
स्वाद हुआ बेस्वाद, पेट में पड़ती मवाद!
चौमूं. उपखंड चौमूं समेत आस-पास क्षेत्र के अन्य उपखंड क्षेत्रों में मिलावटी दूध, मावा एवं पनीर और दूषित पानी के सेवन से बड़ी संख्या में लोग पेट संबंधी बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। स्थिति ये है कि मिलावटी खाद्य पदार्थ के कारण आंतों में संक्रमण व लीवर में मवाद एवं पीलिया जैसी बीमारियां पैर पसारती जा रही हैं। अकेले चौमूं में ही पिछले तीन महीने में पांच सौ से अधिक मरीज चौमूं के विभिन्न चिकित्सालयों में इलाज करवा चुके हैं।
जानकार सूत्रों के अनुसार चौमूं उपखंड क्षेत्र के लोगों का मुख्य व्यवसाय खेती और दूध का उत्पादन है। यहां से रोजाना ५० हजार लीटर से अधिक जयपुर समेत विभिन्न स्थानों पर बिक्री के लिए जाता है। वहीं बांसा, फतेहपुरा, कुशलपुरा, चीथवाड़ी, मोरीजा, अणतपुरा, चौमूं, जैतपुरा, उदपुरिया, सामोद, नांगल गोविन्द, ईटावा भोपजी, गोविंदगढ़, कालाडेरा समेत दर्जनों गांवों व ढाणियों में मावा बनाने के कारखाने व भट्टियां और बॉयलर वैध और अवैध तरीके से लगाए हुए हैं। इनमें भी हजारों क्विण्टल मावा तैयार करके जयपुर समेत अन्य शहरों में बिक्री भेजा जाता है। अब तो स्थिति ये है कि चौमूं के अलावा शाहपुरा, अजीतगढ़, आमेर समेत आस-पास उपखंड क्षेत्र में भी मावा व पनीर तैयार किया जा रहा है।
सीजन में मिलावटी का दौर
सूत्रों की मानें तो जैसे ही शादी-विवाह या त्योहारी सीजन आता है तो मावे की मांग बढ़ जाती है। फिर शुरू होता है कि मिलावटी मावा, दूध और पनीर बनाने का काम। कई बार सीएमएचओ एवं पुलिस की टीम नकली मावा, दूध व घी बनाने बनाने के मामलों को पकड़ भी चुकी है, लेकिन नियमित मॉनिटरिंग के अभाव में मिलावटखोरों पर कोई असर नहीं होता।
बढ़ रहे पेट की बीमारियों के मरीज
शादी-विवाह उत्सवों और दीपावली के बाद अचानक पेट की बीमारियों के मरीजों में हुए इजाफे के बारे में पत्रिका ने पड़ताल की तो सामने आया कि अधिकतर शादी-विवाह एवं त्योहारी सीजन में मिलावट मावा व दूध बाजार में बेचा जाता है, जिससे निर्मित मिठाइयों को खाने से लोग बीमार हो जाते हैं। इनके सेवन से ज्यादातर बीमारियां पेट संबंधी होती है।
शादी समारोह में जीमे थे
अजीतगढ़ निवासी बजरंगलाल पारीक ने बताया कि वह एक महीने पहले शादी समारोह में खाना खाया था। मावे से बनी मिठाई भी खाई थी। इसके बाद पेट में दर्द रहना शुरू हो गया। आराम नहीं मिलने पर चौमंू में एक निजी चिकित्सालय में चिकित्सक को दिखाया तो जांच परामर्श के बाद सामने आया कि उसके लीवर में मवाद पड़ गई। करीब १० दिन तक चिकित्सालय में भर्ती रहा, तब जाकर ठीक हुआ। खंडेला निवासी तानाराम, सुरेन्द्र कुमार निवासी जसवंतपुरा(शाहपुरा), गोर्वधनलाल निवासी शाहपुरा समेत अन्य कई मरीजों की भी यही पीड़ा है कि वे शादी समारोह में गए थे, जहां मावानिर्मित मिठाई और पनीर से बनी सब्जियां खाई थी। बाद में बीमार हो गए। चौमूं में चिकित्सक को दिखाया तो आंतों में संक्रमण व पीलिया के लक्षण तक मिले।
पत्रिका व्यू
शादी-विवाह हो या अन्य कोई समारोह हो। राज्य सरकार को व्यवस्था करनी चाहिए कि वे उपखंड व तहसील मुख्यालयों पर प्रयोगशाला खुलवाए, जिसमें शादी-विवाह समारोह में आने वाले दूध, मावा व पनीर व अन्य खाद्य पदार्थों के नमूनों की तत्काल प्रभाव से जांच करवाए, जिससे खाद्य पदार्थों का निर्माण करवाने से पहले सच बाहर आ सके कि वास्तव में दूध, मावा या पनीर असली है या नकली है। क्योंकि आयोजक तो पैसे असली खाद्य पदार्थ के देता है। इससे मिलावटखोरों पर भी नकेल लग सकेगी।
इनका कहना है
मिलावटी मावा व इससे निर्मित मिठाइयों, मिलावटी दूध व पनीर, दूषित पानी के सेवन से आंतों में संक्रमण, लीवर में मवाद, पीलिया जैसी गम्भीर बीमारियां जन्म लेती हैं। उत्सव व समारोहों में मावे से निर्मित मिठाइयों के सेवन, पनीर व दूध से बचना चाहिए। पानी भी गुणवत्ता देखकर पीना चाहिए। क्योंकि यही बीमारी के कारण हैं।
डॉ. अशोक टोकस, गेस्ट्रोलॉजिस्ट, चौमूं
Published on:
01 Jan 2020 04:33 pm
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