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MP Election Result: बैहर सीट से कांग्रेस प्रत्याशी संजय उइके 551 वोटों से चुनाव जीते

बालाघाट जिले की बैहर विधानसभा सीट से कांग्रेस के संजय उइके ने भाजपा के भगत नेताम को हरा दिया...।

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बालाघाट की बैहर सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी संजय उइके चुनाव जीते।

बालाघाट जिले की बैहर विधानसभा सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी संजय उइके चुनाव जीत गए हैं। उन्होंने भाजपा के प्रत्याशी भगत नेताम को 551 वोटों से हरा दिया। 17 नवंबर को बैहर विधानसभा सीट पर 84.81 फीसदी वोटिंग हुई थी। यहां दो परिवार आमने-सामने थे।

बैहर सीट देर पर शाम तक चुनाव परिणाम को लेकर काफी कशमश बनी रही। इस सीट पर देर रात्रि तक परिणाम को लेकर असमंजस्य की स्थिति बनी रही। ईवीएम में मतों की गणना के दौरान कभी कांग्रेस प्रत्याशी तो कभी भाजपा प्रत्याशी बढ़त बनाते रहे। अंतिम दौर की गणना के दौरान भाजपा प्रत्याशी ने बढ़त बना ली थी। लेकिन ईवीएम की अंतिम चरण की गणना पर कांग्रेस प्रत्याशी आगे रहे। इस दौरान दोनों ही प्रत्याशियों के समर्थक अपनी-अपनी जीत का दावा करते रहे। ईवीएम की गणना के बाद जब डाक मत पत्रों को जोड़ा गया तो कांग्रेस प्रत्याशी संजय उइके 551 मतों से चुनाव जीत गए। इधर, जैसे ही कांग्रेस प्रत्याशी संजय उइके के जीत की सूचना मिली, वैसे ही उनके समर्थकों ने जश्न मनाना शुरु कर दिया। बैहर विधानसभा क्षेत्र के मतों की गणना 16 राउंड में पूरी हुई है। उल्लेखनीय है कि इस सीट पर मतगणना के प्रारंभ से लेकर 10-12 वें राउंड तक कांग्रेस प्रत्याशी संजय उइके ने बढ़त बनाई हुई थी। इसके बाद के मतगणना के चरण में संजय उइके के बढ़त का अंतर कम होते गया। अंतिम दौर की मतगणना में भाजपा प्रत्याशी ने बढ़त बनाई। जो ईवीएम की मतगणना के अंतिम दौर तक बनी रही। लेकिन पोस्टल बैलेट की गणना में कांग्रेस प्रत्याशी ने बढ़त बनाई।


पोस्टल बैलेट से बनाई बढ़त, ईवीएम में पिछड़े

कांग्रेस प्रत्याशी संजय उइके ने लगातार तीसरी बार चुनाव जीत कर हेट्रिक लगाई है। उइके ने भाजपा के भगत नेताम को 551 मतों से चुनावी शिकस्त दी है। ईवीएम की मतगणना में कांग्रेस प्रत्याशी पिछड़ गए थे। जबकि पोस्टल बैलेट में उन्होंने बढ़त बनाकर 551 मतों से जीत हासिल की है।

लगातार सक्रिय रहे उइके

नवनिर्वाचित विधायक संजय उइके क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहे। उनकी लगातार सक्रियता से जीत का मार्ग प्रशस्त हुआ है। इसके अलावा वे लगातार जनता की समस्याओं के निराकरण के लिए प्रयासरत रहे। जिसका परिणाम उन्हें चुनाव में मिला है। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने जनता से अनेक वादे किए है।


जनता की जीत

यह जीत जनता की जीत है। मतदाताओं ने जो विश्वास जताया है, उस पर खरा उतरने का हर संभव प्रयास किया जाएगा।विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।
संजय उइके, कांग्रेस

