
Matrushakti Sammelan held for the first time in Barwani
बड़वानी. स्वामी अमूर्तानंद सेवा न्यास के तत्वावधान में जिला मुख्यालय पर पहली बार मातृ शक्ति का सम्मेलन रविवार को आयोजित हुआ। जिसका विषय संवर्धिनी चिंतन भारतीय स्त्री था। इसमें महिलाओं के सर्वांगीण विकास के बिंदुओं के साथ ही देश व समाज के प्रति वर्तमान समय में मातृ शक्ति की भूमिका पर अधिकारियों का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र की मुख्य वक्ता शालिनी रतोरिया ने बताया कि आज भारत माता के लाड़ले वीर सपूत दुर्गादास जी की 385वीं जयंती मनाई जा रही है, उन्हें शत-शत नमन। भारत देश में माता अहिल्या जैसी शासक हुई, जिन्होंने काशी सहित कई मंदिरों का जीर्णोद्धार तथा निर्माण करा कर भारतीय संस्कृति को पुनर्जीवित करने का महत्वपूर्ण कार्य किया। अहिल्या माता ने अपने शासन से भारत के गौरव को बढ़ाया। 18वीं सदी में जब यूरोप में क्रांति हुई तो महिलाओं ने अपने स्वतंत्रतावादी विचारों के लिए क्रांति की। जिसकी परिणीत में वर्तमान समय में यूरोप की परिवार व्यवस्था पूर्णत: ध्वस्त हो गई है। उसी 18वीं सदी के काल में भारत की महारानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों की गुलामी के विरुद्ध भारत में पहला स्वतंत्रता आंदोलन किया। आपके शासन में हल्दी-कुमकुम की परंपरा को बगैर भेदभाव महिलाओं के बीच प्रचलित किया। भारत का हिंदुत्व ही एकत्व का प्रतीक है। सनातन संस्कृति में स्त्री को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। यहां पर अर्धनारीस्वर स्वरूप में नर और नारायणी का संतुलन है। सृजन का कार्य माता ही कर सकती है। इसलिए हमारी संस्कृति में माता को पुजनीय और महान बताया है। मातृ शक्ति जब किसी असाधारण कार्य को हाथ में ले लेती है, तो वह चंद्रयान का प्रक्षेपण भी कर सकती है। भारत में महिलाएं समाज की विश्वकर्मा है, जो जितना सुंदर विचार रखेगी, उतना ही सुंदर समाज व देश बनेगा।
एक घंटे तक चला चर्चा सत्र
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में चर्चा आयोजित की गई। जिसमें 8 समूहों में महिलाओं के बीच चर्चा का दौर चला। जिसमें महिलाओं ने अपने विचारों को रखते हुए अपनी जिज्ञासाओं को शांत किया। कार्यक्रम के अंतिम सत्र में मुख्य वक्ता राष्ट्रीय सेविका समिति मध्य भारत प्रांत सह कार्यवाहिका भारतीय कुशवाह थे। अध्यक्षता सुधा बघेल ने की। भारतीय कुशवाह ने बताया कि कोरोना महामारी के दौरान जब पीडि़त को स्पर्श करने में परिवार के लोग डर रहे थे। उस समय हमारी बहनों आशा कार्यकर्ता व परिचारिकाओं ने अपने दायित्व का बखूबी निर्वहन कर भारतीय नारी का गौरव बढ़ाया। भारत 2047 में विकसित राष्ट्र बन जाएगा, लेकिन ये मातृ शक्ति के सहयोग के बगैर संभव नहीं है। भारत का गौरव हिंदी है, लेकिन हमें अन्य भाषाओं का ज्ञान भी लेना चाहिए। विश्व पटल पर भारत का सम्मान भारत के हर भारतीय नागरिक का सम्मान है।
प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण समय की आवश्यकता
भारतीय कुशवाह ने महिलाओं से अपील की कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण समय की आवश्यकता है। घर परिवार में माताएं पानी, बिजली व ईंधन का सदुपयोग करें। मातृ शक्ति को आधुनिक शिक्षा लेकर ज्ञान अर्जन करना चाहिए, लेकिन भारतीय संस्कृति का संरक्षण आवश्यक है। हमें भुलना नहीं है कि हम सनातनी है। हमें स्वदेशी की ओर जाना होगा, क्योंकि विदेशी वस्तुएं गुलामी की प्रतीक है। आभार जिला संयोजिका संगीता लोह ने माना।
Published on:
13 Aug 2023 07:58 pm
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