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Bahraich: कोर्ट के आदेश को नहीं मानती बहराइच के इस थाने की पुलिस मासूम बच्ची को लेकर दर-दर की ठोकरे खा रही मां

Bahraich News: बहराइच जिले की पयागपुर थाने की पुलिस कोर्ट के आदेश को नहीं मानती है। एक ऐसा ही प्रकरण सामने आया है। जिसमें पीड़िता अपने 7 साल के मासूम बेटी को लेकर न्याय के लिए कोर्ट कचहरी का चक्कर लगा रही है। लेकिन कोर्ट के आदेश के बाद भी केस दर्ज न होने से महिला काफी परेशान है।

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Bahraich News

थाना पयागपुर जनपद बहराइच

Bahraich News: बहराइच जिले की पयागपुर थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली महिला की पुलिस ने नहीं सुना तो उसने अपने अधिवक्ता के माध्यम से अपर सत्र विशेष न्यायाधीश पास्को एक्ट के यहां एक वाद प्रस्तुत कर कहा कि उसकी 7 साल की बेटी बकरी चरा रही थी। इस दौरान एक दबंग व्यक्ति उसे जबरन गन्ने के खेत में खींच ले गया। उसके कपड़े फाड़ दिए। जबरन उसके साथ दुष्कर्म करने का प्रयास किया। कोर्ट ने इस मामले में पुलिस को केस दर्ज कर विवेचना करने के आदेश दिए थे। लेकिन पुलिस ने एक माह बाद भी केस दर्ज नहीं किया।

Bahraich News: बहराइच जिले के पयागपुर थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली महिला ने कोर्ट पर प्रस्तुत किए गए वाद में कहा कि बीते 27 जून को उसकी बेटी शाम के समय बकरी चरा रही थी। इस दौरान एक दबंग व्यक्ति उसे गन्ने के खेत में खींच ले गया। उसके मुंह में कपड़ा लगाकर मुंह बन्द कर दिया। तथा गन्ने के खेत में उसकी बेटी के कपड़े फाड़ कर नग्न कर दिया। इसके बाद उसके प्राइवेट पार्ट से छेड़छाड़ करने लगा। जबरन दुराचार करने का प्रयास किया। बेटी ने मुंह से कपड़ा हटाकर शोर मचाया तो गांव के लोग भी पहुंच गए। इसके बाद आरोपी कहीं शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी देते हुए मौके से भाग गया। बेटी ने मां को रोते हुए पूरी दास्तान बताई। इसके बाद पीड़िता की मां ने थाने पर प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई। उसके बाद रजिस्टर्ड डाक से एसपी को शिकायत पत्र भेजा। जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तब न्यायालय की शरण लिया।

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कोर्ट ने केस दर्ज कर विवेचना की दिए आदेश

अपर विशेष सत्र न्यायाधीश पास्को एक्ट ने अपने आदेश में कहा है कि प्रस्तुत प्रार्थना-पत्र अन्तर्गत धारा-173(4) बीएनएसएस स्वीकार किया जाता है। थानाध्यक्ष पयागपुर, जनपद बहराइच को आदेशित किया जाता है कि वह प्रार्थना-पत्र में वर्णित तथ्यों के आलोक में सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत करके नियमानुसार विवेचना करें। तथा कृत कार्रवाई से तीन दिवस के अंदर न्यायालय को अवगत करायें। इस संबंध में प्रभारी निरीक्षक पयागपुर ने बताया कि प्रकरण संज्ञान में नहीं है। अभी देख कर बताते हैं।