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बालाघाट तापमान ४० डिग्री सेल्सियस

सड़के सूनी गर्मी ने किया जीना मुहाल, लू के थपेड़ों से पटरी से उतरा जन जीवन

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बालाघाट. पिछले एक सप्ताह से सूरज ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हंै। मौसम विदो के मुताबिक सोमवार को अधिकतम तापमान ४० डिग्री तक पहुंचने की जानकारी मिल रही है, जो कि पिछले वर्ष मई माह के तापमान से दो डिग्री कम है। सड़क को पिघला देने वाली तपन ने जनमानस को झुलसा दिया है। उमस और तपन से बचने लोग नदी, नालों, कुंओं और प्याऊ के पानी से राहत महसूस करते देखे जा रहे हंै। वहीं वन्य प्राणी भी तेज गर्मी और पानी की तलाश में शहर में डेरा डाल रहे हैं। लू के थपेड़ों से बचने गमछा, चश्मा इत्यदि सामानों की भी खूब खरीदारी की जा रही है। इन दिनों वैनगंगातट, जागपुरघाट, बजरंगघाट स्थलों में अच्छी भीड़ देखी जा रही है।
जीना दूभर-
सोमवार से तेज लपटें चलना शुरू हो गई है। मौसम में एकाएक आए इस परिवर्तन और लू के थपेड़ों ने राहगीर का चलना दूभर कर दिया है। दोपहर के समय लोग घर में रहना ही मुनासिब समझ रहे हंै। अत्यंत आवश्यक कार्य बाजार घाट या अन्य खरीदारी लोग सुबह या शाम के समय करते दिखाई दे रहे हंै। इसी कारण दोपहर में सड़कें सूनी और बाजारों में सन्नाटा दिखाइ दे रहा है।
पेड़ो की छाव का सहारा
शहर के बाहर से आ रहे यात्री, मजदूर , कॉलेज छात्र-छात्राएं गर्मी से पेड़ों की छाव में सुकुन महसूस कर रहे हंै। नगर के मोती तालाब पार्क, काली पुतली उद्यान, सेनानी गार्डन, जागपुर घाट में भ्रमण करने वालों की भीड़ देखी जा सकती है। जानवरों के मुताबिक आगामी १० दिनों के भीतर तापमान में और परिवर्तन देखने को मिलेगा।
अस्पताल में बढ़े मरीज
गर्मी के मौसम में दूषित खाद्य पदार्थ और कई प्रकार की कोल्ड्रिस लोगों को अस्पताल के चक्कर कटवा रही है। सीएमएचओ डॉ मनोज पांडे के मुताबिक गर्मी में सावधानियां नहीं बरतने के कारण अधिकांश मरीज अस्पताल पहुंच रहे हंै। इन दिनों डायरिया, पेट दर्द, लू बुखार और गर्मी की बेचैनी से उल्टी-दस्त के मरीज अधिक संख्या में आ रहे हैं। वर्तमान में प्रतिदिन आठ से दस मरीज भर्ती हो रहे हैं।
लू लगने पर यह करें
डॉक्टरों के मुताबिक धूप से तुरंत आने के बाद कूलर, पंखे या ऐसी में हवा ना खाए। दोपहर के समय नदी, तालाबों के किनारे रहने से भी लू लगने की संभावना अधिक होती है। लू लगने पर रोगी को तुरंत छायादार जगह में लेजाकर कपड़े ढीले कर लिटाकर हवा करें। रोगी के होश में आने की दशा में उसे ठंडे पेय पदार्थ जीवन रक्षक घोल, कच्चा आम का पना आदि दे। प्याज का रस अथवा जौ के आटे को भी ताप नियंत्रण हेतु मला जा सकता है। उपरोक्त उपचार से यदि मरीज ठीक नहीं हो तो उसे तत्काल निकट के चिकित्सा संस्था में रेफर किया जाए।