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बड़वानी जिले में आठवीं तक के विद्यार्थियों से ज्यादा निरक्षर

***(वर्ष 2011 की जनगणना हैं आधार, कागजों तक सीमित साक्षर भारत योजना)***

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 Saakshar Bharat Yojana

Saakshar Bharat Yojana

बड़वानी. जिले में 15 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के निरक्षरों का आंकड़ा आठवीं तक स्कूलों में दर्ज बच्चों की संख्या से डेढ़ गुना से अधिक है। बच्चों का आंकड़ा मौजूदा शिक्षा सत्र 2022-23 पर आधारित हैं, जबकि निरक्षरों का आंकड़ा वर्ष 2011 की जनगणना पर आधारित है। ऐसे में बीते 12 वर्ष में निरक्षरों का आंकड़ा और भी अधिक हो सकता है।
इन निरक्षरों को बिना बजट के साक्षर करने की चुनौती प्रदेश के साथ आदिवासी बाहुल्य व पिछड़े जैसे बड़वानी जिले में दी गई है। बीते वर्ष से इस योजना पर कवायद चल रही हैं, लेकिन अब तक सभी निरक्षरों की पहचान नहीं हो पाई है। जबकि इसी माह में 19 मार्च को इन निरक्षरों की पहली परीक्षा का आयोजन होना है। वहीं इस योजना के क्रियान्वयन के लिए जिले में एकमात्र अधिकारी पर जिम्मा सौंपा गया है।
लक्ष्य पूर्ण करने की अवधि मार्च 2027
राष्ट्रीय साक्षरता मिशन प्राधिकरण, भारत सरकार ने साक्षरता की दर बढ़ाने के लिए युवा एवं प्रौढ़ साक्षरता दर को 100 प्रतिशत पहुंचाने के लिए यह पहल शुरू की है। लेकिन इस योजना में चुनौती यह हैं कि बिना बजट के इसे अंजाम तक कैसे पहुंचाया जाएगा। वैसे इस लक्ष्य को मार्च 2027 तक पूर्ण कराना हैं। यह कार्यक्रम पूर्ण रुप से स्वयं सेवकों के सहयोग पर आधारित है। प्रदेश के असाक्षरों को पठन, पाठन कराने के लिए छात्र-छात्राओं, सरकारी व गैर सरकारी संगठनों, संस्थाओं एवं व्यक्तियों का सहयोग लिया जाना है। इस योजना के संचालन के लिए डीपीसी कार्यालय के केएस कुशवाहा जिलेभर का जिम्मा संभाल रहे है।
आंकड़ों पर नजर
प्राप्त जानकारी के अनुसार मौजूदा शिक्षा सत्र 2022-23 के अनुसार जिले में कक्षा 1 से 8 वीं तक अध्ययनरत विद्यार्थियों की संख्या करीब 2 लाख 52 हजार से अधिक है। जबकि इसके विरुद्ध जिले में निरक्षरों की संख्या डेढ़ गुना से अधिक यानी 4 लाख 27 हजार 437 हैं। निरक्षरों का यह आंकड़ां भी आज से 12 वर्ष पूर्व वर्ष 2011 में हुई जनगणना पर आधारित है। जबकि 2011 की जनगणना से 2023 तक असाक्षरों की संख्या में बढ़ोतरी होना संभव है। वहीं जिले में कुल दर्ज 427437 में से मात्र 47 हजार असाक्षरों का प्राउड शिक्षा एप पर पंजीयन हो सका है।
वर्जन...
आगामी 19 मार्च की परीक्षा के लिए अक्षर साथियों के माध्यम से असाक्षरों को संकुल सह समन्वयकों की सहायता से सूचित कर सामाजिक चेतना केंद्रों पर शैक्षणिक कार्य करवाया जा रहा है। इस परीक्षा में अधिक से अधिक असाक्षरों को परीक्षा में शामिल होने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
-महेश कुमार निहाले, जिला शिक्षा अधिकारी बड़वानी