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फर्जी मजदूर बनाकर शासन को 80 लाख का चूना लगाया

जिला प्रशासन ने सभी दोषी 85 ठेकेदारों को नोटिस जारी कर कार कार्रवाई के आदेश दिए थे, लेकिन अब कार्रवाई के नाम पर खानपूर्ति कर मजदूरों के कार्ड रद्द कर मामले को रफा-दफा किया जा रहा है।

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Chhindwara Online

May 22, 2015

बालाघाट. फर्जी मजदूरों के 80 लाख रुपए चूना लगाने वाले ठेकेदारों, सरपंचों पर जिला प्रशासन मेहरबानी दिखा रहा है। कार्रवाई के नाम पर 1200 फर्जी मजदूरों के कार्ड रद्द कर दिए, लेकिन इन कार्ड को बनाकर मजदूरों को लाभ दिलाने वालों पर कार्रवाई नहीं की गई। जांच में इस का बात खुलासा स्वयं श्रम अधिकारी ने किया था कि 85 ठेकेदारों ने फर्जी मजदूर बनाकर शासन को 80 लाख का चूना लगाया है। जिला प्रशासन ने सभी दोषी 85 ठेकेदारों को नोटिस जारी कर कार कार्रवाई के आदेश दिए थे, लेकिन अब कार्रवाई के नाम पर खानपूर्ति कर मजदूरों के कार्ड रद्द कर मामले को रफा-दफा किया जा रहा है।

ठेकेदारों ने बनाए फर्जी मजदूर

गृहणी, दुकानदार और दूध बिक्री का काम करने वालों तक के मजदूरी कार्ड बन गए थे, जिन्होंने शासकीय योजना का लाभ लिया। कुछ माह पूर्व तक मजूदरों को मिलने वाली शासकीय योजना के लाभ को देखते हुए लोगों की मजदूरी कार्ड बनवाने होड लग गई। ऐसे में पंजीकृत ठेकेदार, सरपंचों के पास दर्जनों लोगों ने जुगाड़ लगाना शुरू कर दिया। पैसे के नाम पर ठेकेदारों और पांच दर्जन से अधिक सरपंचों ने सैकड़ों लोगों के मजदूर होने का कार्ड बना दिया। श्रम कार्यालय, जनपद पंचायत कार्यालय में जैसे लाभ पाने के लिए ग्रामीणों की कातार लग गई। चार वर्ष में 50-80 लाख रुपए का लाभ विभिन्न योजनाओं के तहत फर्जी मजूदरों ने लिया।

मिलती है छात्रवृत्ति

जिले में 66 हजार पंजीकृत मजदूर है। वर्ष 2014-15 में 42071 मजदूरों के बच्चों को मेधावी छात्र की छात्रवृत्ति का लाभ मिल चुका है। इसके अलावा २४ हजार छात्रों को अन्य तरह की छात्रवृत्ति दी जा चुकी है।

कौन हो सकता मजदूर

शासन के नियमनुसार किसी भी व्यक्ति को मजदूर बनाने यानी मजदूर होने का कार्ड प्रमाण-पत्र देने कुछ शर्त रखी गई हैं। 18 से 60 वर्ष तक ऐसे व्यक्ति जो पंजीयकृत ठेकेदार, मनरेगा या फिर किसी भी शासकीय योजना में कम से कम प्रतिवर्ष 90 दिन काम करते हों, उन्हें मजदूर माना जाता है। ऐसे लोगों को ही शासकीय योजना का लाभ मिल सकता है।

यह मिलता है लाभ

पंजीयकृत महिला मजदूर को प्रसूती के दौरान 45 दिन का आवास और उसके पति को १५ का अवकाश इस दौरान शासन की ओर से भत्ता मिलता है। मजदूर के पुत्री के विवाह पर 25 हजार रुपए सहायता। 45 वर्ष से कम के मजदूर की मृत्यु पर 78 हजार रुपए और 45 वर्ष से अधिक के मजदूर की मृत्यु पर 28 हजार रुपए सहायता। मजदूर के बच्चों को मेधावी छात्र पुरस्कार, नागपुर के 6 और इंदौर के एक अस्पताल में इलाज कराने पर 30 हजार से 2 लाख रुपए तक की सहायता। 6 वर्ष पुराने श्रमिक को भवन निर्माण में 1 लाख 20 हजार रुपए मुख्यमंत्री आवास का लाभ। मजदूर के बच्चों को पीएससी और यूपीएससी के प्रथम चरण और द्वितीय चरण में सफल होने पर प्रोत्साहन राशि दी जाती है।

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