
बालाघाट. उज्जैन के महाकाल लोक घोटाले ने भाजपा के कारनामों को उजागर कर दिया है। कांग्रेस ने इस घोटाले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। शनिवार को स्थानीय सर्किट हाऊस में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कांग्रेस के कार्यकारी जिला अध्यक्ष राजा सोनी, प्रदेश पदाधिकारी पुष्पा बिसेन, अनुभा मुंजारे ने बताया कि 4 सितम्बर 2018 को तत्कालीन शिवराज सरकार ने योजना बनाई। जिसकी अनुमानित लागत 97 करोड़ 71 लाख रुपए थी। इसके बाद कमलनाथ सरकार ने राशि बढ़ाकर 300 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी। 7 मार्च 2019 को कार्यादेश जारी किया। उन्होंने बताया कि एफआरपी की प्रतिमाओं की मजबूती के लिए आंतरिक लोहे का ढांचा बनाया जाता है। लेकिन महाकाल लोक की प्रतिमाओं में नहीं बनाया गया। प्रतिमाओं के निर्माण में 12 सौ से 16 सौ ग्राम जीएसएम की नेट होना चाहिए। लेकिन वहां स्थापित प्रतिमाओं में 150 से 200 ग्राम जीएसएम की चाइनीज नेट उपयोग की गई। प्रतिमाओं को बगैर फाउंडेशन के 10 फीट ऊंचे पेडिस्टल पर सीमेंट से जोड़ा गया। इस कारण आंधी-तूफान में ये प्रतिमाएं गिरकर खंडित हो गई। निविदा में कार्यस्थल पर ही प्रयोगशाला स्थापित करने की शर्त का पालन नहीं किया गया।
कांग्रेसी नेताओं ने बताया कि 11 अक्टूबर 2022 को प्रधानमंत्री ने महाकाल लोक की प्रतिमाओं का उद्घाटन किया। इस दौरान पीएम ने प्रतिमाओं को कभी नहीं गिरने और बदरंगी नहीं होने की घोषणा भी की थी। लेकिन 24 नवम्बर 2022 को स्मार्ट सिटी प्रशासन ने पीयू कलर्स बेदरकोट प्रायमर सहित अन्य का 96 लाख रुपए का टेंडर निकाला। जबकि उक्त प्रतिमाएं तीन वर्ष की गारंटी अवधि में थी। इस तरह से महाकाल लोक में प्रतिमा लगाने के नाम पर भ्रष्टाचार किया गया।
Published on:
03 Jun 2023 10:08 pm
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