बैहर सीट का इतिहास

बैहर चुनाव की खास बात यह है कि यहां दो परिवारों का ही इस सीट पर कब्जा रहता है। कभी उइके तो कभी नेताम परिवार के पास होती है विधायक की सीट। बैहर विधानसभा सीट पर 17 नवंबर शुक्रवार को 84.81 फीसदी मत पड़े। 2018 के चुनाव में कुल 215262 मतदाताओं ने वोट डाला था और उन्होंने कांग्रेस के संजय उइके को 79399 वोट दिए थे। जबकि भाजपा की ओर से अनुपमा नेताम को 62919 वोट मिले थे। जीत का अंतर 16480 था। 2013 के चुनाव की बात करें तो बैहर विधानसभा में भी संजय उइके चुनाव जीते थे। उन्हें 82419 वोट मिले थे। जबकि भाजपा के भगत सिंह नेताम को 50067 वोट मिले थे। जीत का अंतर 32352 था। इसके पहले 2008 के चुनाव में भाजपा की ओर से भगत सिंह नेताम को 37639 वोट मिले थे और वे चुनाव जीत गए थे। जबकि कांग्रेस प्रत्याशी संजय उइके को 32922 वोट मिले थे। जीत का अंतर 4717 था।

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यहां दो ही परिवारों का होता है कब्जा

1951 में केजी नायक (कांग्रेस) नैनसिंह को हराकर पहले विधायक बने। 1957 में मुरलीधर बटाईलाल असाटी, 1962 में महिमाल सिंह नवलसिंह मसराम, 1967 में एम सिंह, 1972 और 1977 में सुधनवा सिंह नेताम, 1980 व 1985 में गणपत सिंह उइके, 1990 में सुधनवा सिंह नेताम, 1993 और 1998 में में गनपत सिंह उइके, 2003 और 2008 में भगत नेताम, 2013 और 2018 में संजय उइके जीते।


6 बार दो परिवार सामने

बैहर में उइके व नेताम परिवार में 6 बार आमना-सामना हुआ। 1980 में गनपत उइके के सामने सुधनवा सिंह नेताम खड़े हुए। 1985 में फिर आमने-सामने आए। 2003 में भाजपा से सुधनवा पुत्र भगत नेताम व कांग्रेस से गनपत उइके, 2008 में भाजपा से भगत व कांग्रेस से गनपत उइके के बेटे संजय खड़े हुए। 2013 में संजय व भगत तो 2018 में कांगे्रस से संजय व भाजपा से भगत नेताम की पत्नी अनुपमा खड़ी हुईं।


नेताम परिवार से विधायक

वर्ष 1972 के विधानसभा चुनाव में सुधनवा सिंह नेताम पहली बार चुनाव लड़े। जनता ने उन्हें विधायक निर्वाचित किया। इसके बाद वे वर्ष 1977 में पुन: विधायक निर्वाचित हुए। वर्ष 1990 में भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लडकऱ वे विधायक निर्वाचित हुए थे। वर्ष 2003 में भाजपा की ओर से सुधनवा सिंह नेताम के पुत्र भगत नेताम को प्रत्याशी बनाया गया था। भगत नेताम भी पहली बार इस चुनाव में विधायक निर्वाचित हुए। इसके बाद वे पुन: 2008 में विधायक निर्वाचित हुए। इस तरह से नेताम परिवार से 5 बार विधायक निर्वाचित होकर सदन तक पहुंचे हैं।


उइके परिवार से विधायक
वर्ष 1980 में उइके परिवार से पहली बार गनपत सिंह उइके ने चुनाव लड़े और विधायक निर्वाचित हुए। इसी तरह वे 1985, 1993, 1998 में भी विधायक निर्वाचित हुए। वर्ष 2008 में कांगे्रेस ने गनपत सिंह उइके के पुत्र संजय सिंह उइके को अपना प्रत्याशी बनाया। हालांकि, संजय उइके अपना पहला चुनाव हार गए थे। इसके बाद कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में संजय उइके 2013, 2018 में विधायक निर्वाचित हुए। इस तरह से उइके परिवार से 6 बार विधायक निर्वाचित होकर सदन तक पहुंचे हैं।


साल विजय प्रत्याशी पार्टी मत पराजित प्रत्याशी पार्टी मत