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सैटेलाइट अस्पताल चाकसू: पांच कमरों में 13 चिकित्सक देख रहे मरीज

मरीजों एवं चिकित्सकों को सता रहा कोरोना महामारी का खतरा, लेकिन मजबूर हैं

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सैटेलाइट अस्पताल चाकसू: पांच कमरों में 13 चिकित्सक देख रहे मरीज

सैटेलाइट अस्पताल चाकसू: पांच कमरों में 13 चिकित्सक देख रहे मरीज

जयपुर/चाकसू. कोरोना महामारी की गाइड लाइन में दो गज की दूरी जरूरी है, लेकिन कस्बे के सैटेलाइट राजकीय चिकित्सालय में पर्याप्त भवन नहीं होने के कारण १३ चिकित्सकों को पांच कमरों में बैठकर मरीजों का उपचार करना पड़ रहा है। सावधानी रखने के बावजूद एक-एक कक्ष में कई चिकित्सकों के बैठने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग की पालना संभव नहीं हो पा रही है।

जानकारी के अनुसार करीब दो साल पहले यहां सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र को सरकार ने सैटेलाइट में क्रमोन्नत किया था, लेकिन सुविधाओं में कोई इजाफा नहीं हुआ। वर्तमान में यहां 13 चिकित्सक कार्यरत हैं। चिकित्सक कक्ष पांच ही हैं। ऐसे में एक कमरे में दो से तीन चिकित्सक बैठकर मरीजों का उपचार कर रहे हंै। वहीं कमरे भी छोटे हैं, जिससे पर्याप्त जगह के अभाव में सोशल डिस्टेंस की पालना नहीं हो पा रही। सोशल डिस्टेंस की पालना नहीं होने के कारण कोरोना संक्रमण का भय स्वयं चिकित्सकों में भी है। इसके बावजूद वे जान जोखिम में डालकर सेवाएं दे रहे हंै। गम्भीर बात ये है कि चाकसू क्षेत्र में ६५ लोग कोरोना पॉजिटिव आ चुके हैं। एक महिला की मौत हो चुकी है।
यह है स्थिति
एक कमरे में तीन चिकित्सक और उनको दिखाने वाले तीन मरीज तथा उनके साथ आए परिजनों से कमरा भरा रहता है। अधिकतर मरीज भी जल्दी चिकित्सक को दिखाने के चक्कर में सोशल डिस्टेंस को भूलकर एक जगह एकत्र हो जाते हैं। दवा वितरण काउन्टर पर भी मरीज या उनके परिजन बिना सोशल डिस्टेंस के खड़े रहतेे हैं। सोशल डिस्टेंस बनाने के लिए सुरक्षाकर्मी लगे हुए हैं, लेकिन फिर भी ये हाल है।


इनका कहना है -
जगह कम होने से सोशल डिस्टेंस की पालना नहीं हो रही। एक कमरे में दो से तीन चिकित्सक बैठते है। कमरे भी छोटे है। यही स्थिति वार्डो की है। फिर भी सोशल डिस्टेंस की पालना में सहयोग के लिए कई बार पुलिस को लिख चुके है। दो होमगार्ड लगा रखे है मगर वे ध्यान नहीं देते। नया भवन बने तब ही इससे राहत मिल सकती है।
डॉ. शंकर प्रजापति, प्रभारी, राजकीय सैटेलाइट अस्पताल चाकसू