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अर्धवार्षिक परीक्षा सिर पर, नहीं मिली अंग्रेजी मान्यता

अधर में २७ बच्चों का भविष्य, आठवीं के विद्यार्थी भी नहीं ले पाएंगे अंग्रेसी माध्यम से शिक्षा, मान्यता दिलवाने एड़ी चोटी का जोर लगा रहे अभिभावक

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अर्धवार्षिक परीक्षा सिर पर, नहीं मिली अंग्रेजी मान्यता

बालाघाट. त्रैमासिक परीक्षा के बाद अब अर्ध वार्षिक परीक्षा भी सिर पर हैं। लेकिन स्कूल को अंग्रेजी माध्यम विषय की मान्यता ही नहीं मिल पाई है। मामला जिले के लालबर्रा विकासखंड के उत्कृष्ट स्कूल लालबर्रा का सामने आया है। दरअसल इस स्कूल में माध्यमिक स्कूल की कक्षा ०८ वीं तक अंग्रेजी माध्यम संचालित है। लेकिन हाई व हायर सेकेंडरी अंग्रेजी माध्यम की स्वीकृति नहीं मिल पाई है। इस कारण विद्यार्थियों और उनके पालकों को बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता सता रही है। पालकों को मानना है कि यदि वार्षिक परीक्षा के पूर्व स्कूल को अंग्रेजी माध्यम हाई व हायर सेकेंडरी की स्वीकृति नहीं मिली तो उनके बच्चों का साल बर्बाद हो जाएगा और भविष्य खराब होगा। इस कारण पालकगण अंग्रेजी माध्यम की स्वीकृति दिलवाने एड़ी जोड़ी का जोर लगा रहे हैं और आंदोलन की राह पर है।
यह है पूरा मामला
जानकारी के अनुसार जिले में करीब ६ से ०७ स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम की माध्यमिक (०८ वीं तक) कक्षाएं संचालित की जाती है। लेकिन फिर नवमीं से १२ वीं तक इन शासकीय स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम नहीं होने से पालकों को मजबूरन या तो बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिला करवाना पड़ता था या फिर हिंदी मीडियम के ही स्कूलों में आगे की पढ़ाई करवाना पढ़ता था। इस कारण पहले अंग्रेजी माध्यम फिर हिंदी माध्यम में पढ़ाई करवाने से बच्चों की मानसिक स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता था। वहीं उनकी शिक्षण क्षमता भी प्रभावित होती थी। इस कारण अभिभावकों ने आंदोलन व प्रदर्शन किए। इसके बाद जिले के अन्य स्कूल जहां ०८ वीं तक अंग्रेजी माध्यम विषय संचालित है वहां हाई व हायर सेकेंडरी भी अंग्रेजी माध्यम से संचालित किए जाने की स्वीकृति दे दी गई। लेकिन सिर्फ लालबर्रा उत्कृष्ट स्कूल को हाई स्कूल अंग्रेजी माध्यम से संचालन की स्वीकृती नहीं मिल पाई। इस कारण अब भी पालकगण चिंता में है।
अंधकार में २७ बच्चों का भविष्य
पालको की माने तो पूर्व में उनके द्वारा आंदोलन किए जाने के बाद उत्कृष्ट विद्यालयों में अंग्रेजी माध्यम से बच्चों का ०९ कक्षा में प्रवेश ले लिया गया। इसी तरह लालबर्रा उत्कृष्ट स्कूल में भी करीब २७ बच्चों ने नवमीं कक्षा में प्रवेश लिया। इसके बाद जिले के अन्य उत्कृष्ट स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम हाई स्कूल की मान्यता तो मिल गई। लेकिन लालबर्रा उत्कृष्ट स्कूल को अंग्रेजी माध्यम हाईस्कूल की स्वीकृति नहीं मिल पाई है। इस कारण यहां अंग्रेजी माध्यम के अध्यनरत करीब २७ बच्चों का भविष्य अधर में नजर आने लगा है। पालको के अनुसार अर्ध वार्षिक परीक्षा सिर पर है वहीं अब तक स्वीकृति नहीं मिल पाई है। ऐसे में उनके बच्चे कैसे वार्षिक परीक्षा दें पाएंगे और फिर दसवीं के लिए उनके बच्चों का क्या होगा यह सोचकर सभी परेशान है।
ज्ञापन सौंपकर कर रहे मांग
उत्कृष्ट स्कूल लालबर्रा में हाईस्कूल अंग्रेजी माध्यम स्वीकृति दिलाने एक बार फिर पालकों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। जिसमें पालकों ने अपने बच्चों के भविष्य का पूरा जिम्मेदार जिला प्रशासन को ठहराया और शीघ्र स्वीकृति दिलाने की मांग की। इस दौरान पालकों में लेखेश्वरी डहरवाल, शिवलाल अजीत, घनश्याम यादव, प्रदीप डहरवाल, शशिभूषण रंगारे, राजेन्द्र रंगारे, नेतराम पटले, राजकुमार गजभिए, युवनेश शरणागत, रविशंकर अजीत सहित अन्य पालक गण शामिलल रहे। सभी ने आगामी दिनों में उग्र आंदोलन की चेतावनी भी दी है।
वर्सन
हमें बाद में पता चला कि अंग्रेजी माध्यम की स्वीकृति के लिए कम से कम ३० बच्चों की लेंथ होनी चाहिए। हमारे यहां सिर्फ २७ बच्चे ही है। जनप्रतिनिधियों के कहने पर हमने प्रवेश लेकर कक्षाएं शुरू कर दी थी। वहीं हमारा स्कूल मूल्याकंन केन्द्र होने से हम ०९ वीं की वार्षिक परीक्षा भी बच्चों दिलवा देंगे। लेकिन दसवीं के लिए स्वीकृति की आवश्यकता होगी। इसके लिए हमारे द्वारा वरिष्ठों से विचार विमर्श किया जा रहा है।
रश्मि झा, प्राचार्य उत्कृष्ट स्कूल लालबर्रा

हमने प्रस्ताव बनाकर भोपाल भेजा है। यह मामला इतना बड़ा ईशू भी नहीं है। हम दोबरा प्रस्ताव रिमांड करवाएंगे। जब अन्य स्कूलों में स्वीकृति मिल चुकी है तो लालबर्रा उत्कृष्ट स्कूल को भी स्वीकृति मिल जाएगी।
मोहन बोचपे, एपीसी डीईओ कार्यालय