
गांव में बैठे ग्रामीण।
ग्राम पंचायत नव्ही के ग्राम लोराटोला में योजना अंतर्गत लाभ से वंचित रहने की शिकायत विभाग ने प्राप्त की है। उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों को शीघ्र कार्यवाही करने के लिए कहा है। साथ ही योजना अंतर्गत शत-प्रतिशत लाभ और बैगा बसाहट संबंधी गतिविधियों को पूर्ण करने के निर्देश दिए है।
बालाघाट. गांव में मौजूद समस्याओं का निराकरण होगा। एक मात्र दिव्यांग को अब ट्राइसिकल भी मिलेगी। बच्चों के आहार वितरण के लिए व्यवस्था कराई जाएगी। साथ ही नाला में पुल निर्माण के लिए भी विचार किया जाएगा। ग्राम पंचायत नव्ही के बैगा बसाहट वाला लोराटोला अब विकास की मुख्य धारा से जुड़ जाएगा। दरअसल, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग ने विभागीय अधिकारियों ने इन समस्याओं का निराकरण करने के लिए पत्र लिखा है। पत्रिका ने गांव में न आंगनबाड़ी केंद्र न मिल रही स्वास्थ्य सुविधाएं शीर्षक से समाचार का प्रकाशन किया था। समाचार प्रकाशन के बाद सहायक आयुक्त ने इसे संज्ञान में लिया है। इसके बाद अधिकारियों को समस्याओं का निराकरण करने के लिए पत्र लिखा है।
सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग पीएन चतुर्वेदी ने विभागीय अधिकारियों को पत्र के माध्यम से अवगत कराया है कि ग्राम पंचायत नव्ही के ग्राम लोराटोला में योजना अंतर्गत लाभ से वंचित रहने की शिकायत विभाग ने प्राप्त की है। उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों को शीघ्र कार्यवाही करने के लिए कहा है। साथ ही योजना अंतर्गत शत-प्रतिशत लाभ और बैगा बसाहट संबंधी गतिविधियों को पूर्ण करने के निर्देश दिए है। उल्लेखनीय है कि ग्राम पंचायत नव्ही का लोरा टोला घने जंगलों के बीच बसा हुआ है। यह नक्सल प्रभावित क्षेत्र है। इस टोले में विशेष पिछड़ी बैगा समुदाय के लोग निवास करते हैं। यहां की आबादी करीब 250 है। गांव में करीब 40 बैगा परिवार निवास करते हैं। लेकिन ये बैगा आदिवासी सुविधाओं के आभाव में अपना जीवन-यापन कर रहे हैं।
लोराटोला में ये हैं समस्याएं
ग्राम लोराटोला में आंगनबाड़ी केंद्र नहीं है। गांव के दो दर्जन से अधिक 2 किमी दूर स्थित केंद्र नहीं जा पाते। उन्हें पोषण आहार नहीं मिल पाता है। ग्रामीणों ने अनेक बार गांव में ही आंगनबाड़ी केंद्र बनाए जाने की मांग की है। लोरा टोला में भी दो टोले है। इन दोनों टोलों के बीच नाला पड़ता है। इसी नाले को पार कर ग्रामीण एक गांव से दूसरे गांव जाते हैं। नाले के एक ओर करीब 40 तो दूसरी ओर करीब 15 घरों में बैगा आदिवासी निवास करते हैं। नाला में अभी तक पुल नहीं बन पाया है। इस गांव के ग्रामीणों को बीमार होने पर सर्वाधिक परेशानी होती है। उन्हें इलाज करवाने के लिए करीब 15 किमी की दूरी तय करना पड़ता है। पास में कोई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नहीं है। ग्रामीणों को बिठली, उकवा या फिर बिरसा के स्वास्थ्य केंद्र पहुंचना पड़ता है।
जेठू सिंह को ट्राइसिकल मिलने का मार्ग प्रशस्त
गांव में दिव्यांग जेठू सिंह मरावी भी निवास करता है। वह सोनगुड्डा में स्थित छात्रावास में भृत्य है। उसे अभी तक ट्राइसिकल नहीं मिली है। ट्राइसिकल की कमी के चलते वह पिछले दो माह से अपने काम पर नहीं गया है। गांव से सोनगुड्डा करीब 15 किमी दूर स्थित है। बारिश में दिव्यांग का आवागमन करना संभवन नहीं होता है। उसने ट्राइसिकल के लिए प्रशासन से मांग भी की। लेकिन अभी तक इसे किसी ने गंभीरता से नहीं लिया। पत्रिका में खबर प्रकाशन के बाद सहायक आयुक्त ने दिव्यांग को ट्राइसिकल प्रदान करने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया है।
Updated on:
25 Aug 2024 09:56 pm
Published on:
25 Aug 2024 09:55 pm
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