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नर्मदा बचाओ आंदोलन का आरोप – नर्मदा घाटी में करोड़ों का फर्जीवाड़ा, अधिकारियों पर नहीं हो रही कार्रवाई

7 साल चली झा आयोग की जांच रिपोर्ट जब आई तो इसमें कई अधिकारियों के नाम भी भ्रष्टाचार में सामने आए। उसके बाद भी इन अधिकारियों पर कोई कार्रवाई अब नहीं हुई है।

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Editorial Khandwa

Dec 22, 2016

medha patkar

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बड़वानी.
सरदार सरोवर बांध प्रभावित क्षेत्र में हुए फर्जीवाड़े में प्रभावितों के साथ छल हुआ। फर्जी रजिस्ट्री कांड हो या मुआवजा वितरण में धांधली, बांध से संबंधित हर मामले में भ्रष्टाचार साबित हुआ। 7 साल चली झा आयोग की जांच रिपोर्ट जब आई तो इसमें कई अधिकारियों के नाम भी भ्रष्टाचार में सामने आए। उसके बाद भी इन अधिकारियों पर कोई कार्रवाई अब नहीं हुई है। इस मामले में नर्मदा बचाओ आंदोलन का आरोप है कि सरकार अधिकारियों को बचाकर प्रभावितों को फसाने में लगी हुई है।


नर्मदा बचाओ आंदोलन कार्यकर्ताओं के अनुसार झा आयोग की रिपोर्ट में 1500 करोड़ का घोटाला उजागर हुआ है। इस मामले में अधिकारियों और दलालों की मिलीभगत सामने आने के बाद भी सरकार प्रभावितों पर ही दबाव बनाने का काम कर रही है। आंदोलन के राहुल यादव ने बताया कि नर्मदा घाटी के सरदार सरोवर प्रभावित करीबन 45 हजार किसान, मजदूर, मछुआरों, कुम्हार परिवारों को बिना संपूर्ण पुनर्वास डूबाने की तैयारी के बाद मप्र सरकार अब भ्रष्टाचार के नाम पर अन्याय करने पर उतर आई है।


व्यापमं घोटाले के बाद अब इस घोटाले में भी मध्यप्रदेश शासन अब दोषी अधिकारियों के बजाय गरीब विक्रेताओं और फंसाए गए विस्थापितों पर प्रकरण दर्ज कर गिरफ्तार कराने में लगी है। देवास जिले के बागली तहसील में सबसे अधिक फर्जी रजिस्ट्रियां हुई। इसमें विक्रेताओं को अपनी जमीन बेचने का पता भी नहीं है व दलालों और अधिकारियों ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीनों के सौदे कर दिए। वैसे ही बड़वानी, मनावर, कुक्षी, अलीराजपुर तहसील भी फर्जी रजिस्ट्रियां हुई है।


1589 फर्जी रजिस्ट्रियां आई सामने

आंदोलन कार्यकर्ताओं के अनुसार सरदार सरोवर के विस्थापितों के पुनर्वास में विभिन्न मुद्दों पर चली झा आयोग की जांच में 1589 फर्जी रजिस्ट्रियां सामने आई है। जांच रिपोर्ट के निष्कर्ष में झा आयोग ने अधिकारी व दलालों के गठजोड़ को दोषी ठहराया। इसमें 200 दलाल, 206 पटवारी, 33 अधिकारी, 15 अधिवक्ता के नाम शामिल हैं। वहीं 88 पुनर्वास स्थलों में भी करोड़ों रुपए का भ्रष्टाचार सामने आया है। इसके बाद भी सरकार कोई कार्रवाई नहीं कर कर ही है। आंदोलन कार्यकर्ताओं ने दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। ऐसा नहीं होने की दशा में नर्मदा बचाओ आंदोलन के कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन करेंगे।

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