
villagers struggling with drinking water crisis
बड़वानी. जिले में भीषण गर्मी के बीच कई पहाड़ी अंचल क्षेत्रों में पानी के लिए जद्दोजहद बनी हुई है। कोई जमीन खोदकर पानी निकाल रहा हैं, कोई कई किमी पैदल चलकर पानी लाने को मजबूर है, तो कोई पाताल से पानी निकाल गधों के माध्यम से पहाड़ी पर बने मकानों तक पानी ले जा रहा है।
कुछ ऐसे हाल जिले के सबसे दुर्गम पाटी विकासखंड के महाराष्ट्र से सटे सेमलेट क्षेत्र में देखने को मिले। इस क्षेत्र में फरवरी के बाद से पेयजल संकट खड़ा हो गया था। ऐसे में जब जिले से देश-प्रदेश में लोग कोरोना महामारी से जूझ रहे हैं, वहीं पहाड़ी अंचल के गांव में लोग हमेशा की तरह गर्मी में पानी की महामारी झेल रहे है। ग्रामीणों के अनुसार पहाड़ी क्षेत्र में फरवरी बाद से जलस्रोत जवाब दे देते है। जबकि बारिश के बाद अक्टूबर माह तक पहाड़ी नदी-नाले सूख जाते है। पहाड़ी क्षेत्रों में बने फलियों में हैंडपंप नहीं होते, ऐसे में ग्रामीण पहाड़ी नालों में गड्डे खोदकर थाली से पानी निकाल डिब्बा भरते है। इसके बाद डिब्बों को गधों पर लादकर 200-300 फीट ऊंची पहाडिय़ों पर बने मकानों तक ले जाते है। ग्रीष्म काल में मार्च से जून माह तक यहीं समस्या हर बार झेलना पड़ती है।
शहर के आसपास भी यही हाल
शहर से महज चार-पांच किमी दूर बंधान क्षेत्र के आगे फलियों में भी इस समय यही हाल बन हुआ है। पुराने कुआं का गंदा पानी ग्रामीण पीने व उपयोग करने को मजबूर है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन व संबंधित विभाग हर बार गर्मी से पूर्व जिले में पेयजल उपलब्धता की योजनाएं बनाता हैं और बड़ी राशि खर्च करता हैं, लेकिन पहाड़ी क्षेत्रों में बसे बाशिंदों को इससे कुछ राहत नहीं मिल पाती।
Published on:
30 May 2021 11:45 am
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