
आज भी गांव में नहीं पहुंची सडक़-
गांव में कच्ची पथरीली सडक़, एंबुलेंस सहित स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और पिछड़ों की तरह जीवन जीने की मजबूरी। यह हाल बालाघाट-नैनपुर मार्ग के पादरीगंज पंचायत के वन ग्राम कोटा के अब भी बने हुए हंै। यहां सडक़, बिजली, पानी, शिक्षा सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं से ग्रामीण महरूम हैं। ग्रामीणों की सबसे गंभीर परेशानी पक्की सडक़ की है। आजादी के इतने वर्षो बाद भी पक्की सडक़ नहीं बन पाने से गांव में एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती। किसी तबियत खराब होने व खासकर प्रसव पीढ़ा होने पर प्रसूता को खाट पर लेटाकर करीब पांच से छह किमी दूर सोनखान तक लाना पड़ता है। तब कहीं जाकर उपचार मिल पाता है।
40 से 42 परिवारों वाले कोटा ग्राम के ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान के इस आधुनिक युग में भी उन्हें पिछड़ों की तरह जीवन यापन करना पड़ रहा है। शासन स्तर से यदि पक्की सडक़ बना दी जाती है, ग्रामीण सडक़ के माध्यम से ब्लॉक व जिला मुख्यालय से सीधे तौर पर जुड़ सकेंगे। शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए उनका मार्ग सुगम हो सकेगा।
ग्रामीणों ने बताया कि गांव तक पहुंचने आज भी पक्की सडक़ का अभाव है। स्थिति यह है कि कुछ स्थानों पर पुलिया तो बना दी गई है, लेकिन सडक़ नहीं होने से वे पुलिया भी बेकार साबित हो रही हैं। बारिश के दिनों में हालात और बदतर हो जाते हैं। गांव का संपर्क ब्लॉक व जिला मुख्यालय से पूरी तरह कट जाता है। कई बार अधिक बारिश होने पर ग्रामीण गांव में ही कैद होने मजबूर हो जाते हैं। समय पर उपचार नहीं मिलने से ग्रामीण की मौत जैसे मामले भी घटित हो चुके हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि पिछड़ा और दूरांचल गांव होने से शासकीय योजनाएं भी उन तक नहीं पहुंच पा रही है। गांव में कुछ आदिवासी परिवारों तक पेंशन, प्रधान मंत्री आवास योजना, लाड़ली बहना जैसी योजनाएं भी उन तक नहीं पहुंच पाई है। आवास योजना के अभाव में ग्रामीण कच्चे झोपड़े नुमा मकान में किसी तरह गुजर बसर कर रहे हैं। गांव में नल जल योजना तक तो पहुंची लेकिन नलों से पानी नहीं मिल रहा है। बिजली व्यवस्था तो है, लेकिन कटौती से ग्रामीण काफी परेशान है। पूरे मामले में जिला प्रशासन के वरिष्ठों और जनप्रतिनिधियों का ध्यान आकर्षित करवाया गया है।
वर्सन
वन ग्राम होने से अधिकारी गांव के विकास को लेकर ध्यान नहीं देते हैं। यदि हमारे गांव को राजस्व ग्राम बना दिया जाता है, तो काफी कुछ सुविधाएं ग्रामीणों को मिलने लगेगी। खासकर पक्की सडक़ की दरकार है। इसके लिए पत्र व्यवहार भी किए गए हैं।
निरंजन मड़ावी, सरपंच पादरीगंज
Updated on:
15 Jan 2026 04:56 pm
Published on:
15 Jan 2026 04:56 pm
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
