
बोर्ड परीक्षाओं के समय में भी डीजे पर नहीं सख्ती
लांजी। शादी समारोह में फुल आवाज में डीजे बजाने का चलन परीक्षार्थियों और आमजनों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। इस पर रोक लगाने जारी किए गए आदेश भी कोई मानने तैयार नहीं है। सामाजिक मांगलिक कार्य में विघ्न न डालने के संकोच से पुलिस भी इस मामले में फिक्रमंद नहीं है। कारण यहीं है कि देर रात तक डंकी चोट में डीजे धुमाल बजाए जा रहे हैं।
बता दें कि शादियों के सीजन के साथ ही वर्तमान में बोर्ड परीक्षाओं का दौर जारी है। परीक्षाओं के मद्देनजर प्रशासन ने रात 10 बजे के बाद डीजे बजाने पर प्रतिबंध भी लगाया है। लेकिन खासकर लांजी क्षेत्र में इन कागजी आदेशों का मखौल उड़ते देखा जा रहा है।
यहां सुनाई दे रही डीजे की आवाज
नगरीय क्षेत्र सहित ग्रामीण क्षेत्रों पालडोंगरी, साडरा, कारंजा, दहेगांव, बहेला, घोटी, नंदोरा सहित अनेक ग्रामों में इन दिनों देर रात तक शादियों में डीजे का दुरूपयोग आसानी से देखा जा सकता है। डीजे बजने से बच्चों को पढ़ाई में व्यवधान और मन स्थिर नहीं रहता। डीजे संचालक मनमाने समय तक जमकर डीजे चला रहे हंै।
सडक़ जाम कर रहा डीजे वाहन
देखने में आ रहा है की डीजे वाहन जिस पर साउंड सिस्टम टांगा जा रहा है, उसका आकार बढ़ता जा रहा है। विवाह वाले परिवारों से मनमाना पैसा वसूलने डीजे मालिक डीजे वाहनों पर नियम विरुद्ध वाहन की चौड़ाई से दोगुना साउंड उसमें टांग कर डीजे बजवा रहे हैं। डीजे वाहन के पास से गुजरने वाले अन्य वाहनों और राहगीरों को तकलीफ का सामना करना पड़ रहा है। वहीं जब ये डीजे वाहन रात्रि में अपना कार्य समाप्त कर लौटते हैं, तो रास्ते में भी इन वाहनों से दुर्घटना का अंदेशा बना रहता है। जाम की समस्या भी आम बात हो गई है।
यह है ध्वनि मानक नियम
एक लाउडस्पीकर की साउंड ध्वनि ही निर्धारित मानक व्यावसायिक एरिया में 55 से 60 डेसिबल तक पर्याप्त मानी है। आवासीय एरिया में 45 से 55 डेसिबल तक आवाज मान्य है। अगर कोई धार्मिक स्थल अपने परिसर में निर्धारित मानक के अंदर दो लाउड स्पीकर बजा सकता है, तो वहां के साउंड सिस्टम का परीक्षण कराने के बाद उसे दो लाउड स्पीकर लगाने की अनुमति दी जा सकती है। लेकिन इन लाउडस्पीकरों का मुंह परिसर के अंदर ही रहेगा। किसी भी धार्मिक स्थल या निजी समारोह में निर्धारित मानक से अधिक आवाज में लाउड स्पीकर बजने की शिकायत पर आवाज का परीक्षण कराने के बाद तुरंत कार्रवाई के नियम है।
एक्सपर्ट व्यू- फोटो हैं।
डॉ वर्षा सिंह के अनुसार शोर आपके सुनने की शक्ति को ही नहीं, शरीर के अन्य संवेदनशील अंगों पर भी प्रभाव डालता है। तेज शोर से हृदय घात भी हो सकता है और जान भी जा सकती है। तेज साउंड से कार्यक्षमता घटती है और एकाग्रता नष्ट हो जाती है। गर्भपात की शिकायत बढ़ती है तथा मानसिक रूप से दिव्यांग बच्चे पैदा हो सकते हैं। आंखों में जल्द चश्मा तथा एकाग्रता की कमी इसकी प्रमुख वजह है। ज्यादा देर तक लगातार शोर होता रहे तो बहरेपन के साथ हृदयाघात का खतरा होता है। तेज आवाज के चलते हृदय के करंट का कंडंशन कम हो जाता है। ऐसे में शरीर के किसी भी हिस्से में रक्त जमा होगा, तो वह हृदयगति को रोक देगा।
इनका कहना है।
विवाह के समय में बारात निकलने पर सडक़ पर जाम लगता है। तेज आवाज में डीजे बजाकर नाचने का फैशन चल रहा है। इससे मरीज, बुजुर्ग और विद्यार्थियों को दिक्कत होती है। इस पर कार्रवाई होनी चाहिए।
सितमलाल कश्यप, निवासी चिचटोला
देर रात डीजे बजने से सोना मुश्किल हो जाता है। शोर से कई बार खिडक़ी दरवाजे हिलने लगते हैं। ज्यादा परेशानी होने पर शिकायत की जाती है, लेकिन बाराती कहां मानने वाले। इसलिए इस पर रोक लगनी चाहिए।
निकिता सिंह बैस, गृहिणी
वर्तमान में बोर्ड परीक्षाएं चल रही है और शादियां भी खूब हो रही है। तेज आवाज में डीजे बजाया जा रहा है, पढ़ाई में व्यवधान उत्पन्न हो रहा है। जिस पर कार्रवाई जरूरी है।
आरती ब्रम्हे, छात्रा
Published on:
07 Mar 2024 08:41 pm
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