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SDM घनश्याम धनगर ने वृद्ध महिला को 3 दिन में दिलवाया अपना हक

-बेटों ने संपत्ति पर कब्जा कर मां को छोड़ दिया था असहाय, माता को 9 लाख रुपए की एफडी की राशि पर एसडीएम ने दिलवाया संपूर्ण अधिकार

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SDM Ghanshyam Dhangar imposed his rights on the woman

SDM Ghanshyam Dhangar imposed his rights on the woman

बड़वानी. सुशासन सप्ताह के तहत एसडीएम बड़वानी घनश्याम धनगर ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ग्राम कसरावद निवासी 65 वर्षीय बुजुर्ग वृद्ध महिला रेवाबाई को माता-पिता भरण पोषण अधिनियम के तहत अपना हक दिलवाया है। एसडीएम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए वृद्ध महिला जिसकी संपत्ति पर बेटो ने कब्जा कर मां को असहाय छोड़ दिया था। उसे 3 दिन में अपना हक दिलवाया है। मां के नाम से की गई संयुक्त एफडी पर एसडीएम ने अब मां को संपूर्ण अधिकार दिलवाया है, जिससे माता अब अपना भरण-पोषण स्वयं कर सकेगी।
उल्लेखनीय है कि एसडीएम घनश्याम धनगर के समक्ष ग्राम कसरावद निवासी रेवाबाई पति किशन कुमावत ने उपस्थित होकर आवेदन दिया कि उनके पति की मृत्यु कुछ साल पूर्व हो गई है। उनके 3 पुत्र रमेशचंद्र, परमानंद एवं नटवर ने उनकी कृषि भूमि का विक्रय कर उससे प्राप्त राशि 1 करोड़ 20 लाख रुपए की राशि का आपस में बंटवारा कर लिया। उसके बाद तीनों पुत्रों ने 3-3 लाख रुपए की राशि कुल मिलाकर 9 लाख रुपए की राशि की एफडी उनके नाम से नर्मदा ग्रामीण बैंक में करवा दी, लेकिन पुत्रों ने उक्त एफडी में उनके नाम के साथ अपने नाम भी जुड़वा दिए। उनके एक पुत्र परमानंद की मृत्यु हो चुकी है। उसकी पत्नि एवं अन्य दो पुत्र उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं करते है, उन्हें अपने साथ भी नहीं रखते है, वे रिश्तेदारों के यहां रहकर अपना गुजर-बसर कर रही है। जब वे एफडी की राशि के लिए पुत्रों एवं बहू के पास गई तो उन लोगों ने हस्ताक्षर करने से मना कर दिया। साथ ही ये भी कहा कि एफडी पर से अपना नाम भी नहीं हटाएंगे। अत: उन्हें उनकी 9 लाख रुपए की एफडी जो वर्तमान में करीब 10 लाख रुपए की हो चुकी है, वह दिलवाई जाए, जिससे वह अपना गुजर-बसर कर लेगी।
न्यायालय में प्रकरण दर्ज किया
रेवाबाई के आवेदन पर एसडीएम धगनर ने भरण पोषण अधिनियम के तहत उनके न्यायालय में प्रकरण दर्ज किया। रेवबाई के दोनो पुत्र रमेशचंद्र एवं नटवर तथा परमानंद की पत्नी को अपने समक्ष उपस्थित होने के निर्देश दिए। तीनों व्यक्ति को एसडीएम ने समझाईश दी। एवं सर्व सहमति से ये निर्णय किया गया कि महिला के नाम की एफडी में जो पुत्रों के नाम है, उन्हें हटा दिया जाएगा। एफडी में सिर्फ रेवाबाई का ही नाम रहेगा। एसडीएम ने इस प्रकरण में नर्मदा ग्रामीण बैंक के मैनेजर को एसडीएम न्यायालय में बुलवाकर हुए समझौते की जानकारी दी। अपने समक्ष रेवाबाई की एफडी में से पुत्रों के नाम हटवाए। अब एफडी पर रेवाबाई का संपूर्ण अधिकार है एवं एफडी पर मिलने वाले वार्षिक ब्याज की राशि से वह अपना भरण-पोषण स्वयं कर सकेगी।