
बागपत। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) द्वारा अयोध्या मामले (Ayodhya Verdict) में सुनाए गए फैसला का हर कोई स्वागत कर रहा है। इस कड़ी में बागपत (Baghpat) के गांव बसौद (Basaud Village) के लोगों ने भी इस फैसले को शानदार और दमदार करार दिया। ये वही गांव है जहां के लोगों ने देश की आजादी की खातिर साल 1857 में फिरंगियों के दांत खट्टे कर दिए थे। वर्तमान में गांव की आबादी दस हजार है।
गांव में मौजूद चाय की दुकान पर बैठे लोगों से जब इस बारे में बात की गई तो साहबुद्दीन ने कहा कि फैसला देश हित में आया है। दिल खोलकर फैसले की जितनी तारीफ करें, कम है। उनकी हां में हां मिलाते हुए शमशाद ने कहा कि बहुत ये फैसला बहुत ही बढ़िया आया है।
वहीं, अयोध्या फैसला आने के तुरंत बाद गांव में दोनों समुदायों के लोगों ने एक दूसरे को गले मिलकर बधाई दी। इस दौरान सुभाष शर्मा ने बताया कि हमारे गांव में गंगा जमुनी तहजीब की जड़ें बहुत गहरी हैं। देश से बढ़कर कुछ नहीं। युवा चेतना मंच के समीर अहमद का कहना है कि साल 1857 में बाबा शाहमल के नेतृत्व में बसौद के बाशिदों ने ही फिरंगियों की नाक में दम कर दिया था। जिससे बौखलाए अंग्रेजों ने 17 जुलाई 1857 को जुमे के दिन गांव में मस्जिद पर हमला बोल दिया था। तब लोग अपनी जान बचाने के लिए तालाब में कूदे गए थे। अंग्रेजी फौज की फायरिग से गांव के 180 लोग शहीद हो गए।
Published on:
10 Nov 2019 12:55 pm

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