हुई है, तब से स्टूडेंट्स की संख्या काफी बढ़ी है। वर्तमान में 70 प्रतिशत विद्यार्थी नियमित आ रहे हैं। जो नहीं आ रहे हैं उन्हें लास्ट चेतावनी दी जा रही है। इसके बाद नाम काटने की प्रक्रिया अपनाई जा सकेगी। वहीं अगले सत्र से दोनों समय बायोमेट्रिक हाजिरी अनिवार्य होना है।
वर्जन...
100 प्रतिशत करने का है प्रयास
बायोमेट्रिक हाजिरी सिस्टम से कॉलेज में विद्यार्थियों की उपस्थिति में काफी सुधार आया है। इसमें स्टाफ की उपस्थिति भी 100 फीसदी दर्ज हो रही है। वहीं विद्यार्थियों की संख्या 60 से 80 फीसदी तक पहुंच रही है। इसे 100 प्रतिशत करने के प्रयास किए जा रहे है।
-डॉ. एनएल गुप्ता, प्राचार्य, एसबीएन पीजी कॉलेज बड़वानी
Published on:
11 Feb 2023 05:07 pm
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